गोबर खाद बनाने की विधि: 30 दिन में तैयार करें ऑर्गेनिक वर्मी कंपोस्ट

30 din me gobar se organic vermicompost khad banane ki vidhi

🌾 गोबर खाद बनाने की विधि

आज के समय में बहुत किसान ऑर्गेनिक खेती करना चाहते हैं। लेकिन अच्छी ऑर्गेनिक खेती के लिए ऑर्गेनिक खाद होना भी जरूरी है। अगर खेत में अच्छी खाद नहीं होगी तो खेती सही तरीके से नहीं हो पाएगी।

इस लेख में हम आसान और सरल भाषा में जानेंगे कि “गोबर खाद बनाने की विधि” क्या है और किस तरह केवल 30 से 35 दिन में अच्छी वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार की जा सकती है। यह तरीका बहुत आसान है और छोटे किसान भी इसे आसानी से कर सकते हैं।

1. 🌱 गोबर खाद क्या है

गोबर खाद एक ऑर्गेनिक खाद है जो गाय के गोबर और केंचुओं की मदद से तैयार की जाती है। इसे वर्मी कंपोस्ट खाद भी कहा जाता है। सही तरीके से तैयार करने पर यह खाद लगभग 30 से 35 दिन में तैयार हो जाती है।

2. 🐄 ताजा गोबर को तैयार कैसे करें

2.1 🔥 ताजा गोबर में क्या समस्या होती है

जब गोबर बिल्कुल ताजा होता है तब उसमें काफी गर्मी रहती है। इसके साथ-साथ उसमें मीथेन गैस भी मौजूद रहती है। अगर ऐसे ही ताजा गोबर में केंचुआ छोड़ दिया जाए तो केंचुआ मरना शुरू कर सकता है या खराब हो सकता है।

इसीलिए “गोबर खाद बनाने की विधि” में सबसे पहला और सबसे जरूरी काम गोबर को ठंडा करना होता है।

2.2 💧 गोबर को ठंडा करने की सही विधि

गोबर को ठंडा करने के लिए उसमें भरपूर पानी देना चाहिए। पानी देने से गोबर के अंदर की मीथेन गैस बाहर निकलने लगती है और गोबर धीरे-धीरे ठंडा हो जाता है।

जैसे लगभग 20 ढम्मा / टोकरी गोबर इकट्ठा किया गया, उसी तरह किसान अपने हिसाब से ज्यादा या कम गोबर ले सकते हैं। अगर एक ट्रॉली या दो ट्रॉली गोबर हो तब भी यही तरीका अपनाना होता है।

2.3. 🚿 पानी कितनी मात्रा में देना चाहिए

✔️ पानी देते समय ध्यान रखें

  • 20 ढम्मा / टोकरी गोबर में लगभग 10 बाल्टी पानी देना चाहिए
  • गोबर को पूरी तरह भिगाना जरूरी है
  • अगर एक बार में पूरा नहीं भीगता तो दिन में 2 से 3 बार पानी दें
  • पानी ऊपर से इस तरह डालें कि वह बहकर नीचे तक जाए
  • पानी जाने से गोबर की गैस बाहर निकलती रहती है

2.4.🌡️ कैसे पहचानें कि गोबर ठंडा हो गया है

शुरुआत में जब हाथ गोबर में डालते हैं तो वह गर्म महसूस होता है। लेकिन लगातार पानी देने के बाद गोबर ठंडा होने लगता है।

लगभग चौथे दिन गोबर पूरी तरह ठंडा हो जाता है और उसमें गैस नहीं रहती। इसके बाद उसमें केंचुआ डालना सुरक्षित माना जाता है।

3. 💨 मीथेन गैस निकालना क्यों जरूरी है

मीथेन गैस रहने पर केंचुआ सुरक्षित नहीं रहता। अगर गैस वाला गर्म गोबर होगा तो केंचुआ मर सकता है या भाग सकता है।

इसीलिए गोबर को पहले अच्छी तरह पानी देकर ठंडा करना जरूरी बताया गया है। जब गोबर पूरी तरह ठंडा हो जाए तभी उसे वर्मी कंपोस्ट बेड में डालना चाहिए।

4. 🛏️ वर्मी कंपोस्ट बेड / क्यारी कैसे बनाएं

4.1. 🧴 बेड / क्यारी के नीचे प्लास्टिक क्यों बिछाएं

बेड तैयार करते समय नीचे प्लास्टिक बिछाया जाता है। इससे दो बड़े फायदे होते हैं:

✔️ प्लास्टिक लगाने के फायदे

  • केंचुआ जमीन में नहीं जाता
  • वर्मी वॉश इकट्ठा किया जा सकता है

अगर बिना प्लास्टिक के खाद बनाएंगे तो वर्मी वॉश जमीन में चला जाएगा और उसे इकट्ठा नहीं किया जा सकेगा।

4.2. 📏 बेड / क्यारी की चौड़ाई कितनी रखें

बेड की चौड़ाई लगभग 2 या 3 फीट रखनी चाहिए।

2 या 3 फीट चौड़ाई रखने से किसान दोनों तरफ से आसानी से गोबर को ऊपर-नीचे कर सकते हैं और काम करने में सुविधा रहती है। लंबाई गोबर की मात्रा के हिसाब से रखी जा सकती है। जैसे 40 फीट या 50 फीट।

4.3. 📐 बेड / क्यारी की ऊंचाई कितनी रखें

✔️ सही ऊंचाई

  • 1 फीट से 1.5 फीट तक

अगर बेड ज्यादा ऊंचा बना दिया जाए तो गोबर फिर से गर्म होने लगता है। इससे केंचुआ खराब हो सकता है या मर सकता है।

5. 🍯 बेसन और गुड़ का उपयोग

5.1. 🥣 बेसन और गुड़ क्यों डालते हैं

बेसन और गुड़ का घोल केंचुओं की वृद्धि के लिए उपयोग किया जाता है। यह घोल गोबर में अच्छी तरह डालना चाहिए ताकि पूरा बेड अच्छी तरह भीग जाए।

5.2. ⚖️ कितना बेसन और गुड़ डालें

करीब:

  • 250 ग्राम बेसन
  • 1 किलो गुड़
  • 1 बाल्टी पानी

इन सभी को अच्छी तरह घोलकर बेड में डालना चाहिए। अगर गोबर ज्यादा हो तो मात्रा भी बढ़ानी पड़ सकती है।

6. 🪱 केंचुआ कितना डालना चाहिए

करीब 20 से 25 ढम्मा / टोकरी गोबर में लगभग 6 किलो केंचुआ डालने की बात बताई गई है।

✔️ ज्यादा केंचुआ डालने का फायदा

  • खाद जल्दी तैयार होती है
  • केंचुआ तेजी से गोबर खाता है
  • उसका वेस्ट ही खाद बनता जाता है

अगर 10 किलो केंचुआ डाला जाए तो खाद लगभग 20 दिन में भी तैयार हो सकती है।

7. 🌤️ बेड (क्यारी) को ढकना क्यों जरूरी है

☀️ धूप से बचाव जरूरी है

केंचुआ अंधेरे में काम करता है। अगर उस पर सीधी धूप या ज्यादा रोशनी पड़ेगी तो केंचुआ मर सकता है। इसलिए बेड को ढकना जरूरी होता है।

🌾 बेड को किस चीज से ढकें

बेड को इन चीजों से ढका जा सकता है:

  • पुवाल
  • जूट का बोरा

✔️ पुवाल का फायदा

  • नमी बनाए रखता है
  • अच्छा अंधेरा बनाता है

जरूरत पड़ने पर ऊपर से पॉलिथीन भी डाली जा सकती है ताकि धूप सीधे अंदर न जाए।

8.⏳ खाद तैयार होने में कितना समय लगता है

अगर पूरी प्रक्रिया सही तरीके से की जाए तो लगभग 30 से 35 दिन में 100% ऑर्गेनिक वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार हो जाती है।

9. 👨‍🌾 किसानों के लिए जरूरी सुझाव

✅ जरूरी बातें

  • ताजा गोबर में सीधे केंचुआ न डालें
  • पहले गोबर को पानी देकर ठंडा करें
  • बेड ज्यादा ऊंचा न बनाएं
  • बेड को धूप से बचाकर रखें
  • नमी बनाए रखें
  • ज्यादा केंचुआ डालने से खाद जल्दी तैयार होती है

10. ⚠️ आम गलतियां

❌ गर्म गोबर में केंचुआ डालना

इससे केंचुआ खराब हो सकता है।

❌ बेड ज्यादा ऊंचा बनाना

ज्यादा ऊंचाई से गोबर फिर गर्म हो सकता है।

❌ धूप में खुला छोड़ देना

धूप लगने से केंचुआ प्रभावित हो सकता है।

❌ कम पानी देना

कम पानी देने से गैस बाहर नहीं निकलती।

11. 🚜 खेती-किसानी से जुड़े उपयोगी लेख

12. ❓गोबर खाद बनाने की विधि: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. गोबर खाद बनाने की सही विधि क्या है?

गोबर खाद बनाने की विधि में सबसे पहले ताजा गाय के गोबर को ठंडा करना जरूरी होता है। इसके लिए गोबर में पर्याप्त मात्रा में पानी डालकर लगभग 4 दिन तक छोड़ दिया जाता है ताकि मीथेन गैस निकल जाए और गर्मी कम हो जाए। इसके बाद प्लास्टिक बिछाकर 2–3 फीट चौड़ा और 1–1.5 फीट ऊंचा वर्मी कंपोस्ट बेड तैयार किया जाता है। फिर उसमें केंचुए, बेसन और गुड़ का घोल मिलाया जाता है तथा बेड को पुवाल या जूट के बोरे से ढक दिया जाता है। सही नमी बनाए रखने पर लगभग 30–35 दिन में अच्छी ऑर्गेनिक वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार हो जाती है.

Q2. गोबर खाद बनने में कितना समय लगता है?

यदि पूरी प्रक्रिया सही तरीके से अपनाई जाए तो गोबर खाद यानी वर्मी कंपोस्ट खाद लगभग 30 से 35 दिन में तैयार हो जाती है। शुरुआत में गोबर को लगभग 4 दिन तक पानी देकर ठंडा किया जाता है, उसके बाद केंचुए डाले जाते हैं। यदि अधिक मात्रा में केंचुए उपयोग किए जाएं, जैसे लगभग 10 किलो, तो खाद 20 दिन के आसपास भी तैयार हो सकती है। हालांकि खाद जल्दी बनाने के लिए नमी बनाए रखना, धूप से बचाव करना और सही ऊंचाई वाला बेड बनाना बेहद जरूरी है। इससे केंचुओं की कार्यक्षमता बढ़ती है और गुणवत्ता वाली ऑर्गेनिक खाद प्राप्त होती है।

Q3. ताजा गोबर में सीधे केंचुआ क्यों नहीं डालना चाहिए?

ताजा गोबर में काफी गर्मी और मीथेन गैस होती है। यदि ऐसे गोबर में सीधे केंचुए डाल दिए जाएं तो वे मर सकते हैं या बेड छोड़कर निकल सकते हैं। इसलिए गोबर खाद बनाने की विधि में सबसे पहला कदम गोबर को पानी देकर ठंडा करना होता है। लगातार पानी डालने से गोबर की गैस बाहर निकलती है और लगभग चार दिन बाद गोबर केंचुओं के लिए सुरक्षित हो जाता है। यही कारण है कि अनुभवी किसान हमेशा ठंडा गोबर ही वर्मी कंपोस्ट बेड में इस्तेमाल करते हैं।

Q4. गोबर को ठंडा करने का सही तरीका क्या है?

गोबर को ठंडा करने के लिए उसमें भरपूर पानी देना चाहिए ताकि अंदर मौजूद गर्मी और मीथेन गैस धीरे-धीरे बाहर निकल सके। लगभग 20 ढम्मा या टोकरी गोबर में करीब 10 बाल्टी पानी डालना पर्याप्त माना गया है। यदि गोबर एक बार में पूरी तरह न भीगे तो दिन में 2–3 बार पानी दिया जा सकता है। पानी ऊपर से इस प्रकार डालें कि वह नीचे तक पहुंच जाए। लगभग चौथे दिन गोबर हाथ लगाने पर ठंडा महसूस होने लगता है। तभी वह वर्मी कंपोस्ट बनाने के लिए उपयुक्त माना जाता है।

Q5. वर्मी कंपोस्ट बेड की सही चौड़ाई और ऊंचाई कितनी होनी चाहिए?

अच्छी वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने के लिए बेड की चौड़ाई लगभग 2 से 3 फीट रखना सबसे उपयुक्त माना जाता है। इससे किसान दोनों तरफ से आसानी से काम कर सकते हैं और गोबर को जरूरत पड़ने पर पलट भी सकते हैं। बेड की ऊंचाई 1 से 1.5 फीट के बीच रखनी चाहिए। यदि बेड बहुत ऊंचा बना दिया जाए तो अंदर फिर से गर्मी बढ़ सकती है, जिससे केंचुओं को नुकसान पहुंच सकता है। लंबाई गोबर की उपलब्ध मात्रा के अनुसार रखी जा सकती है, जैसे 40 या 50 फीट।

Q6. वर्मी कंपोस्ट बेड के नीचे प्लास्टिक क्यों बिछाई जाती है?

गोबर खाद बनाने की विधि में बेड के नीचे प्लास्टिक बिछाने के दो महत्वपूर्ण फायदे हैं। पहला, इससे केंचुए जमीन के अंदर नहीं जाते और पूरा काम बेड के भीतर ही करते हैं। दूसरा, प्लास्टिक की वजह से वर्मी वॉश नीचे इकट्ठा किया जा सकता है। यदि प्लास्टिक न बिछाई जाए तो यह तरल पोषक तत्व जमीन में चला जाता है और उसका उपयोग नहीं हो पाता। इसलिए अच्छी गुणवत्ता की वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के लिए प्लास्टिक का उपयोग काफी लाभदायक माना जाता है।

Q7. वर्मी कंपोस्ट बनाने में बेसन और गुड़ का क्या उपयोग है?

वर्मी कंपोस्ट बनाने की प्रक्रिया में बेसन और गुड़ का घोल केंचुओं की वृद्धि और सक्रियता बढ़ाने के लिए उपयोग किया जाता है। लगभग 250 ग्राम बेसन, 1 किलो गुड़ और 1 बाल्टी पानी मिलाकर घोल तैयार किया जाता है। इस घोल को पूरे बेड में अच्छी तरह छिड़का जाता है ताकि गोबर समान रूप से भीग जाए। यदि गोबर की मात्रा अधिक हो तो इसी अनुपात में मात्रा बढ़ाई जा सकती है। यह मिश्रण केंचुओं को अनुकूल वातावरण प्रदान करता है और खाद बनने की प्रक्रिया को तेज करने में मदद करता है।

Q8. 20–25 ढम्मा गोबर में कितना केंचुआ डालना चाहिए?

करीब 20 से 25 ढम्मा या टोकरी गोबर के लिए लगभग 6 किलो केंचुआ पर्याप्त माना जाता है। यदि किसान अधिक मात्रा, जैसे 10 किलो केंचुआ उपयोग करते हैं, तो वर्मी कंपोस्ट खाद सामान्य समय से जल्दी तैयार हो सकती है। अधिक केंचुए गोबर को तेजी से खाते हैं और उनका उत्सर्जन ही उच्च गुणवत्ता वाली ऑर्गेनिक खाद में बदल जाता है। इसलिए यदि जल्दी खाद तैयार करनी हो और पर्याप्त केंचुए उपलब्ध हों, तो उनकी मात्रा बढ़ाना लाभदायक हो सकता है।

Q9. वर्मी कंपोस्ट बेड को ढकना क्यों जरूरी है?

केंचुए स्वाभाविक रूप से अंधेरे और नम वातावरण में बेहतर काम करते हैं। यदि वर्मी कंपोस्ट बेड खुला छोड़ दिया जाए और उस पर सीधी धूप पड़े, तो केंचुए प्रभावित हो सकते हैं या मर सकते हैं। इसलिए बेड को पुवाल, जूट के बोरे या जरूरत पड़ने पर पॉलिथीन से ढकना चाहिए। इससे नमी भी बनी रहती है और केंचुओं के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होता है। अच्छी तरह ढका हुआ बेड खाद बनने की प्रक्रिया को भी बेहतर बनाता है।

Q10. गोबर खाद बनाने में नमी बनाए रखना क्यों जरूरी है?

नमी वर्मी कंपोस्ट प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि गोबर में पर्याप्त नमी नहीं होगी तो मीथेन गैस सही तरीके से बाहर नहीं निकलेगी और केंचुओं की गतिविधि भी कम हो जाएगी। इसलिए शुरुआत में गोबर को अच्छी तरह भिगोना चाहिए और बाद में भी जरूरत के अनुसार नमी बनाए रखनी चाहिए। नमी सही रहने पर केंचुए तेजी से गोबर को खाद में बदलते हैं और लगभग 30–35 दिन में अच्छी गुणवत्ता की ऑर्गेनिक खाद तैयार हो जाती है।

Q11. गोबर ठंडा होने की पहचान कैसे करें?

गोबर ठंडा हुआ है या नहीं, इसकी पहचान करना बहुत आसान है। शुरुआत में जब हाथ गोबर में डालते हैं तो वह गर्म महसूस होता है। लगातार पानी देने के बाद उसकी गर्मी कम होने लगती है। लगभग चौथे दिन गोबर सामान्य तापमान का महसूस होने लगता है और उसमें से मीथेन गैस भी निकल चुकी होती है। यही सही समय होता है जब उसमें केंचुए डाले जा सकते हैं। यदि गोबर अभी भी गर्म लगे, तो कुछ और समय तक पानी देकर ठंडा करना चाहिए।

Q12. ज्यादा केंचुए डालने से क्या फायदा होता है?

ज्यादा केंचुए डालने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि वर्मी कंपोस्ट खाद जल्दी तैयार होती है। सामान्य रूप से लगभग 6 किलो केंचुए पर्याप्त होते हैं, लेकिन यदि 10 किलो तक केंचुए उपयोग किए जाएं तो खाद लगभग 20 दिन में भी तैयार हो सकती है। अधिक केंचुए तेजी से गोबर खाते हैं और उनका उत्सर्जन पौष्टिक ऑर्गेनिक खाद में बदल जाता है। हालांकि बेड की नमी और धूप से सुरक्षा बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।

Q13. गोबर खाद बनाने में सबसे आम गलतियां कौन-सी हैं?

कई किसान कुछ सामान्य गलतियों के कारण अच्छी वर्मी कंपोस्ट खाद नहीं बना पाते। सबसे बड़ी गलती गर्म गोबर में सीधे केंचुए डालना है, जिससे केंचुए मर सकते हैं। इसके अलावा बेड को बहुत ऊंचा बनाना, कम पानी देना, धूप में खुला छोड़ देना और नमी बनाए न रखना भी नुकसानदायक होता है। यदि इन गलतियों से बचा जाए और पूरी प्रक्रिया सही तरीके से अपनाई जाए, तो कम समय में अच्छी गुणवत्ता की ऑर्गेनिक खाद तैयार की जा सकती है।

Q14. क्या किसी भी मात्रा में गोबर से वर्मी कंपोस्ट बनाई जा सकती है?

हाँ, गोबर खाद बनाने की विधि छोटी या बड़ी किसी भी मात्रा के गोबर पर लागू होती है। चाहे किसान के पास 20 ढम्मा गोबर हो, एक ट्रॉली हो या उससे भी अधिक, प्रक्रिया लगभग समान रहती है। केवल पानी, बेसन, गुड़ और केंचुओं की मात्रा गोबर के अनुसार बढ़ानी या घटानी पड़ती है। इसलिए छोटे और बड़े दोनों किसान अपनी जरूरत और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार आसानी से ऑर्गेनिक वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार कर सकते हैं।

Q15. वर्मी कंपोस्ट खाद जैविक खेती के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

ऑर्गेनिक खेती की सफलता काफी हद तक अच्छी गुणवत्ता की ऑर्गेनिक खाद पर निर्भर करती है। वर्मी कंपोस्ट खाद गाय के गोबर और केंचुओं की सहायता से तैयार होती है, इसलिए यह रासायनिक खाद का प्राकृतिक विकल्प मानी जाती है। यदि खेत में अच्छी जैविक खाद उपलब्ध होगी तो खेती अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकती है। इसलिए जो किसान प्राकृतिक या जैविक खेती करना चाहते हैं, उनके लिए गोबर खाद बनाना एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

Q16. क्या बेड की लंबाई तय होती है?

नहीं, वर्मी कंपोस्ट बेड की लंबाई निश्चित नहीं होती। इसकी लंबाई पूरी तरह गोबर की उपलब्ध मात्रा पर निर्भर करती है। यदि गोबर कम हो तो छोटा बेड बनाया जा सकता है और यदि गोबर अधिक हो तो 40 या 50 फीट या उससे भी लंबा बेड तैयार किया जा सकता है। हालांकि चौड़ाई 2–3 फीट और ऊंचाई 1–1.5 फीट ही रखना बेहतर माना जाता है ताकि काम करना आसान रहे और केंचुओं के लिए उपयुक्त वातावरण बना रहे।

Q17. क्या पॉलिथीन का उपयोग करना जरूरी है?

पॉलिथीन का उपयोग हमेशा आवश्यक नहीं होता, लेकिन जरूरत पड़ने पर यह काफी उपयोगी साबित हो सकती है। मुख्य रूप से बेड को पुवाल या जूट के बोरे से ढका जाता है ताकि अंधेरा और नमी बनी रहे। यदि धूप बहुत तेज हो या अतिरिक्त सुरक्षा की जरूरत हो, तो ऊपर से पॉलिथीन भी डाली जा सकती है। इससे सीधी धूप अंदर नहीं पहुंचती और केंचुओं को सुरक्षित वातावरण मिलता है, जिससे खाद बनने की प्रक्रिया प्रभावित नहीं होती।

Q18. वर्मी वॉश क्या है और इसे क्यों बचाना चाहिए?

वर्मी कंपोस्ट बेड के दौरान निकलने वाला तरल पदार्थ वर्मी वॉश कहलाता है। इसलिए बेड के नीचे प्लास्टिक बिछाने की सलाह दी जाती है ताकि यह तरल जमीन में न जाए और आसानी से इकट्ठा किया जा सके। यदि प्लास्टिक न हो तो वर्मी वॉश सीधे मिट्टी में चला जाता है और उसका उपयोग नहीं किया जा सकता। इस कारण बेड के नीचे प्लास्टिक बिछाना एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

Q19. गोबर खाद जल्दी तैयार करने का सबसे आसान तरीका क्या है?

यदि आप कम समय में वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार करना चाहते हैं तो सबसे पहले गोबर को अच्छी तरह ठंडा करें, पर्याप्त नमी बनाए रखें और बेड को धूप से बचाकर रखें। इसके अलावा सामान्य मात्रा से अधिक केंचुए उपयोग करने पर खाद बनने की गति बढ़ सकती है। उदाहरण के लिए लगभग 10 किलो केंचुए डालने पर खाद लगभग 20 दिन में भी तैयार हो सकती है। सही बेड, पर्याप्त नमी और उचित देखभाल से बेहतरीन ऑर्गेनिक खाद प्राप्त की जा सकती है।

Q20. गोबर खाद बनाने के लिए सबसे जरूरी बातें कौन-सी हैं?

सफल वर्मी कंपोस्ट बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातों का पालन करना जरूरी है। सबसे पहले ताजा गोबर में सीधे केंचुए न डालें और पहले उसे पानी देकर ठंडा करें। बेड की ऊंचाई 1–1.5 फीट से अधिक न रखें और उसे पुवाल या जूट के बोरे से ढककर धूप से बचाएं। पूरे समय नमी बनाए रखें और आवश्यकता अनुसार बेसन, गुड़ तथा केंचुओं का सही उपयोग करें। इन सभी बातों का ध्यान रखने पर लगभग 30–35 दिन में अच्छी गुणवत्ता की ऑर्गेनिक गोबर खाद तैयार की जा सकती है।

✅ निष्कर्ष

अगर सही तरीके से “गोबर खाद बनाने की विधि” अपनाई जाए तो केवल 30 से 35 दिन में अच्छी ऑर्गेनिक वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार की जा सकती है।

गोबर को पहले ठंडा करना, सही बेड बनाना, बेसन और गुड़ का घोल डालना और केंचुओं को धूप से बचाना इस प्रक्रिया के सबसे जरूरी भाग हैं।

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