सब्ज़ी की खेती

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🌾 भारत की प्रमुख सब्ज़ियों की खेती की जानकारी

📅 सब्ज़ी खेती कैलेंडर (भारत)
🥬 सब्ज़ी🌱 बुवाई / रोपाई🟢 देर से बुवाई🥕 कटाई / तुड़ाई
🍅 टमाटरजून–जुलाई / अक्टूबर–नवंबरअगस्त / दिसंबर75–120 दिन बाद (सितंबर–मार्च)
🧅 प्याजअक्टूबर–दिसंबरजनवरी120–150 दिन बाद (मार्च–मई)
🧄 लहसुनअक्टूबर–नवंबरदिसंबर120–150 दिन बाद (मार्च–अप्रैल)
🥔 आलूअक्टूबर–नवंबरदिसंबर90–120 दिन बाद (जनवरी–मार्च)
🥕 गाजरअक्टूबर–नवंबरदिसंबर90–110 दिन बाद (जनवरी–फरवरी)
🫜 मूलीसितंबर–नवंबरदिसंबर30–60 दिन बाद (अक्टूबर–जनवरी)
🥬 पालकसितंबर–फरवरीमार्च30–45 दिन बाद (वर्षभर)
🥬 मेथी (हरी)अक्टूबर–फरवरीमार्च30–40 दिन बाद
🥬 धनिया (हरी)अक्टूबर–फरवरीमार्च35–50 दिन बाद
🥦 फूलगोभीजून–सितंबरअक्टूबर90–120 दिन बाद (अक्टूबर–जनवरी)
🥦 पत्तागोभीजुलाई–अक्टूबरनवंबर90–120 दिन बाद (नवंबर–फरवरी)
🥦 ब्रोकलीसितंबर–अक्टूबरनवंबर80–100 दिन बाद (दिसंबर–फरवरी)
🌶️ शिमला मिर्चअगस्त–सितंबरअक्टूबर75–100 दिन बाद (नवंबर–फरवरी)
🌶️ हरी मिर्चजून–जुलाई / जनवरी–फरवरीअगस्त75–120 दिन बाद
🍆 बैंगनजून–जुलाई / जनवरीअगस्त80–120 दिन बाद (अक्टूबर–अप्रैल)
🥒 खीराफरवरी–मार्च / जूनजुलाई45–60 दिन बाद
🥒 ककड़ीफरवरी–मार्च / जून–जुलाईअगस्त45–60 दिन बाद
🥒 तोरईफरवरी–मार्च / जून–जुलाईअगस्त50–70 दिन बाद
🥒 लौकीफरवरी–मार्च / जून–जुलाईअगस्त60–75 दिन बाद
🥒 करेलाफरवरी–मार्च / जूनजुलाई55–70 दिन बाद
🥒 परवलफरवरी–मार्चअप्रैल90–120 दिन बाद (जून–सितंबर)
🥒 कुंदरूफरवरी–मार्चअप्रैल90–120 दिन बाद
🎃 कद्दूफरवरी–मार्च / जून–जुलाईअगस्त90–120 दिन बाद
🎃 पेठाफरवरी–मार्च / जूनजुलाई100–120 दिन बाद
🥒 चिचिंडाफरवरी–मार्च / जूनजुलाई60–80 दिन बाद
🥒 टिंडाफरवरी–मार्च / जुलाईअगस्त55–70 दिन बाद
🌱 सेमजुलाई–अगस्त / अक्टूबरनवंबर60–80 दिन बाद
🟢 लोबियाफरवरी–मार्च / जून–जुलाईअगस्त55–70 दिन बाद
🫛 मटरअक्टूबर–नवंबरदिसंबर90–120 दिन बाद (जनवरी–मार्च)
🌿 चौलाईफरवरी–अगस्तसितंबर30–40 दिन बाद
🌿 सरसों का सागअक्टूबर–नवंबरदिसंबर45–60 दिन बाद
🥬 सलाद पत्ताअक्टूबर–जनवरीफरवरी45–60 दिन बाद
🌿 सहजन (ड्रमस्टिक)जून–अगस्तसितंबर6–8 माह बाद (दिसंबर–मार्च)
🌿 अरबीफरवरी–अप्रैलमई150–180 दिन बाद (सितंबर–नवंबर)
🍠 शकरकंदजून–जुलाईअगस्त120–150 दिन बाद (अक्टूबर–दिसंबर)
🍄 बटन मशरूमअक्टूबर – जनवरीफरवरी30–40 दिन बाद (नवंबर – मार्च)
🍄 ऑयस्टर (ढींगरी) मशरूमसितंबर – मार्चअप्रैल20–30 दिन बाद (अक्टूबर – मई)
🍄 मिल्की मशरूमअप्रैल – सितंबरअक्टूबर25–35 दिन बाद (मई – अक्टूबर)

🌱 किसान टूल्स

🥬 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

सब्ज़ी की खेती क्या है?+

सब्ज़ी की खेती वह कृषि पद्धति है जिसमें भोजन के लिए विभिन्न प्रकार की सब्ज़ियों का उत्पादन किया जाता है। भारत में टमाटर, आलू, प्याज, लहसुन, बैंगन, फूलगोभी, पत्तागोभी, भिंडी, मटर, खीरा, लौकी, करेला, कद्दू, पालक, मूली, गाजर, शिमला मिर्च और हरी मिर्च जैसी सब्ज़ियाँ प्रमुख रूप से उगाई जाती हैं।

भारत में सबसे अधिक लाभदायक सब्ज़ी कौन-सी है?+

सब्ज़ी की लाभप्रदता क्षेत्र, मौसम, मांग और बाजार भाव पर निर्भर करती है। सामान्यतः टमाटर, शिमला मिर्च, खीरा, फूलगोभी, प्याज, लहसुन, अदरक, मिर्च और ऑफ-सीजन सब्ज़ियों की खेती से किसानों को अधिक मुनाफा प्राप्त हो सकता है।

सब्ज़ी की खेती के लिए कौन-सी मिट्टी सबसे अच्छी होती है?+

अधिकांश सब्ज़ियों के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। मिट्टी का pH सामान्यतः 6.0 से 7.5 के बीच होना चाहिए। खेती शुरू करने से पहले मिट्टी परीक्षण करवाना और पर्याप्त जैविक खाद का उपयोग करना बेहतर उत्पादन के लिए लाभदायक होता है।

सब्ज़ियों की बुवाई या रोपाई का सही समय क्या है?+

सब्ज़ियों की बुवाई और रोपाई का समय फसल के अनुसार अलग-अलग होता है। टमाटर, बैंगन और मिर्च की रोपाई खरीफ व रबी दोनों मौसम में की जाती है, जबकि आलू, प्याज, गाजर, मूली, मटर, फूलगोभी और पत्तागोभी की खेती मुख्यतः रबी मौसम में तथा लौकी, कद्दू, खीरा, करेला और तोरई जैसी बेल वाली सब्ज़ियों की बुवाई फरवरी–मार्च एवं जून–जुलाई में की जाती है।

सबसे जल्दी तैयार होने वाली सब्ज़ियाँ कौन-सी हैं?+

मूली, पालक, मेथी, धनिया, चौलाई और सलाद पत्ता जैसी सब्ज़ियाँ 30–50 दिनों में तैयार हो जाती हैं। वहीं खीरा, ककड़ी, लोबिया और तोरई जैसी सब्ज़ियाँ लगभग 45–70 दिनों में उत्पादन देना शुरू कर देती हैं।

सब्ज़ी की खेती में अधिक उत्पादन और मुनाफा कैसे प्राप्त करें?+

अधिक उत्पादन के लिए प्रमाणित बीज या स्वस्थ पौध का उपयोग करें, मिट्टी परीक्षण के अनुसार उर्वरकों का प्रयोग करें, समय पर सिंचाई एवं खरपतवार नियंत्रण करें, जैविक खाद का उपयोग बढ़ाएं तथा कीट एवं रोगों का समेकित प्रबंधन (IPM) अपनाएं। उचित फसल चक्र, मल्चिंग, ड्रिप सिंचाई और सही समय पर बाजार में बिक्री करने से सब्ज़ी की खेती से अधिक मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है।