उड़द की खेती | Urad Ki Kheti

Urad Ki Kheti

उड़द की खेती: पूरी जानकारी, उत्पादन, किस्में व लाभ

उड़द एक अत्यंत महत्वपूर्ण दलहन फसल है, जो मानव शरीर के लिए आवश्यक प्रोटीन, विटामिन और खनिज तत्वों का समृद्ध स्रोत है। यह फसल प्राचीनकाल से भारत में उगाई जाती रही है। कौटिल्य के अर्थशास्त्र और चरक संहिता में उड़द का विस्तृत उल्लेख मिलता है। वैज्ञानिकों के अनुसार उड़द का उद्गम भी भारतीय उपमहाद्वीप में ही हुआ है।

उड़द की फसल जल्दी पककर तैयार हो जाती है और इसे खरीफ, रबी एवं ग्रीष्म—तीनों मौसम में उगाया जा सकता है। भारत में उड़द मुख्य रूप से दाल के रूप में उपयोग होती है तथा इससे कचौरी, पापड़, बड़ी, इमरती, हलवा, इडली और डोसा जैसे व्यंजन भी तैयार किए जाते हैं।

उड़द के पौधे और भूसी पशुओं के लिए उत्तम चारा हैं। उड़द अपने आप मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता और कार्बनिक तत्व बढ़ते हैं। इसलिए यह फसल आर्थिक और कृषि—दोनों दृष्टि से अत्यंत लाभकारी है।

उड़द का पोषण मूल्य और स्वास्थ्य लाभ

उड़द की दाल को दालों का राजा माना जाता है, क्योंकि इसमें सर्वाधिक प्रोटीन पाया जाता है। भारत में शाकाहारी लोगों के लिए प्रोटीन का सर्वोत्तम स्रोत उड़द है।

घटक (100 ग्राम में)मात्रा
नमी10.9 ग्राम
प्रोटीन24.0 ग्राम
वसा1.4 ग्राम
रेशा0.9 ग्राम
लवण3.2 ग्राम
कैल्शियम154 मिग्रा
फास्फोरस385 मिग्रा
लोहा9.1 मिग्रा
विटामिन B-10.42 मिग्रा
विटामिन B-20.37 मिग्रा
कैलोरी (ऊर्जा)350 कैलोरी

उड़द दिमाग और मांसपेशियों के विकास के लिए श्रेष्ठ है—इसलिए बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए बहुत लाभकारी है।

उड़द की खेती का वैश्विक और भारतीय परिदृश्य

विश्व भर में उड़द उत्पादन में भारत अग्रणी है। अन्य प्रमुख उत्पादक देश—म्यांमार, पाकिस्तान, जापान, थाईलैंड, सिंगापुर, बांग्लादेश, कनाडा, ईरान और पूर्वी अफ्रीका के कुछ देश हैं।

भारत में उड़द की खेती कुल दलहन क्षेत्रफल का लगभग 16.28% और कुल उत्पादन का 11.48% देती है।
वार्षिक उत्पादन लगभग 1400 लाख मीट्रिक टन है।
मुख्य उत्पादक राज्य —
▶ महाराष्ट्र
▶ मध्यप्रदेश
▶ आंध्रप्रदेश
▶ उत्तरप्रदेश
▶ तमिलनाडु

केवल इन पाँच राज्यों से भारत के 70% से अधिक उड़द का उत्पादन प्राप्त होता है।

मध्यप्रदेश और टीकमगढ़ में उड़द की खेती

मध्यप्रदेश देश का बड़ा उड़द उत्पादक राज्य है। टीकमगढ़ जिले में उड़द की खेती दलहन फसलों के लगभग 50% क्षेत्र में होती है और कुल उत्पादन में 33.46% योगदान देती है।

उड़द में 23–27% प्रोटीन होता है तथा ग्रीष्म ऋतु में उगाकर कम समय में अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है।

उड़द की खेती की उत्पादन तकनीक

1. जलवायु

  • गर्म और नम वातावरण अनुकूल
  • आदर्श तापमान — 25–30°C
  • वर्षा — 700–900 मिमी
  • फूल और दाना भरने के दौरान भारी बारिश हानिकारक

2. मिट्टी और भूमि तैयारी

  • दोमट, मध्यम या हल्की रेतीली मिट्टी उपयुक्त
  • पानी निकास अच्छी हो
  • pH — 7 से 8
  • वर्षा शुरू होने के बाद 2–3 जुताई पर्याप्त

3. उड़द की उन्नत किस्में

किस्मअवधि (दिन)पैदावार (क्विंटल/हे.)विशेषताएँ
टी-970–7510–11मध्यम काला दाना
पंत यू-307010–12पीलामोज़ेक प्रतिरोधी
खरगोन-385–908–10फैलाव वाला पौधा
पी.डी.यू-1 (बसंत बहार)70–8012–14गर्मी के लिए उपयुक्त
जवाहर उड़द-27010–11फलियाँ गुच्छों में
टी.पी.यू-470–754–4.8सीधे खड़े पौधे

4. बीज दर व बीजोपचार

  • बीज मात्रा — 6–8 किग्रा प्रति एकड़
  • बीज उपचार —
    ✔ थायरम 3 ग्राम प्रति किलो बीज या
    ✔ डायथेन M-45 2.5 ग्राम प्रति किलो बीज
    ✔ जैविक विकल्प — ट्राइकोडर्मा 5–6 ग्राम प्रति किलो बीज

5. बुवाई समय और दूरी

  • जून अंतिम सप्ताह से मानसून प्रारंभ पर बुवाई
  • कतार दूरी — 30 सेमी
  • पौधा दूरी — 10 सेमी
  • बीज गहराई — 4–6 सेमी

6. उर्वरक मात्रा

पोषक तत्वमात्रा (प्रति एकड़)
नाइट्रोजन8–12 किग्रा
फास्फोरस20–24 किग्रा
पोटाश10 किग्रा
गंधक8 किग्रा

7. सिंचाई

  • आमतौर पर सिंचाई की आवश्यकता नहीं
  • फूल और दाना भरने के समय खेत में नमी अत्यंत जरूरी

8. खरपतवार एवं गुड़ाई

  • कुल्पा / डोरा से निराई
  • नींदा-नाशक — विकोसलिन 800–1000 मि.ली. / 250 लीटर पानी प्रति एकड़ (बुवाई के तुरंत बाद)

उड़द की फसल में कीट प्रबंधन (Integrated Pest Management)

प्रमुख कीट —

  • पिस्सू भृंग
  • पत्ती मोड़क इल्ली
  • सफेद मक्खी (येलो मोज़ेक का वाहक)
  • बिहार रोमिल इल्ली

प्रमुख रासायनिक नियंत्रण

कीटदवामात्रा
इल्लियाँक्विनालफॉस2 मि.ली./ली. पानी
सफेद मक्खीडाइमिथोएट2 मि.ली./ली. पानी

यदि बीमारी के लक्षण दिखें तो 15 दिन बाद दूसरा छिड़काव करना जरूरी है।

रोग प्रबंधन

मुख्य रोग —

  • पीला चित्तेरी
  • मौजेक
  • पर्ण कुंचन
  • चूर्णी फफूंदी
  • जड़ सड़न
  • जीवाणु पत्ती झुलसा

अनुशंसित नियंत्रण

रोगनियंत्रण
पीला मोज़ेकडाइमिथोएट/मेटासिस्टॉक्स
मौजेक / पर्ण कुंचनइमिडाक्लोप्रिड बीजोपचार
पत्ती बुंदकीकार्बेन्डाजिम / मैंकोजेब
चूर्णी फफूंदीगंधक 3 किग्रा / हेक्टेयर

भंडारण के कीट एवं रोकथाम

  • दाल घुन
  • खपरा बीटिल
  • लाल सुरही

निवारण

  • दाल की नमी 8–10% रखें
  • नई या उबाले गए बोरे उपयोग करें
  • 1 भाग दाल में ¾ भाग राख मिलाना उपयोगी
  • भंडार दीवार से 2–3 फीट दूर रखें

उड़द की खेती का लागत–लाभ विश्लेषण

विवरणप्रति हेक्टेयर व्यय
कुल लागत₹18,702
औसत पैदावार10 क्विंटल
बाजार भाव (₹4500 / क्विंटल)₹45,000
शुद्ध लाभ₹26,298
लाभ–लागत अनुपात1 : 2.40

यानी हर ₹1 के खर्च पर लगभग ₹2.4 की आमदनी।

उड़द की खेती से अधिक उत्पादन के लिए अतिरिक्त महत्वपूर्ण सुझाव

✔ खेत में जलभराव बिल्कुल न होने दें
✔ बीज हमेशा प्रमाणित और रोग-मुक्त लें
✔ फसल चक्र में उड़द के बाद गेहूं/सरसों/चना बोने से उत्पादन बढ़ता है
✔ कीट प्रकोप की शुरुआती अवस्था में ही दवा का छिड़काव करें
✔ फलियों के पूरी तरह सूखने के बाद ही कटाई करें ताकि दाना खराब न हो

अतिरिक्त जानकारी और सरकारी संसाधन

अगर आप मिट्टी परीक्षणखाद की सिफारिश, या फसल पोषण प्रबंधन के बारे में और जानकारी चाहते हैं,
तो भारत सरकार के कृषि मंत्रालय द्वारा संचालित आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं:
 Soil Health Portal – Government of India

इस पोर्टल पर आपको मिलेंगे:

  • अपनी ज़मीन की मिट्टी का स्वास्थ्य कार्ड देखने की सुविधा
  • फसलवार उर्वरक सिफारिशें
  • राज्यवार कृषि वैज्ञानिक सलाह
  • और जैविक खेती से जुड़ी उपयोगी जानकारियाँ

उड़द की खेती से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQs)

Q1. उड़द की बुवाई कब करनी चाहिए?

जून के अंतिम सप्ताह से मानसून आरंभ होते ही बुवाई सर्वोत्तम रहती है।

Q2. उड़द की बीज दर कितनी है?

6–8 किग्रा प्रति एकड़ पर्याप्त है।

Q3. उड़द के लिए सबसे बेहतर किस्म कौन-सी है?

पी.डी.यू-1 (बंसत बहार), पंत उर्द-30, टी-9 और जवाहर उड़द-2 अधिक लोकप्रिय और उच्च पैदावार वाली किस्में हैं।

Q4. उड़द में कौन-सा उर्वरक देना चाहिए?

8–12 किग्रा नाइट्रोजन, 20–24 किग्रा फास्फोरस, 10 किग्रा पोटाश और 8 किग्रा गंधक प्रति एकड़ दें।

Q5. उड़द की फसल में सबसे बड़ा नुकसान किस रोग से होता है?

सफेद मक्खी द्वारा फैलने वाला येलो मोज़ेक रोग सबसे ज्यादा नुकसान करता है।

Q6. फसल में सफेद मक्खी दिखाई दे तो क्या करें?

डाइमिथोएट 2 मि.ली./ली. पानी का छिड़काव करें।

Q7. उड़द में सिंचाई कब आवश्यक होती है?

फूल और दाना भरने की अवस्था पर खेत में नमी होना बेहद आवश्यक है।

Q8. प्रति हेक्टेयर कितना लाभ मिलता है?

सामान्य परिस्थितियों में लगभग ₹26,000–30,000 प्रति हेक्टेयर।

Q9. उड़द की कटाई कब करें?

जब 80–90% फलियाँ सूखकर काली हो जाएं।

Q10. उड़द भंडारण के समय दानों में कीट न लगें, इसके लिए क्या करें?

दाल पूरी धूप में सुखाकर 8–10% नमी पर स्टोर करें और दाल में राख मिलाना लाभदायक है।

निष्कर्ष: किसानों के लिए प्रेरणादायक संदेश

उड़द की खेती कम समय में अधिक लाभ देने वाली, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने वाली और पौष्टिक दाल प्राप्त करने वाली श्रेष्ठ फसलों में से एक है। यदि किसान उन्नत किस्में, संतुलित उर्वरक, समय पर रोग-कीट प्रबंधन और वैज्ञानिक तकनीक अपनाते हैं, तो उड़द की खेती से बहुत अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है।

किसान भाइयों – सही जानकारी, समय पर मेहनत और आधुनिक खेती ही सफलता की कुंजी है। उड़द बोएं, पैदावार बढ़ाएं और अपनी आय को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएं।

👉 अन्य दलहन की खेती से जुड़े विस्तृत जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें और पूरी जानकारी पढ़ें।

संदर्भ वेबसाइट्स:
👉 Indian Institute of Horticultural Research
👉 Krishi Vigyan Kendra Portal