तिल की खेती | Til Ki Kheti

Til ki Kheti

🟢 उच्च पैदावार व आधुनिक तकनीक से तिल की खेती पूरी जानकारी

भारत में तिल (Sesame) एक महत्वपूर्ण तिलहन फसल है, जिसका उपयोग तेल और खाद्य उद्योग दोनों में होता है। तिल का तेल स्वादिष्ट, स्वास्थ्यवर्धक और बाजार में हमेशा मांग वाला होता है, इसलिए किसान इसके उत्पादन से अच्छी कमाई कर सकते हैं। कम पानी, कम लागत और अधिक लाभ के कारण तिल को गरीब किसान की सुनहरी फसल भी कहा जाता है।

मध्य प्रदेश में तिल की खेती खरीफ मौसम में लगभग 3.15 लाख हेक्टेयर में की जाती है और औसत उत्पादकता 500 किग्रा/हेक्टेयर है। मुख्य उत्पादक जिले — छतरपुर, टीकमगढ़, सीधी, शहडोल, मुरैना, शिवपुरी, सागर, दमोह, जबलपुर, मंडला, पूर्वी निमाड़ और सिवनी हैं।

इस ब्लॉग में किसान भाइयों को तिल की खेती से जुड़ी भूमि तैयार करने से लेकर भंडारण, लागत-लाभ और अधिक पैदावार के तरीके तक पूरी जानकारी दी गई है।

🟢 तिल की खेती के लिए भूमि का चयन

तिल की फसल सूखा सहनशील होती है और मध्यम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी अच्छी उपज देती है।

भूमि का प्रकारउपयुक्तता
हल्की रेतीलीबहुत अच्छी
दोमटअत्यंत उपयुक्त
भारी मिट्टीजल निकास होने पर खेती संभव

📌 भू-pH — 5.5 से 7.5 सबसे उपयुक्त
📌 भारी मिट्टी में खेती करते समय खेत में पानी रुकना नहीं चाहिए।

🟢 तिल की उन्नत किस्में एवं विशेषताएँ

किस्मपकने की अवधि (दिन)उपज (किग्रा/हेक्टेयर)तेल (%)विशेषताएँ
टी.के.जी. 30880–85600–70048–50तना व जड़ सड़न सहनशील
जे.टी-1182–85650–70046–50मैक्रोफोमिना रोग सहनशील, ग्रीष्मकालीन खेती हेतु उपयुक्त
जे.टी-1282–85650–70050–53सफेद दाना, रोग सहनशील
जवाहर तिल 30686–90700–90052कई रोगों के प्रति सहनशील
जे.टी.एस-886600–70052पत्ती धब्बा व जीवाणु अंगमारी सहनशील
टी.के.जी. 5576–7863053सफेद बीज, तना व जड़ सड़न रोग सहनशील

🟢 तिल की बुवाई का सही समय व विधि

📌 खरीफ सीजन में बुवाई

👉 जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के मध्य तक

📌 ग्रीष्मकालीन तिल

👉 जनवरी के दूसरे पखवाड़े से फरवरी के दूसरे पखवाड़े तक

बीज उपचार– अनिवार्य

दवामात्रा
थायरम2 ग्राम
कार्बेन्डाजिम1 ग्राम

➡ मिश्रण — 3 ग्राम दवा प्रति किलो बीज

बुवाई की दूरी

  • कतार से कतार दूरी — 30 सेमी
  • पौधे से पौधा दूरी — 10 सेमी
  • बीज की गहराई — 3 सेमी

🟢 उर्वरक प्रबंधन

अवस्थानाइट्रोजनफास्फोरसपोटाश
सिंचित604020
असिंचित403020

📌 सारा फास्फोरस व पोटाश + आधा नाइट्रोजन बुवाई के समय
📌 शेष नाइट्रोजन 30–35 दिन बाद निंदाई के तुरंत बाद

सिंगल सुपर फॉस्फेट देने से गंधक की कमी भी स्वतः पूरी होती है।

🟢 सिंचाई व जल प्रबंधन

तिल में जलभराव सहनशील नहीं है।

✔ खेत में निकासी की व्यवस्था हो
✔ जरुरी सिंचाई समय

अवस्थामहत्व
फूल आने परउपज बढ़ती है
दाना बनने परफलियां ज्यादा भरती हैं

🟢 खरपतवार नियंत्रण

  • पहली निराई— 15–20 दिन बाद
  • दूसरी निराई— 30–35 दिन बाद

रासायनिक खरपतवार नियंत्रण

दवामात्रासमयविधि
फ्लूक्लोरोलीन (बासालीन)1 ली./हे.बुवाई के पहलेमिट्टी में मिलाएँ
पेन्डीमिथिलीन500–700 मि.ली./हे.बुवाई के तुरंत बाद500 ली. पानी में स्प्रे
क्यूजोलोफाप इथाइल800 मि.ली./हे.15–20 दिन बाद500 ली. पानी में स्प्रे

🟢 तिल की फसल के प्रमुख रोग व नियंत्रण

रोगलक्षणसमाधान
फाइटोफ्थोरापत्तियों व तनों पर काले धब्बेरिडोमिल MZ 2.5 ग्रा/ली.
भभूतियापत्तियों पर सफेद चूर्णघुलनशील गंधक 2 ग्रा/ली.
तना व जड़ सड़नजड़ कालीथायरम + कार्बेन्डाजिम बीजोपचार
फायलोडीफूल पत्ती जैसे हो जाते हैंरोगग्रस्त पौधे हटाएँ + फोरेट
जीवाणु अंगमारीभूरे धब्बेस्ट्रेप्टोसाइक्लिन 500 PPM

🟢 कीट प्रबंधन

कीटनुकसाननियंत्रण
पत्ती मोड़कपत्तियों को अंदर से खाते हैंप्रोफेनोफॉस 50 EC 1 ली./हे.
फल्ली बेधकफूल व फलियों को नुकसानक्विनॉलफॉस / ट्रायजफॉस

🟢 निबौली अर्क बनाने की विधि (5% घोल)

  1. 10 किलो निबौली को कूटकर 20 लीटर पानी में 24 घंटे भिगोएँ
  2. अच्छे से निचोड़ें
  3. घोल को 200 लीटर तक पानी मिलाकर तैयार करें
  4. 100 मि.ली. तरल साबुन मिलाएँ
  5. स्प्रे करें

🟢 कटाई, गहाई और भंडारण

📌 जब फलियां पीली और पत्तियां गिरने लगें तो कटाई करें
📌 गट्ठे बांधकर 8–10 दिन सुखाएँ
📌 तिरपाल पर झड़ाई करें
📌 बीज में 8% नमी होने पर भंडारण करें

🟢 उत्पादन व लाभ

खेती की स्थितिअनुमानित उपज
असिंचित4–5 क्विंटल/हे.
सिंचित6–8 क्विंटल/हे.

📌 कुल लागत — ₹16,500 प्रति हेक्टेयर
📌 कुल आय — ₹30,000 प्रति हेक्टेयर
📌 शुद्ध लाभ — ₹13,500 प्रति हेक्टेयर
📌 लाभ अनुपात — 1:1.82

🟢 अधिक उपज के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

✔ रोग-कीट रोधी उन्नत किस्में अपनाएँ
✔ अनिवार्य बीजोपचार
✔ उचित दूरी व कतार पद्धति अपनाएँ
✔ तिल + उड़द / मूंग / सोयाबीन अंतरवर्तीय फसल बढ़िया विकल्प
✔ फूल और दाना बनने के समय सिंचाई
✔ समय पर निंदाई और रोग नियंत्रण

🟢 कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय – भारत सरकार

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय भारत सरकार का प्रमुख विभाग है, जो देशभर में किसानों के हितों की सुरक्षा, आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने, कृषि योजनाओं के कार्यान्वयन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए कार्य करता है। यह मंत्रालय फसल उत्पादन, कृषि अनुसंधान, बीमा योजनाएँ, सब्सिडी, फसल सुरक्षा तथा कृषि से जुड़े अन्य क्षेत्रों के लिए नीतियाँ एवं कार्यक्रम संचालित करता है। इस मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर किसान विभिन्न सरकारी योजनाओं, पोर्टल्स, अपडेट्स एवं कृषि सहायता से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
🔗 आधिकारिक वेबसाइट: https://agriwelfare.gov.in/

🟢 मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड योजना – Soil Health Card Yojana

मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड योजना किसानों को उनकी भूमि की मिट्टी की गुणवत्ता के बारे में वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करने के लिए शुरू की गई एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है। इस योजना के तहत मिट्टी जांच प्रयोगशालाओं के माध्यम से मिट्टी के नमूनों का परीक्षण किया जाता है, और किसानों को एक विस्तृत मिट्टी स्वास्थ्य रिपोर्ट दी जाती है। रिपोर्ट में मिट्टी में पोषक तत्वों की मात्रा, आवश्यक उर्वरकों का उपयोग, फसल चयन के सुझाव तथा जैविक पोषण प्रबंधन के निर्देश शामिल होते हैं। यह योजना किसानों को सही उर्वरक उपयोग में सहायता देती है, जिससे उत्पादन बढ़ता है और लागत कम होती है।
🔗 आधिकारिक पोर्टल: https://www.soilhealth.dac.gov.in/home

🟢 तिल की खेती से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQs)

❓ 1. तिल की बुवाई का सबसे अच्छा समय कौन सा है?

👉 जून के अंत से जुलाई के मध्य तक (खरीफ) और जनवरी–फरवरी (ग्रीष्मकालीन)।

❓ 2. एक एकड़ में कितना बीज लगता है?

👉 लगभग 1 से 1.5 किलो बीज पर्याप्त होता है।

❓ 3. तिल की खेती के लिए कौन सी भूमि अधिक उपयुक्त है?

👉 हल्की रेतीली और दोमट भूमि।

❓ 4. तिल में कितनी सिंचाई की आवश्यकता होती है?

👉 दो प्रमुख अवस्थाओं में — फूल आने पर और दाना भरने पर।

❓ 5. पैदावार बढ़ाने के लिए क्या उपाय जरूरी हैं?

👉 उन्नत किस्में, बीजोपचार, उचित उर्वरक प्रबंधन और समय पर सिंचाई।

❓ 6. तिल की फसल में रोग ज़्यादा क्यों आते हैं?

👉 लगातार नमी और जलभराव से रोग फैलते हैं, इसलिए निकासी जरूरी है।

❓ 7. घरेलू जैव-कीटनाशक क्या उपयोग कर सकते हैं?

👉 निबौली अर्क 5% बहुत प्रभावी है।

❓ 8. तिल की फसल में खरपतवार नियंत्रण कब करना चाहिए?

👉 15–20 दिन बाद पहली और 30–35 दिन बाद दूसरी निंदाई।

❓ 9. एक हेक्टेयर में औसत लाभ कितना है?

👉 लगभग ₹13,500 (अच्छी तकनीक अपनाने पर बढ़ सकता है)।

❓ 10. क्या तिल की अंतरवर्तीय खेती लाभकारी है?

👉 हां, तिल + मूंग/उड़द/सोयाबीन से आय व मिट्टी की सेहत दोनों बेहतर होती हैं।

🟢 Conclusion

तिल की खेती कम लागत में अधिक लाभ देने वाली सुनहरी फसल है। सही किस्म का चयन, अनिवार्य बीजोपचार, उर्वरक एवं सिंचाई प्रबंधन और रोग-कीट नियंत्रण का पालन करके किसान भाई बहुत अच्छी उपज और अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। बाजार में तिल व तिलहनों की लगातार बढ़ती मांग किसानों के लिए बड़ी कमाई का अवसर है।

🌱 कृषि वैज्ञानिकों की उन्नत तकनीक अपनाएँ – और अपने खेत, परिवार व आय में खुशहाली लाएँ।
आपकी खेती सफल हो – शुभकामनाएं!