बाजरा की खेती | Bajra ki Kheti

बाजरे की उन्नत खेती और फायदे – पूरी जानकारी
13 जुलाई 2023, भोपाल: बाजरा एक ऐसी फसल है जो विपरीत परिस्थितियों, सीमित वर्षा और कम उर्वरक वाले क्षेत्रों में भी अच्छी पैदावार देती है। यह स्वादिष्ट और पौष्टिक चारा प्रदान करती है। बाजरा दक्षिण-पूर्व एशिया, चीन, भारत, पाकिस्तान, अरब, सूडान, रूस और नाइजीरिया की प्रमुख फसलों में शामिल है।
भारत में हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में बाजरे की खेती की जाती है। मध्यप्रदेश में लगभग 2 लाख हेक्टेयर भूमि पर बाजरा उगाया जाता है, विशेषकर भिण्ड, मुरैना, श्योपुर और ग्वालियर जिलों में। भिण्ड जिले में बाजरा लगभग 45,000 हेक्टेयर भूमि में उगाया जाता है।
बाजरे के दानों में ज्वार से बेहतर पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसमें 12.4% नमी, 11.6% प्रोटीन, 5% वसा, 76% कार्बोहाइड्रेट और 2.7% मिनरल्स होते हैं। बाजरा कम नमी, कम उर्वरता और उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में उपयुक्त है और रेतीली दोमट मिट्टी में सबसे अच्छा प्रदर्शन करता है।
1. बाजरे की खेती की तैयारी
1.1 भूमि की तैयारी
बाजरे के लिए हल्की या दोमट बलुई मिट्टी उपयुक्त होती है। मिट्टी का जल निकास उत्तम होना चाहिए।
- पहली जुताई: मिट्टी पलटने वाले हल से।
- अन्य 2-3 जुताइयां: देशी हल या कल्टीवेटर से।
बाजरा काली मिट्टी, दोमट और लाल मिट्टी में उगाया जा सकता है, और पानी भरने की समस्या के लिए सहनशील है।
1.2 बुवाई का समय
बाजरा तेजी से बढ़ने वाली गर्म जलवायु की फसल है।
- असिंचित क्षेत्र: जुलाई के पहले सप्ताह में खरीफ।
- सिंचित क्षेत्र: मार्च से मध्य अप्रैल।
- दक्षिण भारत: रबी मौसम में अक्टूबर-नवंबर।
1.3 बुआई की विधि
- पंक्तियों में 25 सेमी दूरी पर बुआई।
- सीड ड्रिल से 1.5-2 सेमी दूरी।
- 6-8 किग्रा बीज प्रति हेक्टेयर।
- बीज उपचार: एग्रोसान जीएन या थीरम 3 ग्राम/किग्रा बीज।
2. बाजरे की उन्नत किस्में
- आई.सी. एम.बी 155
- डब्लू.सी.सी.75
- आई.सी. टी.बी.8203
- राज-171
उन्नत किस्मों का चुनाव अधिक पैदावार और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए आवश्यक है।
3. तापमान और जलवायु
- अंकुरण के लिए: 25°C
- विकास के लिए: 30-35°C
- उच्च तापमान सहनशील: 40°C तक
बाजरा 40-75 सेमी वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्र में अच्छी पैदावार देता है।
4. फसल चक्र
- असिंचित क्षेत्रों: बाजरा के बाद ग्वार, मुंग, मोठ।
- सिंचित क्षेत्रों: बाजरा – सरसों, बाजरा – जीरा, बाजरा – गेहूँ।
5. खाद एवं रासायनिक उर्वरक
- 5 टन गोबर/कम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर।
- वर्षा आधारित फसल: 40 किग्रा नाइट्रोजन + 40 किग्रा फास्फोरस।
- उर्वरक उपयोग मिट्टी जांच के आधार पर।
6. हानिकारक कीट एवं रोग और रोकथाम
6.1 दीमक
- रोकथाम: क्यूनालफास/क्लोरपायरीफास 1.5% पॉउडर 25-30 किग्रा/हेक्टेयर।
- बीज उपचार: क्लोरपायरीफास 4 मि.ली./किग्रा।
6.2 कातरा
- रोकथाम: क्यूनालफास 1.5% पाउडर 20-25 किग्रा/हेक्टेयर।
6.3 सफेद लट
- बीज उपचार: 3% कार्बोफ्यूरान या 5% क्यूनॉलफास + 15 किग्रा डीएपी।
6.4 रूट बग
- क्यूनॉलफॉस डेढ़ % या मिथाइल पैराथियॉन 2% 25 किग्रा/हेक्टेयर।
6.5 जोगिया, अरगट/चेपा, स्मट
- बीज उपचार: थीरम 75% + कार्बेन्डाजिम 50%।
- रोग लक्षण पर छिड़काव: मेटलैक्सिल+मैंकोजेब।
7. निराई-गुड़ाई और खरपतवार नियंत्रण
- 25-30 दिन की अवस्था में वीडर कम कल्चर से निराई।
- खरपतवार नाशक: एट्राजिन या एलाक्लोर।
- एट्राजीन: 0.5-0.75 किग्रा/हेक्टेयर, 600 लीटर पानी।
8. सिंचाई
- वर्षा आधारित फसल, लेकिन सिंचित क्षेत्र में समय-समय पर।
- 3-4 सिंचाई पर्याप्त।
- दाना बनते समय नमी आवश्यक।
9. कटाई और भंडारण
- कटाई: बुवाई के 69-75 दिन बाद (50% पूर्ण अवस्था)।
- बहुकटाई: पहली 40-45 दिन, फिर 30 दिन अंतराल।
- उत्पादन: 450-950 क्विंटल चारा।
- भंडारण: नमी रहित स्थान, 8-10% नमी।
10. बाजरे की पैदावार
- सिंचित: 3-4 टन दाना, 9-10 टन सूखा चारा प्रति हेक्टेयर।
- असिंचित: 2-3 टन दाना, 6-7 टन सूखा चारा।
11. बाजरे की खेती – 1 हेक्टेयर में लाभ सारांश
11.1. उत्पादन (Yield per Hectare)
| स्थिति | दाना (टन) | सूखा चारा (टन) |
|---|---|---|
| सिंचित | 3 – 4 | 9 – 10 |
| असिंचित | 2 – 3 | 6 – 7 |
11.2. लागत (Estimated Cost per Hectare)
| खर्च का प्रकार | अनुमानित राशि (₹) |
|---|---|
| बीज (6–8 किग्रा/हेक्टेयर) | 2,000 – 2,500 |
| खाद और रासायनिक उर्वरक | 6,000 – 7,000 |
| कीट एवं रोग नियंत्रण | 3,000 – 4,000 |
| सिंचाई और अन्य खर्च | 4,000 – 5,000 |
| श्रम और अन्य खर्च | 8,000 – 10,000 |
| कुल लागत | 23,000 – 28,500 |
11.3. आमदनी (Estimated Income per Hectare)
| उत्पाद | मात्रा | बाजार मूल्य (₹/टन) | कुल आय (₹) |
|---|---|---|---|
| बाजरे का दाना | 3 – 4 टन | 25,000 – 30,000 | 75,000 – 1,20,000 |
| सूखा चारा | 9 – 10 टन | 5,000 – 6,000 | 45,000 – 60,000 |
| कुल आय | – | – | 1,20,000 – 1,80,000 |
11.4. अनुमानित लाभ (Profit)
लाभ = कुल आय – कुल लागत
| स्थिति | लाभ (₹) प्रति हेक्टेयर |
|---|---|
| सिंचित | 95,000 – 1,55,000 |
| असिंचित | 70,000 – 1,10,000 |
नोट: ये आंकड़े सामान्य बाजार दर और औसत पैदावार के आधार पर हैं। असली लाभ मिट्टी, मौसम और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।
12. बाजरा खाने के फायदे
- ऊर्जा का उत्तम स्रोत।
- वजन घटाने में मदद।
- भूख नियंत्रण और पेट लंबे समय तक भरा।
- कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित।
- मैग्नीशियम और पोटैशियम: ब्लड प्रेशर नियंत्रण।
- उच्च फाइबर: पाचन ठीक।
- आयरन का बेहतर स्रोत, महिलाओं और बच्चों के लिए।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q1: बाजरा की बुआई का सबसे अच्छा समय कब है?
A1: खरीफ में जुलाई के पहले सप्ताह और सिंचित क्षेत्र में मार्च से मध्य अप्रैल।
Q2: बाजरा के लिए कौन सी मिट्टी उपयुक्त है?
A2: हल्की या दोमट बलुई मिट्टी, अच्छी जल निकासी के साथ।
Q3: बाजरे की उन्नत किस्में कौन सी हैं?
A3: आई.सी. एम.बी 155, डब्लू.सी.सी.75, आई.सी. टी.बी.8203, राज-171।
Q4: बाजरे में कौन-कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं?
A4: प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, मिनरल्स और नमी।
Q5: बाजरे के कीट रोग कैसे रोकें?
A5: बीज उपचार और छिड़काव से, जैसे दीमक, कातरा, सफेद लट नियंत्रण।
Q6: बाजरे की सिंचाई कितनी आवश्यक है?
A6: वर्षा पर्याप्त न हो तो 3-4 बार सिंचाई।
Q7: बाजरे की कटाई कब करें?
A7: बुवाई के 69-75 दिन बाद, या बहुकटाई में 40-45 दिन बाद।
Q8: बाजरा क्यों स्वास्थ्यवर्धक है?
A8: यह ऊर्जा, फाइबर, आयरन और मिनरल्स का उत्कृष्ट स्रोत है।
Q9: बाजरे का भंडारण कैसे करें?
A9: सूखे, नमी रहित स्थान में 8-10% नमी के साथ।
Q10: बाजरे से कितनी पैदावार होती है?
A10: सिंचित: 3-4 टन दाना; असिंचित: 2-3 टन दाना प्रति हेक्टेयर।
निष्कर्ष
बाजरा न केवल भारतीय किसानों के लिए आय का प्रमुख स्रोत है, बल्कि यह पोषण और स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। उन्नत खेती के तरीकों को अपनाकर किसान अपनी पैदावार बढ़ा सकते हैं और बाजार में अच्छा मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। किसान भाईयों, मेहनत और सही ज्ञान से बाजरा आपकी आर्थिक और पोषण संबंधी सुरक्षा का मजबूत साधन बन सकता है।
आंतरिक लिंक: मक्का की खेती से जुड़ी और जानकारी के लिए पढ़ें – Subsistence Farming
बाहरी लिंक: आधिकारिक कृषि जानकारी के लिए देखें – भारत सरकार किसान पोर्टल
