कंगनी की खेती | Kangni Ki Kheti

कंगनी की खेती

काकुन/कंगनी की खेती: कम लागत में ज्यादा मुनाफा

काकुन जिसे हम कंगनी, कौनी या अंग्रेज़ी में Foxtail Millet (Setaria italica) कहते हैं, आज के समय में फिर से भारत के किसानों की पसंद बनती जा रही है। इसका कारण है कम पानी में अधिक उत्पादन, कम लागत, और बाज़ार में बढ़ती मांग। बदलते मौसम और पानी की कमी को देखते हुए कंगनी जैसे मोटे अनाज किसानों के लिए एक सुरक्षित और लाभदायक विकल्प बन चुके हैं।

भारत सरकार भी मिलेट्स को बढ़ावा दे रही है और लोगों में मोटे अनाजों के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। कंगनी का उपयोग आहार, औषधि और पशु चारे तीनों रूप में किया जाता है। यही कारण है कि इसकी खेती छोटे और मध्यम किसानों के लिए भी बहुत लाभदायक है।

नीचे हम काकुन/कंगनी की खेती से जुड़ी हर जरूरी जानकारी आसान भाषा में, एक किसान भाई की तरह आपको समझाएंगे।

1. फसल का परिचय

कंगनी या काकुन एक मोटा अनाज है जिसे फॉक्सटेल मिलेट कहा जाता है। यह एकवर्षीय घास है, जिसका पौधा लगभग 4 से 7 फीट तक ऊँचा होता है। इसके दाने बहुत महीन होते हैं जिनका रंग किस्म के अनुसार हल्का पीला, भूरा या सफेद हो सकता है।

भारत में यह अनाज हजारों वर्षों से उगाया जाता रहा है। आज यह फिर से सुपर फूड के रूप में पहचाना जा रहा है क्योंकि इसमें प्रोटीन, फाइबर, आयरन, कैल्शियम और विटामिन भरपूर मात्रा में होते हैं।

काकुन/कंगनी की खेती के प्रमुख क्षेत्र

भारत में यह मुख्य रूप से इन राज्यों में उगाई जाती है

  • आंध्र प्रदेश
  • कर्नाटक
  • तेलंगाना
  • राजस्थान
  • महाराष्ट्र
  • तमिलनाडु
  • मध्य प्रदेश
  • उत्तर प्रदेश
  • पूर्वोत्तर राज्य

हिमाचल प्रदेश में

  • सिरमौर
  • बिलासपुर
  • सोलन
  • शिमला
  • मंडी
  • कांगड़ा
  • हमीरपुर
  • ऊना
  • कुल्लू
  • चंबा

2. वैज्ञानिक वर्गीकरण

काकुन का वैज्ञानिक नाम Setaria italica है।

  • राज्य Plantae
  • वर्ग Monocotyledonae
  • आदेश Poales
  • परिवार Poaceae
  • जीनस Setaria
  • प्रजाति Setaria italica

3. जलवायु और तापमान

कंगनी गर्म और शुष्क जलवायु में बहुत अच्छी होती है।

  • उपयुक्त तापमान 20 से 35 डिग्री सेल्सियस
  • बरसात 50 से 75 सेंटीमीटर
  • ऊँचाई समुद्र तल से 2000 मीटर तक

अधिक ठंड या जलभराव वाली जगहों में यह ठीक से नहीं बढ़ती।

4. मिट्टी की आवश्यकता

काकुन लगभग हर प्रकार की मिट्टी में उग सकती है, लेकिन सबसे अच्छा उत्पादन इन मिट्टियों में मिलता है

  • अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी
  • हल्की काली मिट्टी
  • रेतीली दोमट

मिट्टी का पीएच 5.5 से 7.5 के बीच सर्वोत्तम रहता है। खेत में पानी जमा नहीं होना चाहिए।

5. बीज और किस्में

भारत में कंगनी की कई उन्नत किस्में उपलब्ध हैं

  • SiA 3084
  • SiA 3156
  • CO 7
  • PRK 1
  • HMT 100 1
  • DHFT 109 3

स्थानीय देशी बीज भी अच्छे उत्पादन देते हैं, यदि सही तरीके से तैयार किए जाएं।

6. बीज की मात्रा

प्रति एकड़ बीज की मात्रा

  • सीधी बुवाई के लिए 2.5 से 3 किलो
  • पनीरी विधि से 800 ग्राम

बीज को बुवाई से पहले दूध और पानी के घोल में 10 से 12 घंटे भिगोकर राख में सुखाकर बोना सबसे अच्छा रहता है।

7. खेत की तैयारी

एक अच्छी फसल के लिए खेत की तैयारी बहुत जरूरी है।

  • पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से
  • दूसरी और तीसरी जुताई देसी हल या कल्टीवेटर से
  • खेत को समतल करना
  • खरपतवार पूरी तरह हटाना

8. बुवाई का तरीका

8.1 सीधी बुवाई

  • बीज को 2 से 3 सेंटीमीटर गहराई में बोएं
  • लाइन से लाइन दूरी 1.5 से 2 फुट
  • पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर

8.2 पनीरी विधि

  • एक मरला जगह में एक एकड़ की पनीरी
  • 20 से 25 दिन में रोपाई
  • पंक्ति दूरी 1.5 फुट
  • पौधे की दूरी 1 फुट

9. खाद और उर्वरक

प्रति एकड़

  • गोबर की खाद 4 से 5 टन
  • नाइट्रोजन 16 किलो
  • फास्फोरस 8 किलो
  • पोटाश 8 किलो

आधी नाइट्रोजन बुवाई के समय
बाकी 30 दिन बाद

10. सिंचाई

  • कंगनी एक बारानी फसल है।
  • आमतौर पर बारिश से ही हो जाती है
  • सूखे में 25 से 30 दिन पर पहली सिंचाई
  • 40 से 45 दिन पर दूसरी

11. खरपतवार नियंत्रण

  • बुवाई के 20 से 25 दिन बाद एक गुड़ाई
  • 40 दिन पर दूसरी गुड़ाई
  • खुरपी या त्रिपाली से

12. कीट और रोग

  • कंगनी में रोग बहुत कम लगते हैं।
  • अधिक पानी देने से कीट बढ़ते हैं।
  • नीम आधारित घोल का प्रयोग करें।

13. फसल अवधि

कंगनी 80 से 100 दिन में पक जाती है।

14. कटाई

  • जब बालियां पीली भूरी हो जाएं तब फसल काटें
  • थ्रेशर से दाना अलग करें

15. प्रति एकड़ उत्पादन

  • अनाज 6 से 7 क्विंटल
  • चारा 8 से 16 क्विंटल

16. बाजार भाव और लाभ

कंगनी का भाव 4000 से 7000 रुपये प्रति क्विंटल तक मिलता है।

औसत आय
7 क्विंटल × 6000 रुपये = 42000 रुपये

खर्च लगभग 10000 से 12000 रुपये

शुद्ध लाभ 30000 रुपये प्रति एकड़

17. भंडारण

  • दाने को अच्छी तरह सुखाएं
  • नमी से बचाएं
  • जूट की बोरियों में रखें

18. सरकारी योजनाएं

  • मोटे अनाज मिशन
  • पीएम फसल बीमा योजना
  • कृषि विभाग से बीज अनुदान

19. कंगनी के पोषक तत्व

100 ग्राम में

  • प्रोटीन 12.3 ग्राम
  • फाइबर 6.7 ग्राम
  • कैल्शियम 31 मिग्रा
  • आयरन 2.8 मिग्रा

20. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न FAQs

1. कंगनी की खेती किस मौसम में करें

गर्मी और बरसात दोनों में की जा सकती है।

2. क्या यह कम पानी में उगती है

हाँ यह कम पानी में अच्छी होती है।

3. क्या यह मधुमेह के लिए ठीक है

हाँ इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है।

4. प्रति एकड़ कितना बीज चाहिए

2.5 से 3 किलो।

5. कितने दिन में फसल तैयार होती है

80 से 100 दिन।

6. क्या इसमें रोग लगते हैं

बहुत कम।

7. क्या यह चारे के लिए उपयोगी है

हाँ बहुत अच्छा हरा चारा मिलता है।

8. कंगनी का बाजार है

हाँ मांग लगातार बढ़ रही है।

9. क्या सरकारी सहायता मिलती है

हाँ मिलेट योजना में सब्सिडी मिलती है।

10. क्या छोटे किसान इसे उगा सकते हैं

हाँ बहुत कम लागत वाली फसल है।

निष्कर्ष

काकुन या कंगनी की खेती आज के समय में किसानों के लिए सोने का अवसर है। कम पानी, कम खर्च और अच्छा बाजार इसे एक बेहतरीन फसल बनाता है। यदि आप कम जोखिम में अच्छी कमाई चाहते हैं तो Kangni Ki Kheti जरूर अपनाएं। 🌾

किसानों के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं। सही जानकारी अपनाएं, उन्नत खेती करें और आत्मनिर्भर बनें। 🌾

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संदर्भ वेबसाइट्स: