लोबिया की खेती | Lobiya Ki Kheti

लोबिया की खेती
भारत एक कृषि प्रधान देश है और दालों का हमारी खेती, पोषण और आय में बहुत बड़ा योगदान है। लोबिया ऐसी ही एक बहुउपयोगी दलहनी फसल है, जिसे हरी फली, सूखे दाने, हरी खाद और पशु चारे के रूप में उगाया जाता है। यह फसल कम लागत में अधिक लाभ देने वाली है और छोटे व सीमांत किसानों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद मानी जाती है।
लोबिया की खेती पूरे भारत में की जाती है और यह सूखा सहन करने की क्षमता, जल्दी तैयार होने और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए जानी जाती है। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम और आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जिससे यह मानव स्वास्थ्य के साथ साथ पशुओं के लिए भी बहुत उपयोगी है।
नीचे दिए गए लेख में लोबिया की खेती से जुड़ी पूरी जानकारी सरल, व्यावहारिक और किसान मित्र भाषा में दी गई है, ताकि हर किसान भाई इसे आसानी से समझ सके और अपने खेत में सफल खेती कर सके।
1. लोबिया की खेती का परिचय और महत्व
लोबिया अफ्रीकी मूल की वार्षिक दलहनी फसल है। भारत में इसे अलग अलग नामों से जाना जाता है।
इसके मुख्य लाभ इस प्रकार हैं
• यह कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती है
• यह नदीनों को शुरुआती अवस्था में पनपने से रोकती है
• यह मिट्टी में नमी बनाए रखने में सहायक है
• यह मिट्टी में जैविक नाइट्रोजन जोड़ती है
• हरी फली, दाना और चारा तीनों रूपों में उपयोगी है
2. जलवायु की आवश्यकता
2.1 उपयुक्त तापमान
• बोवाई के समय तापमान 22 से 28 डिग्री सेल्सियस
• फसल वृद्धि के लिए तापमान 22 से 35 डिग्री सेल्सियस
• कटाई के समय तापमान 30 से 35 डिग्री सेल्सियस
2.2 वर्षा की आवश्यकता
• 750 से 1100 मि.मी. वर्षा उपयुक्त मानी जाती है
• अत्यधिक जलभराव से फसल को नुकसान होता है
3. मिट्टी का चयन
लोबिया की खेती विभिन्न प्रकार की मिट्टियों में की जा सकती है, लेकिन सर्वोत्तम परिणाम के लिए
• अच्छी जल निकास वाली बलुई दोमट मिट्टी
• मिट्टी का पीएच मान 6.0 से 7.5
• जलभराव वाली भारी मिट्टी से बचें
4. उन्नत किस्में और उनकी पैदावार
4.1 पंजाब और उत्तर भारत के लिए अनुशंसित किस्में
4.1.1 Cowpea 88
• हरा चारा और दाना दोनों के लिए उपयुक्त
• फलियां लंबी और बीज मोटे, चॉकलेटी भूरे रंग के
• पीला चितकबरा और एंथ्रेक्नोज रोग प्रतिरोधी
• बीज पैदावार 4.4 क्विंटल प्रति एकड़
• हरा चारा 100 क्विंटल प्रति एकड़
4.1.2 CL 367
• अधिक फलियां देने वाली किस्म
• बीज छोटे और क्रीमी सफेद
• रोग प्रतिरोधी किस्म
• बीज पैदावार 4.9 क्विंटल प्रति एकड़
• हरा चारा 108 क्विंटल प्रति एकड़
4.2 अन्य राज्यों की लोकप्रिय किस्में
4.2.1 Kashi Kanchan
• छोटी और फैलने वाली किस्म
• गर्मी और बरसात दोनों मौसम के लिए उपयुक्त
• हरी और नर्म फलियां
• फली पैदावार 60 से 70 क्विंटल प्रति एकड़
4.2.2 Pusa Su Komal
• फली पैदावार लगभग 40 क्विंटल प्रति एकड़
4.2.3 Kashi Unnati
• हल्के हरे रंग की नर्म फलियां
• 40 से 45 दिन में कटाई योग्य
• पैदावार 50 से 60 क्विंटल प्रति एकड़
5. भूमि की तैयारी
• खेत की दो बार अच्छी तरह जुताई करें
• हर जुताई के बाद सुहागा लगाएं
• मिट्टी भुरभुरी और समतल होनी चाहिए
6. बिजाई की पूरी जानकारी
6.1 बिजाई का समय
• मार्च से मध्य जुलाई तक
6.2 कतार और पौध दूरी
• कतार से कतार दूरी 30 सेंटीमीटर
• पौधे से पौधे की दूरी 15 सेंटीमीटर
6.3 बीज की गहराई
• 3 से 4 सेंटीमीटर गहराई पर बिजाई करें
6.4 बिजाई की विधि
• पोरा ड्रिल या बीज बोने की मशीन से
7. बीज प्रबंधन
7.1 बीज की मात्रा
• हरे चारे के लिए Cowpea 88 के 20 से 25 किलो बीज प्रति एकड़
• CL 367 के लिए 12 किलो बीज प्रति एकड़
7.2 बीज उपचार
• एमिसान 6 @ 2.5 ग्राम प्रति किलो बीज
• या कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत WP @ 2 ग्राम प्रति किलो बीज
8. खाद और उर्वरक प्रबंधन
8.1 उर्वरक मात्रा प्रति एकड़
• नाइट्रोजन 7.5 किलो
• फास्फोरस 22 किलो
• पोटाश आवश्यकता अनुसार
8.2 उर्वरक स्रोत
• यूरिया 17 किलो
• सिंगल सुपर फास्फेट 140 किलो
फास्फोरस लोबिया की जड़ों और गांठों के विकास में विशेष भूमिका निभाता है।
9. खरपतवार नियंत्रण
• बिजाई के 24 घंटे के अंदर
• पेंडीमेथालिन 750 मिली
• 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें
10. सिंचाई प्रबंधन
• औसतन 4 से 5 सिंचाइयां
• गर्मी में 15 दिन के अंतर पर
• वर्षा ऋतु में आवश्यकता अनुसार
11. कीट प्रबंधन
11.1 तेला और काला चेपा
• मैलाथियॉन 50 EC 200 मिली
• 80 से 100 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़
11.2 बालों वाली सुंडी
• अगस्त से नवंबर में अधिक प्रकोप
• लोबिया के चारों ओर तिल की एक पंक्ति बोना लाभदायक
12. रोग प्रबंधन
12.1 बीज गलन और पौध नष्ट होना
• बीज जनित रोग
• अंकुरण से पहले पौधे मर जाते हैं
रोकथाम
• एमिसान 6 @ 2.5 ग्राम
• या बाविस्टिन 50 WP @ 2 ग्राम प्रति किलो बीज
13. फसल की कटाई
• बिजाई के 55 से 65 दिन बाद
• चारे और दाने के अनुसार कटाई करें
14. लोबिया की खेती से अतिरिक्त लाभ
• मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है
• अगली फसल की पैदावार में सुधार
• कम लागत और अधिक मुनाफा
• पशुपालन को बढ़ावा
15. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
15.1 लोबिया की खेती किस मौसम में करें
लोबिया की खेती गर्मी और खरीफ दोनों मौसम में की जा सकती है।
15.2 एक एकड़ में लोबिया से कितनी आय हो सकती है
अच्छी देखभाल से प्रति एकड़ अच्छा मुनाफा संभव है।
15.3 क्या लोबिया कम पानी में उगाई जा सकती है
हां, यह सूखा सहनशील फसल है।
15.4 लोबिया में सबसे जरूरी खाद कौन सी है
फास्फोरस सबसे जरूरी खाद है।
15.5 लोबिया कितने दिनों में तैयार हो जाती है
55 से 65 दिनों में।
15.6 क्या लोबिया चारे के लिए अच्छी है
हां, यह उत्तम हरा चारा देती है।
15.7 बीज उपचार क्यों जरूरी है
रोगों से बचाव और बेहतर अंकुरण के लिए।
15.8 लोबिया की खेती किस मिट्टी में अच्छी होती है
बलुई दोमट मिट्टी में।
15.9 क्या लोबिया जैविक खेती के लिए उपयुक्त है
हां, यह जैविक खेती के लिए बहुत अच्छी फसल है।
15.10 लोबिया की अधिक जानकारी कहां से लें
अधिक जानकारी के लिए dalhan ki kheti देखें।
निष्कर्ष
लोबिया की खेती भारतीय किसानों के लिए एक सुनहरा अवसर है। यह फसल कम लागत, कम पानी और कम समय में अच्छी आमदनी देती है। यदि किसान भाई सही किस्म, सही समय और वैज्ञानिक विधि से खेती करें, तो लोबिया निश्चित रूप से उनकी आय बढ़ाने में मदद करेगी।
मेहनत, सही जानकारी और धैर्य के साथ खेती करें, सफलता जरूर मिलेगी।
जय किसान, जय कृषि।
अधिक जानकारी के लिए स्रोत
👉 विस्तृत दालहन खेती गाइड
👉 Indian Institute of Horticultural Research
👉 Krishi Vigyan Kendra Portal
