भारत प्राकृतिक खेती का ग्लोबल हब

भारत प्राकृतिक खेती का वैश्विक हब बनेगा – पीएम मोदी का विज़न और किसानों के लिए नया रास्ता
प्राकृतिक खेती आज सिर्फ एक खेती पद्धति नहीं, बल्कि आने वाले समय का भविष्य बन चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोयंबटूर में आयोजित साउथ इंडिया नेचुरल फार्मिंग समिट 2025 में घोषणा की कि भारत अब प्राकृतिक खेती का वैश्विक हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की कृषि में प्राकृतिक खेती जरूरत है, और मिट्टी की बिगड़ती सेहत को सुधारने के लिए यह मार्ग सबसे बेहतर है। पीएम मोदी ने परंपरागत ज्ञान, आधुनिक विज्ञान और सरकारी सहयोग को मिलाकर किसानों की आय बढ़ाने और खेती को टिकाऊ बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण बातें कही।
आइए इस ब्लॉग में जानते हैं—पीएम मोदी का विज़न, किसानों के लिए नई संभावनाएँ, प्राकृतिक खेती की आवश्यकता, सरकारी प्रयास और कैसे हर किसान इससे लाभ उठा सकता है।
प्राकृतिक खेती क्यों है 21वीं सदी की आवश्यकता?
मिट्टी की सेहत में सुधार सबसे बड़ा कारण
पिछले कई दशकों में ज्यादा उत्पादन के लक्ष्य ने रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग को बढ़ावा दिया। इसका परिणाम:
- मिट्टी की उर्वरकता में कमी
- कीड़ों और रोगों की प्रतिरोधक क्षमता में गिरावट
- जमीन में जैविक कार्बन की कमी
- भूजल और पर्यावरण पर बुरा असर
पीएम मोदी ने कहा कि प्राकृतिक खेती मिट्टी को पुनर्जीवित करती है, और किसानों को लंबे समय में अधिक लाभ देती है।
पीएम मोदी का विज़न – भारत को बनाना है ग्लोबल लीडर
समिट में पीएम मोदी ने कहा:
- प्राकृतिक खेती केवल परंपरा नहीं, विज्ञान द्वारा समर्थित भविष्य की खेती है।
- भारत की परंपराओं में यह तरीका पहले से मौजूद है, अब इसे वैज्ञानिक समर्थन के साथ आगे बढ़ाने का समय है।
- देश में शिक्षित युवा आधुनिक तकनीकों के साथ खेती अपना रहे हैं—यह ट्रेंड भारत की कृषि को नए स्तर पर ले जाएगा।
सरकारी प्रयास और किसानों को मिलने वाला लाभ
35,000 हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती – सिर्फ तमिलनाडु में
नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत लाखों किसान जुड़ चुके हैं।
तमिलनाडु में ही अभी तक 35,000 हेक्टेयर जमीन प्राकृतिक खेती में परिवर्तित हो चुकी है।
पीएम-किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त जारी
- ₹18,000 करोड़ किसानों के खातों में ट्रांसफर
- अब तक ₹4 लाख करोड़ छोटे किसानों को सीधे लाभ
- करोड़ों किसानों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत
किसान क्रेडिट कार्ड के तहत ₹10 लाख करोड़ की सहायता
खेती, पशुपालन, मछलीपालन जैसे क्षेत्रों को सीधा फायदा।
बायो-फर्टिलाइज़र पर GST में कमी
इससे प्राकृतिक खेती की लागत और कम हो गई है।
पीएम मोदी की किसानों को प्रमुख सलाह
केवल 1 एकड़ से शुरुआत करें
पीएम मोदी ने किसानों से कहा:
“हर किसान हर साल सिर्फ 1 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती शुरू करे। इसके अनुभव के आधार पर धीरे-धीरे इसे बढ़ाएं।”
मिश्रित फसलों को अपनाएं, मोनो-कल्चर नहीं
पहाड़ों में मल्टी-क्रॉपिंग के अच्छे नतीजे मिल रहे हैं।
इससे जोखिम कम और उत्पादन बढ़ता है।
FPOs का उपयोग बढ़ाएँ
राज्य सरकारों से अपील—
FPOs की क्षमता का इस्तेमाल कर प्राकृतिक खेती को व्यापक बनाएं, खासकर माइलेज मिलेट्स (छोटी अनाज फसलें) के लिए।
नम्मलवर जी के योगदान को सम्मान
समिट का आयोजन जैविक खेती के अग्रणी वैज्ञानिक डॉ. जी. नम्मलवर के आदर्शों को आगे बढ़ाने के लिए किया गया था।
पीएम मोदी ने उनके योगदान को सम्मान देते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती की इस दिशा में सभी मिलकर नया इतिहास लिखेंगे।
समिट में ऑर्गेनिक किसानों को सम्मानित किया गया और नए शोध विचारों को बढ़ावा देने के लिए वैज्ञानिकों से अपील की गई कि:
- प्राकृतिक खेती को कृषि पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए
- किसानों की जमीन को लिविंग लैब की तरह उपयोग किया जाए
प्राकृतिक खेती अपनाने के प्रमुख फायदे
1. उत्पादन लागत में भारी कमी
- रासायनिक खाद पर खर्च लगभग शून्य
- देसी गाय आधारित इनपुट आसानी से उपलब्ध
2. मिट्टी की उर्वरकता बढ़ती है
- जैविक कार्बन वापस बढ़ता है
- धरती की क्षमता पुनर्जीवित होती है
3. फसल की गुणवत्ता बेहतर
- अधिक पौष्टिक
- स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित
- बाजार में अधिक कीमत मिलती है
4. पर्यावरण संरक्षण
- जल प्रदूषण कम
- मिट्टी और वायु दोनों सुरक्षित
5. निर्यात की बड़ी संभावनाएँ
जैविक उत्पादों की वैश्विक मांग दोगुनी हो रही है – भारत इसमें अग्रणी बन सकता है।
भारत की प्राकृतिक खेती का भविष्य
पीएम मोदी के अनुसार:
- भारत प्राकृतिक खेती के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरेगा
- वैज्ञानिक और पारंपरिक ज्ञान मिलकर नई तकनीकें विकसित करेंगे
- युवा, महिलाएं और छोटे किसान इस मिशन की रीढ़ बनेंगे
- प्राकृतिक खेती से भारत की कृषि अधिक टिकाऊ और लाभदायक बनेगी
FAQs – प्राकृतिक खेती से जुड़े 10 महत्वपूर्ण सवाल
Q1. प्राकृतिक खेती क्या है?
प्राकृतिक खेती एक ऐसी पद्धति है जिसमें रासायनिक खाद व कीटनाशकों के बिना, पूरी तरह जैविक और प्राकृतिक तरीकों से खेती की जाती है।
Q2. क्या प्राकृतिक खेती से पैदावार कम हो जाती है?
शुरुआत में थोड़ा फर्क दिख सकता है, पर 2–3 सीजन बाद उत्पादन स्थिर और बेहतर हो जाता है।
Q3. क्या छोटे किसान प्राकृतिक खेती कर सकते हैं?
हाँ, यह उन्हीं के लिए सबसे अधिक फायदेमंद है क्योंकि लागत बहुत कम होती है।
Q4. प्राकृतिक खेती में गाय का क्या महत्व है?
गाय आधारित घोल (जीवामृत, घनजीवामृत) मिट्टी की सेहत बढ़ाते हैं और फसलों की सुरक्षा करते हैं।
Q5. क्या इसके लिए ज्यादा प्रशिक्षण की जरूरत है?
थोड़ा प्रशिक्षण जरूरी है, पर यह सीखना आसान है। सरकार और FPOs मदद कर रहे हैं।
Q6. क्या प्राकृतिक उत्पादों की कीमत ज्यादा मिलती है?
हाँ, बाजार और निर्यात दोनों में जैविक उत्पाद अधिक मूल्य पर बिकते हैं।
Q7. क्या इसमें पानी की बचत होती है?
जी हाँ, प्राकृतिक खेती में मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है।
Q8. क्या सरकारी सहायता उपलब्ध है?
हाँ, PM-Kisan, KCC, और बायो-फर्टिलाइज़र GST में कमी जैसे कई लाभ मिल रहे हैं।
Q9. क्या मैं सिर्फ 1 एकड़ पर शुरुआत कर सकता हूँ?
हाँ, यही पीएम मोदी की सलाह भी है—1 एकड़ से शुरू करें और फिर बढ़ाएँ।
Q10. प्राकृतिक खेती से मिट्टी पर क्या प्रभाव पड़ता है?
मिट्टी जीवंत होती है, उसमें केंचुए, जैविक कार्बन और पोषक तत्व बढ़ते हैं।
भारतीय किसानों के नाम प्रेरक संदेश
प्रिय किसान भाइयो और बहनो,
प्राकृतिक खेती केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि धरती को बचाने, आय बढ़ाने और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देने का माध्यम है। यह रास्ता आसान भी है और लाभदायक भी।
पीएम मोदी का विज़न हमें दिशा दिखाता है कि भारत दुनिया का अग्रणी कृषि देश बन सकता है, बस हमें एक छोटा कदम उठाने की ज़रूरत है—
सिर्फ 1 एकड़ से प्राकृतिक खेती की शुरुआत करें।
आपका हर कदम देश की मिट्टी, पर्यावरण और कृषि को नई शक्ति देगा।
आइए, मिलकर भारत को प्राकृतिक खेती का वैश्विक हब बनाएं!
