अरहर की खेती | Arhar Ki Kheti

🌱 अरहर की खेती: उन्नत विधि, किस्में, उत्पादन व लाभ
दलहनी फसलों में अरहर (तुअर/तूर) का विशेष स्थान है। इसमें लगभग 20–21% प्रोटीन पाया जाता है, जो शरीर के लिए अत्यंत लाभकारी होता है।
अरहर की जड़ें मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करती हैं, जिससे भूमि की उर्वरता बढ़ती है। यह फसल शुष्क और असिंचित क्षेत्रों में भी अच्छी पैदावार देती है।
महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश अरहर उत्पादन के प्रमुख राज्य हैं।
🌾 अरहर की प्रमुख किस्में (Varieties)
अरहर की खेती के लिए विभिन्न शीघ्र, मध्यम और देर से पकने वाली प्रजातियाँ उपलब्ध हैं। किसान अपने क्षेत्र और मौसम के अनुसार इनका चयन कर सकते हैं।
⚡ शीघ्र पकने वाली प्रजातियाँ
- उपास 120
- पूसा 855
- पूसा 33
- पूसा अगेती
- आजाद (के 91-25)
- जाग्रति (आईसीपीएल 151)
- दुर्गा (आईसीपीएल-84031)
- प्रगति
🌿 मध्यम अवधि में पकने वाली प्रजातियाँ
- टाइप 21
- जवाहर अरहर 4
- आईसीपीएल 87119 (आशा)
- वीएसएमआर 583
🌾 देर से पकने वाली प्रजातियाँ
- बहार
- बीएमएएल 13
- पूसा-9
🌼 हाईब्रिड प्रजातियाँ
- पीपीएच-4
- आईसीपीएच-8
🌱 रबी बुवाई के लिए उपयुक्त प्रजातियाँ
- बहार
- शरद (डीए 11)
- पूसा 9
- डब्लूबी 20
🌤 बुआई का समय
अरहर की शीघ्र पकने वाली किस्मों की बुआई जून के पहले पखवाड़े में करनी चाहिए।
मध्यम और देर से पकने वाली किस्में जून के दूसरे पखवाड़े में बोई जाती हैं।
बुआई के लिए सीड ड्रिल या हल के पीछे चोंगा बांधकर पंक्तियों में बुवाई करनी चाहिए।
🌍 भूमि का चुनाव और तैयारी
अच्छे जलनिकास वाली दोमट मिट्टी अरहर की खेती के लिए सबसे उपयुक्त होती है।
पानी का ठहराव फसल को नुकसान पहुँचाता है, इसलिए खेत समतल और जलनिकासी युक्त होना चाहिए।
भूमि तैयारी के चरण:
- मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी जुताई करें।
- उसके बाद 2–3 बार हल या हैरो से जुताई करें।
- प्रत्येक जुताई के बाद पाटा चलाएं ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए।
💧 उर्वरक प्रबंधन
अरहर की फसल को संतुलित पोषण देने के लिए निम्नलिखित उर्वरक दें:
| पोषक तत्व | मात्रा (किग्रा/हेक्टेयर) |
|---|---|
| नाइट्रोजन (N) | 15–20 |
| फास्फोरस (P₂O₅) | 50 |
| पोटाश (K₂O) | 20 |
| गंधक (S) | 20 |
जिन क्षेत्रों में जिंक की कमी हो, वहाँ 15–20 किग्रा जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर दें।
नाइट्रोजन और फास्फोरस की संयुक्त पूर्ति हेतु 100 किग्रा DAP + 100 किग्रा जिप्सम प्रति हेक्टेयर का उपयोग लाभदायक रहता है।
🌾 बीजशोधन और बीजोपचार
🔹 बीजशोधन
मिट्टी जनित रोगों से बचाव के लिए:
- थीरम 2 ग्राम + कार्बेन्डाजिम 1 ग्राम प्रति किग्रा बीज से उपचार करें।
- बुवाई से 2–3 दिन पहले यह प्रक्रिया करें।
🔹 बीजोपचार (राइजोबियम कल्चर)
- 10 किग्रा बीज के लिए 1 पैकेट राइजोबियम कल्चर पर्याप्त होता है।
- इसे गुड़ के घोल में मिलाकर बीज पर अच्छी तरह चिपकाएं।
- बीजों को छाया में सुखाकर अगले दिन बोएं।
🌿 बुवाई की दूरी व बीज दर
| फसल प्रकार | पंक्ति से पंक्ति दूरी | पौधे से पौधे दूरी | बीज दर (किग्रा/हे.) |
|---|---|---|---|
| शीघ्र पकने वाली | 45–60 से.मी. | 10–15 से.मी. | 12–15 |
| मध्यम/देर वाली | 60–75 से.मी. | 15–20 से.मी. | 12–15 |
💦 सिंचाई और जल निकास
अरहर फसल सामान्यतः असिंचित बोई जाती है, परंतु:
- फूल आने और दाना बनने की अवस्था में सिंचाई करने से उपज बढ़ती है।
- खेत में जल निकास का अच्छा प्रबंध करें।
- यदि क्षेत्र नीचा हो तो मेड़ों पर बुवाई करें।
🌿 खरपतवार नियंत्रण
अरहर की फसल के पहले 60 दिन खरपतवार नियंत्रण के लिए सबसे जरूरी होते हैं।
प्राकृतिक उपाय:
- पहली निराई 25–30 दिन बाद
- दूसरी निराई 45–60 दिन बाद
रासायनिक उपाय (यदि खरपतवार ज्यादा हों):
- अंतिम जुताई के समय लासो (3 किग्रा) या वैसालिन (1 किग्रा) को 800–1000 लीटर पानी में मिलाकर छिड़कें।
🐛 फसल सुरक्षा – कीट और रोग नियंत्रण
🌸 प्रमुख कीट
- फली मक्खी – फलियों में छेद बनाकर दानों को खाती है।
- फली छेदक इल्ली – फूल, कलियाँ और फलियाँ नष्ट करती है।
- फली का मटकुण – दानों का रस चूसता है।
- प्लू मथ – फलियों पर लाल फफूंदी लग जाती है।
- ब्रिस्टल बीटल – फूल और कोमल फलियों को खाती है।
🧪 नियंत्रण के उपाय
कृषि विधियाँ:
- गर्मी में खेत की गहरी जुताई करें।
- फसल चक्र अपनाएं।
- एक ही समय पर बुवाई करें।
- अरहर के साथ ज्वार, मक्का या मूंगफली जैसी फसलें लें।
यांत्रिक नियंत्रण:
- फेरोमोन ट्रैप्स लगाएं।
- पौधों को हिलाकर इल्लियों को गिराकर नष्ट करें।
- खेत में पक्षियों के बैठने की व्यवस्था करें।
जैविक नियंत्रण:
- एन.पी.वी. (5000 एल.ई./हे.) और गुड़ मिश्रण का शाम को छिड़काव करें।
- नीम तेल (10–15 मि.ली./लीटर) या करंज तेल का छिड़काव करें।
रासायनिक नियंत्रण:
- डायमिथोएट 30 ईसी (0.03%) या मोनोक्रोटोफॉस 36 एस.एल. (0.04%) का छिड़काव करें।
- फली बनने पर तीन बार छिड़काव करें —
- पहले फूल आने पर
- 50% फूल बनने पर
- फलियाँ बनने पर
🌾 कटाई और मड़ाई
जब 80% फलियाँ पक जाएं, तो हंसिया या गड़ासे से 10 से.मी. ऊंचाई पर फसल काटें।
सूखने के बाद दानों को थ्रेशर या लकड़ी से पिटाई करके अलग करें।
उपज:
- 15–20 क्विंटल दाना प्रति हेक्टेयर
- 50–60 क्विंटल लकड़ी
🏠 भंडारण
- दानों में 10–11% नमी होनी चाहिए।
- भंडारण में कीटों से बचाने के लिए एल्यूमीनियम फॉस्फाइड की 2 गोलियाँ प्रति टन रखें।
💰 सरकारी सहायता योजनाएँ (सारांश)
किसानों को अरहर उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार की कई योजनाएँ उपलब्ध हैं:
- बीज मिनीकिट योजना – चयनित किसानों को 4 किग्रा बीज, राइजोबियम कल्चर व जानकारी पुस्तिका मुफ्त दी जाती है।
- बीज ग्राम योजना – किसानों को प्रशिक्षण और ₹375/क्विंटल की सहायता दी जाती है।
- फली बेधक नियंत्रण योजना – एन.पी.वी. के प्रयोग पर ₹250/हेक्टेयर सहायता।
- कीटनाशक व खरपतवारनाशी पर 50% तक सब्सिडी।
- पौध सुरक्षा यंत्र खरीदने पर 50% सहायता (₹2000 तक)।
- सिंचाई हेतु स्प्रिंकलर सेट पर 33–50% सब्सिडी।
- राइजोबियम कल्चर व सूक्ष्म पोषक तत्वों पर 50% सहायता।
- प्रशिक्षण कार्यक्रम – 50 किसानों के समूह पर ₹15000 तक सहायता।
🌱 अतिरिक्त जानकारी और सरकारी संसाधन
अगर आप मिट्टी परीक्षण, खाद की सिफारिश, या फसल पोषण प्रबंधन के बारे में और जानकारी चाहते हैं,
तो भारत सरकार के कृषि मंत्रालय द्वारा संचालित आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं:
🔗 Soil Health Portal – Government of India
इस पोर्टल पर आपको मिलेंगे:
- अपनी ज़मीन की मिट्टी का स्वास्थ्य कार्ड देखने की सुविधा
- फसलवार उर्वरक सिफारिशें
- राज्यवार कृषि वैज्ञानिक सलाह
- और जैविक खेती से जुड़ी उपयोगी जानकारियाँ
🙋♂️ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. अरहर की खेती के लिए सबसे उपयुक्त मिट्टी कौन-सी है?
दोमट मिट्टी जिसमें पानी का निकास अच्छा हो, सबसे उपयुक्त होती है।
2. अरहर की बुवाई का सही समय क्या है?
जून के पहले से दूसरे पखवाड़े तक बुवाई करें।
3. अरहर की औसत उपज कितनी होती है?
उन्नत विधियों से 15–20 क्विंटल दाना प्रति हेक्टेयर तक उपज मिलती है।
4. अरहर में कौन से कीट सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं?
फली मक्खी, फली छेदक इल्ली और फली का मटकुण सबसे हानिकारक कीट हैं।
5. अरहर की फसल में सिंचाई कब करनी चाहिए?
फूल आने और दाना बनने की अवस्था में सिंचाई आवश्यक है।
6. अरहर की बुवाई में बीज दर कितनी रखनी चाहिए?
12–15 किग्रा बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होता है।
7. अरहर की फसल में कौन-कौन से उर्वरक जरूरी हैं?
नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और गंधक मुख्य उर्वरक हैं।
8. अरहर की फसल कितने दिनों में तैयार होती है?
किस्म के अनुसार 150 से 180 दिनों में फसल तैयार होती है।
9. अरहर की बीजोपचार प्रक्रिया क्या है?
राइजोबियम कल्चर और फफूंदनाशी से बीजों का उपचार करें।
10. क्या अरहर की खेती वर्षा आधारित क्षेत्र में संभव है?
हाँ, इसकी गहरी जड़ें और पत्तियाँ मोड़ने की क्षमता इसे शुष्क क्षेत्रों के लिए उपयुक्त बनाती हैं।
🌾 निष्कर्ष
अरहर की खेती लाभदायक और टिकाऊ फसल प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सही बीज चयन, उर्वरक प्रबंधन, कीट नियंत्रण और सरकारी योजनाओं के उपयोग से किसान अपनी आय में बड़ा सुधार कर सकते हैं।
🌱 प्रिय किसानों, अरहर की खेती केवल दाल उत्पादन ही नहीं बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में एक कदम है।
आज से ही आधुनिक तकनीकों को अपनाएं और अरहर की खेती से समृद्धि की ओर बढ़ें! 🌾
