सूरजमुखी की खेती | Surajmukhi Ki Kheti

सूरजमुखी की खेती

सूरजमुखी की खेती – जायद में ज्यादा उपज व मुनाफा

सूरजमुखी (Sunflower) एक ऐसी तिलहनी फसल है जो किसानों को कम समय में अधिक लाभ दे सकती है। इसका तेल पौष्टिक, हल्का और बाजार में हमेशा मांग में रहता है। सूरजमुखी की खेती खरीफ, रबी और जायद – तीनों मौसमों में की जा सकती है, लेकिन जायद मौसम में इसकी पैदावार सबसे अधिक होती है।
खरीफ में रोग और कीटों का प्रकोप अधिक होता है, जिससे फूल छोटे और दाना कम बनता है। जबकि जायद में मौसम शुष्क और अनुकूल होने से पौधे स्वस्थ रहते हैं और अच्छी उपज मिलती है।

🌤️ सूरजमुखी की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और भूमि

सूरजमुखी एक ऐसी फसल है जो सामान्य सिंचित भूमि में अच्छे परिणाम देती है।

  • यह खरीफ, रबी और जायद – तीनों मौसमों में बोई जा सकती है।
  • फसल पकने के समय शुष्क और गर्म जलवायु आवश्यक होती है।
  • दोमट मिट्टी सूरजमुखी की खेती के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है।
  • बहुत अधिक अम्लीय या क्षारीय मिट्टी से बचना चाहिए।

यदि खेत में पानी का उचित निकास हो और मिट्टी भुरभुरी हो, तो सूरजमुखी के पौधे तेजी से विकसित होते हैं।

🌻सूरजमुखी की उन्नत प्रजातियाँ

सामान्य या संकुल प्रजातियाँ

  • मार्डन
  • सूर्य

संकर (Hybrid) प्रजातियाँ

  • KBSH-1
  • SH-3322
  • FSH-17

इन प्रजातियों में FSH-17 और KBSH-1 विशेष रूप से जायद के लिए उत्तम हैं क्योंकि ये गर्मी सहन करने में सक्षम हैं और तेल की मात्रा अधिक देते हैं।

🚜 खेत की तैयारी कैसे करें?

सूरजमुखी की फसल के लिए खेत की तैयारी बहुत जरूरी है।

  • यदि खेत में नमी कम है तो पहले पलेवा करें (हल्की सिंचाई)।
  • इसके बाद एक जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें।
  • फिर 2–3 जुताई देशी हल या कल्टीवेटर से करें।
  • मिट्टी को भुरभुरी बना लें ताकि नमी सुरक्षित रह सके।

अंतिम जुताई के समय गोबर की खाद डालना भी लाभदायक होता है।

🌱 बुवाई का सही समय और तरीका

  • जायद मौसम में फरवरी का दूसरा पखवाड़ा बुवाई के लिए सबसे अच्छा समय है।
  • इस समय बोई गई फसल मई के अंत या जून के पहले सप्ताह तक पक जाती है।
  • देरी से बुवाई करने पर बरसात शुरू हो जाती है और दाने खराब हो जाते हैं।
  • बुवाई 4–5 सेंटीमीटर गहराई पर करें।
  • लाइन से लाइन दूरी – 45 सेंटीमीटर,
    पौधे से पौधे की दूरी – 15–20 सेंटीमीटर रखें।

🌾 बीज की मात्रा और शोधन

  • सामान्य प्रजातियों में: 12–15 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर।
  • संकर प्रजातियों में: 5–6 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर।
  • यदि बीज की गुणवत्ता 70% से कम हो तो मात्रा थोड़ी बढ़ा लें।

बीज शोधन विधि:

  • बुवाई से पहले बीज को 2–2.5 ग्राम थीरम प्रति किलो बीज से शोधित करें।
  • रात भर बीज को पानी में भिगोकर रखें और सुबह 3–4 घंटे छाया में सुखाएं।
  • फिर शाम को बुवाई करें।

🌿 उर्वरकों का प्रयोग और मात्रा

मृदा परीक्षण के आधार पर खाद डालना सबसे उचित रहता है, फिर भी सामान्य रूप से:

  • नत्रजन (N) – 80 किलो प्रति हेक्टेयर
  • फास्फोरस (P) – 60 किलो प्रति हेक्टेयर
  • पोटाश (K) – 40 किलो प्रति हेक्टेयर

खाद देने की विधि:

  • नत्रजन की आधी मात्रा और फास्फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई के समय डालें।
  • शेष नत्रजन 25–30 दिन बाद टॉपड्रेसिंग करें।
  • यदि फसल आलू के बाद ली जा रही है तो 20–25% उर्वरक कम करें।
  • साथ ही, 250–300 क्विंटल सड़ी गोबर खाद डालना लाभदायक रहता है।

💧 सूरजमुखी की सिंचाई का समय

  • पहली सिंचाई – बुवाई के 20–25 दिन बाद करें।
  • इसके बाद हर 10–15 दिन पर हल्की सिंचाई करें।
  • कुल मिलाकर 5–6 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है।
  • फूल निकलते और दाने भरते समय सिंचाई बहुत जरूरी होती है।
  • ध्यान रखें – गहरी सिंचाई से पौधे गिर सकते हैं।

🌾 निराई, गुड़ाई और खरपतवार नियंत्रण

  • पहली निराई पहली सिंचाई के बाद (20–25 दिन पर) करें।
  • इससे पौधों को हवा मिलती है और खरपतवार नियंत्रित रहते हैं।
  • रासायनिक नियंत्रण के लिए
    पेंडामेथालिन 30 ईसी (3.3 लीटर प्रति हेक्टेयर)
    को 600–800 लीटर पानी में मिलाकर बुवाई के 2–3 दिन बाद छिड़कें।

🪴 मिट्टी चढ़ाना (Earthing Up)

सूरजमुखी का फूल बड़ा होता है जिससे पौधा गिरने का खतरा रहता है।
इसलिए नत्रजन की टॉपड्रेसिंग के बाद 10–15 सेंटीमीटर ऊँची मिट्टी पौधों के चारों ओर चढ़ाएं।
इससे पौधे मजबूत बनते हैं और गिरते नहीं हैं।

🐝 परिषेचन (Pollination) की क्रिया

सूरजमुखी में परागण बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि बीज बनने के लिए यह आवश्यक है।

  • प्राकृतिक परागण भंवरे, मधुमक्खियाँ और हवा से होता है।
  • यदि खेत में परागण कम हो तो किसान स्वयं भी कर सकते हैं।
  • सुबह 7–8 बजे के बीच हाथ में दस्ताने या रोयेदार कपड़ा लेकर फूलों पर धीरे-धीरे फेरें।
  • इससे परागण अच्छी तरह होगा और पैदावार बढ़ेगी

🛡️फसल सुरक्षा – कीट एवं रोग नियंत्रण

सूरजमुखी में प्रमुख कीट हैं:

  • दीमक
  • हरे फुदके
  • डसकी बग

नियंत्रण के उपाय:

  • मिथाइल ओडिमेंटान (1 लीटर 25 ईसी) या
    फेन्बलारेट (750 मि.ली./हेक्टेयर)
    को 800–1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़कें।
  • साथ ही, फसल की निगरानी नियमित करें और रोगग्रस्त पौधों को हटा दें।

🌻 कटाई और मड़ाई का सही समय

  • जब सूरजमुखी के बीज कठोर और भूरे रंग के हो जाएं तो फसल कटाई के लिए तैयार है।
  • फूलों को काटकर छाया में सुखाएं, ढेर में न रखें।
  • सूखने के बाद डंडे से पिटाई या थ्रेशर मशीन से बीज निकालें।

🏡 भंडारण की विधि

  • बीज को अच्छी तरह सुखाकर 8–10% नमी तक रखें।
  • अधिक नमी से बीज खराब हो सकते हैं।
  • तेल निकालने का कार्य 3 महीने के भीतर कर लेना चाहिए ताकि तेल में कड़वाहट न आए।
  • बीज को सुखी, हवादार और सुरक्षित स्थान पर रखें।

🌾 सूरजमुखी की औसत पैदावार

  • सामान्य प्रजातियाँ: 12–15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
  • संकर प्रजातियाँ: 20–25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर

जायद मौसम में सिंचाई, उर्वरक और परागण का सही प्रबंधन करने पर पैदावार और भी अधिक प्राप्त की जा सकती है।

सूरजमुखी की खेती से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQs)

1. सूरजमुखी की खेती कब करें?

सूरजमुखी की खेती खरीफ, रबी और जायद – तीनों मौसमों में हो सकती है, लेकिन फरवरी के दूसरे पखवाड़े में बुवाई सबसे उचित रहती है।

2. सूरजमुखी की कौन-सी किस्में सबसे अच्छी हैं?

KBSH-1, FSH-17 और SH-3322 संकर किस्में जायद मौसम के लिए सबसे बेहतर हैं।

3. सूरजमुखी की फसल कितने दिन में तैयार होती है?

औसतन 90 से 110 दिन में फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है।

4. सूरजमुखी की खेती में कितना खर्च आता है?

प्रति हेक्टेयर लगभग ₹20,000 से ₹25,000 तक खर्च आता है, जबकि पैदावार से ₹60,000 से ₹80,000 तक की आय संभव है।

5. सूरजमुखी के तेल की मांग कैसी है?

सूरजमुखी तेल हमेशा मांग में रहता है क्योंकि यह स्वास्थ्यवर्धक और हल्का तेल माना जाता है।

6. क्या सूरजमुखी की खेती बारिश में हो सकती है?

बरसात में रोग और कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है, इसलिए जायद में खेती सबसे उपयुक्त होती है।

7. सूरजमुखी में कौन-कौन से रोग लगते हैं?

फफूंदी, दीमक, हरे फुदके और डसकी बग जैसे कीट नुकसान पहुंचा सकते हैं।

8. क्या सूरजमुखी की खेती सिंचित भूमि में ही करनी चाहिए?

हाँ, सूरजमुखी को नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है, इसलिए सिंचित भूमि सबसे बेहतर रहती है।

9. क्या सूरजमुखी के बाद दूसरी फसल ली जा सकती है?

हाँ, सूरजमुखी की फसल के बाद गेहूं, चना या सब्जियाँ ली जा सकती हैं।

10. सूरजमुखी के बीज से तेल कैसे निकाला जाता है?

बीज सुखाकर तेल निकालने वाली मशीन (oil expeller) में प्रोसेस किया जाता है।

🌞 निष्कर्ष: सूरजमुखी की खेती – किसानों के लिए सुनहरा अवसर

प्रिय किसान भाइयों,
सूरजमुखी की खेती आज के समय में एक कम लागत, अधिक लाभ वाली फसल बन चुकी है। यदि आप जायद के मौसम में इसका सही प्रबंधन करते हैं – समय पर बुवाई, उर्वरक, सिंचाई और कीट नियंत्रण का ध्यान रखते हैं – तो यह फसल आपको बेहतर पैदावार और अच्छा मुनाफा दे सकती है।
यह फसल न केवल तेल उत्पादन में सहायक है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बनाए रखती है।

👉 आज ही अपने खेत में सूरजमुखी की खेती शुरू करें और सुनहरी सफलता की ओर बढ़ें!