पालक की खेती | Palak Ki Kheti

पालक की खेती: कम लागत में ज्यादा मुनाफा पूरी जानकारी 2026
पालक की खेती भारत के छोटे और मध्यम किसानों के लिए कम लागत में जल्दी आमदनी देने वाली सब्जी फसल है। पालक एक ऐसी हरी पत्तेदार सब्जी है जिसकी मांग पूरे साल बनी रहती है। होटल, ढाबा, घर और सब्जी मंडी हर जगह पालक की खपत होती है। सही तकनीक, सही समय और थोड़ी समझदारी से पालक की खेती करके किसान भाई प्रति एकड़ अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
पालक का मूल स्थान केंद्रीय और पश्चिमी एशिया माना जाता है और यह अमरांथेसी कुल की फसल है। यह एक सदाबहार सब्जी है और पूरी दुनिया में इसकी खेती की जाती है। हिंदी में इसे पालक कहा जाता है। पालक आयरन, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा स्रोत है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। पाचन, त्वचा, बाल, आंखों और दिमाग के स्वास्थ्य के लिए यह बहुत फायदेमंद है। पालक से कैंसर रोधी और एंटी एजिंग दवाइयां भी बनाई जाती हैं।
भारत में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और गुजरात जैसे राज्य पालक उत्पादन में प्रमुख हैं।
नीचे दिए गए सभी बिंदु प्रति एकड़ के हिसाब से बताए गए हैं ताकि किसान भाई आसानी से समझ सकें और लागू कर सकें।
1. जलवायु और मौसम की आवश्यकता
1.1 तापमान
पालक की खेती के लिए मध्यम जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
• उपयुक्त तापमान 15 से 30 डिग्री सेल्सियस
• बीज बोने के समय तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस
• कटाई के समय आदर्श तापमान 15 से 20 डिग्री सेल्सियस
1.2 वर्षा
• 80 से 120 सेंटीमीटर वर्षा पर्याप्त होती है
• अधिक वर्षा या जलभराव से फसल को नुकसान हो सकता है
2. मिट्टी की तैयारी और भूमि का चुनाव
पालक को कई प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है लेकिन सबसे अच्छे परिणाम अच्छे जल निकास वाली रेतीली दोमट और जलोढ़ मिट्टी में मिलते हैं।
2.1 मिट्टी की विशेषताएं
• मिट्टी का पीएच मान 6 से 7 होना चाहिए
• जल जमाव वाली और बहुत अधिक अम्लीय मिट्टी से बचें
2.2 खेत की तैयारी
- खेत को भुरभुरा बनाने के लिए 3 से 5 बार जुताई करें
- हर जुताई के बाद पाटा या सुहागा चलाएं
- क्यारियां या बेड तैयार करें
- अंतिम जुताई के बाद हल्की सिंचाई करें
3. पालक की प्रसिद्ध किस्में | Varieties
3.1 पंजाब ग्रीन
• पत्ते अर्ध सीधे और गहरे चमकीले हरे रंग के
• बुवाई के 30 दिन बाद पहली कटाई
• औसतन पैदावार 125 क्विंटल प्रति एकड़
• ऑक्सेलिक एसिड की मात्रा कम
3.2 पंजाब सिलेक्शन
• पत्ते हल्के हरे, पतले और लंबे
• स्वाद में हल्के खट्टे
• तना बैंगनी रंग का
• औसतन पैदावार 115 क्विंटल प्रति एकड़
3.3 अन्य उन्नत किस्में
• पूसा ज्योति
• पूसा पालक
• पूसा हरित
• पूसा भारती
4. बुवाई की विधि
4.1 बुवाई का सही समय
पालक की बुवाई लगभग पूरे साल की जा सकती है लेकिन अगस्त से दिसंबर का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है।
4.2 बीज की मात्रा
• प्रति एकड़ 4 से 6 किलो बीज की आवश्यकता
4.3 बीज उपचार
• बेहतर अंकुरण के लिए बीज को 12 से 24 घंटे पानी में भिगोकर रखें
4.4 बुवाई का तरीका
• पंक्ति विधि
• छिटकाव विधि
4.5 दूरी और गहराई
• पंक्ति से पंक्ति दूरी 20 सेंटीमीटर
• पौधे से पौधे की दूरी 5 सेंटीमीटर
• बीज की गहराई 3 से 4 सेंटीमीटर
5. प्रति एकड़ खाद और उर्वरक प्रबंधन
5.1 जैविक खाद
• अच्छी तरह सड़ा हुआ गोबर खाद 200 क्विंटल प्रति एकड़
5.2 रासायनिक उर्वरक मात्रा
• नाइट्रोजन 32 किलो
• फास्फोरस 16 किलो
• यूरिया 70 किलो
• सिंगल सुपर फास्फेट 100 किलो
5.3 उर्वरक डालने की विधि
- गोबर खाद और पूरी फास्फोरस बुवाई से पहले
- नाइट्रोजन की आधी मात्रा बुवाई से पहले
- शेष नाइट्रोजन हर कटाई के समय दो भागों में
- खाद डालने के बाद हल्की सिंचाई जरूरी
6. सिंचाई प्रबंधन
• अंकुरण के समय मिट्टी में पर्याप्त नमी होनी चाहिए
• गर्मियों में 4 से 6 दिन के अंतराल पर सिंचाई
• सर्दियों में 10 से 12 दिन के अंतराल पर सिंचाई
• अधिक पानी देने से बचें
• पत्तों पर पानी जमा न होने दें
• ड्रिप सिंचाई सबसे लाभदायक मानी जाती है
7. खरपतवार नियंत्रण
• 2 से 3 बार निराई गुड़ाई करें
• निराई से मिट्टी में हवा का संचार होता है
• रासायनिक नियंत्रण के लिए पायराजोन 1 से 1.12 किलो प्रति एकड़
• कटाई के बाद रसायन का प्रयोग न करें
8. कीट और रोग प्रबंधन
8.1 चेपा कीट नियंत्रण
• मैलाथियॉन 50 ईसी 350 मिली
• 80 से 100 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव
• छिड़काव के 7 दिन बाद ही कटाई करें
8.2 रोग नियंत्रण
पत्तों पर गोल धब्बे रोग
• कार्बेन्डाजिम 400 ग्राम
• या इंडोफिल एम 45, 400 ग्राम
• 150 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव
• जरूरत हो तो 15 दिन बाद दोहराएं
9. फसल की कटाई
• पहली कटाई बुवाई के 25 से 30 दिन बाद
• हर 20 से 25 दिन में कटाई
• तेज चाकू या दरांती का प्रयोग
• सावधानी से कटाई करने पर फसल लंबे समय तक देती है
10. बीज उत्पादन विधि
• दूरी 50 सेंटीमीटर × 30 सेंटीमीटर
• अन्य पालक खेत से 1000 मीटर की दूरी
• हर 5 पंक्तियों के बाद एक पंक्ति खाली
• रोगग्रस्त और अलग प्रकार के पौधे निकाल दें
• बीज भूरे रंग के होने पर कटाई
• एक सप्ताह खेत में सुखाएं
• सुखाने के बाद बीज निकालें
11. प्रति एकड़ पैदावार, लागत और मुनाफा
11.1 औसत पैदावार
• 110 से 130 क्विंटल प्रति एकड़
11.2 अनुमानित लागत
• बीज 800 से 1200 रुपये
• खाद और उर्वरक 3000 से 4000 रुपये
• सिंचाई और मजदूरी 3000 से 4000 रुपये
• कुल लागत 8000 से 10000 रुपये
11.3 संभावित मुनाफा
• औसत बिक्री मूल्य 10 से 15 रुपये प्रति किलो
• कुल आय 110000 से 180000 रुपये
• शुद्ध लाभ 90000 से 160000 रुपये प्रति एकड़
12. सरकारी योजनाएं
• राष्ट्रीय बागवानी मिशन
• प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना
• मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना
• स्थानीय कृषि विभाग और केवीके से जानकारी लें
13. किसानों के लिए खास सुझाव
• समय पर बुवाई करें
• संतुलित खाद का प्रयोग करें
• नियमित कटाई करें
• स्थानीय बाजार की मांग को समझें
• रोग दिखते ही नियंत्रण करें
• जैविक खेती अपनाने की कोशिश करें
14. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल | FAQs
प्रश्न 1. पालक की खेती कितने दिन में तैयार होती है
उत्तर: पालक की पहली कटाई 25 से 30 दिन में हो जाती है।
प्रश्न 2. पालक साल में कितनी बार काटी जा सकती है
उत्तर: सही देखभाल से 6 से 8 कटाई संभव है।
प्रश्न 3. पालक के लिए सबसे अच्छी मिट्टी कौन सी है
उत्तर: रेतीली दोमट और जलोढ़ मिट्टी सर्वोत्तम होती है।
प्रश्न 4. पालक में सबसे खतरनाक कीट कौन सा है
उत्तर: चेपा कीट पालक को अधिक नुकसान पहुंचाता है।
प्रश्न 5. क्या पालक की खेती ड्रिप से की जा सकती है
उत्तर: हां, ड्रिप सिंचाई से पानी की बचत और बेहतर उत्पादन होता है।
प्रश्न 6. पालक की खेती में लागत कम कैसे करें
उत्तर: जैविक खाद और स्थानीय संसाधनों का उपयोग करें।
प्रश्न 7. पालक का बीज खुद तैयार किया जा सकता है
उत्तर: हां, सही विधि से बीज उत्पादन संभव है।
प्रश्न 8. पालक की खेती किस महीने में सबसे अच्छी होती है
उत्तर: अगस्त से दिसंबर का समय सबसे अच्छा है।
प्रश्न 9. पालक की मांग कहां ज्यादा रहती है
उत्तर: शहरों, होटल, रेस्टोरेंट और सब्जी मंडियों में।
प्रश्न 10. क्या पालक की खेती छोटे किसान के लिए फायदेमंद है
उत्तर: हां, कम लागत और जल्दी आय के कारण यह बहुत लाभकारी है।
15. निष्कर्ष
पालक की खेती भारतीय किसानों के लिए एक सुरक्षित, कम जोखिम और अधिक मुनाफा देने वाला विकल्प है। सही जानकारी, समय पर खेती और बाजार की समझ से पालक की खेती आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती है। अगर किसान भाई आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ लें तो कम जमीन में भी अच्छी कमाई संभव है।
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मेहनत करें, सही दिशा में कदम बढ़ाएं और आत्मनिर्भर किसान बनें।
जय किसान
संदर्भ स्रोत
