धनिया की खेती | Dhaniya Ki Kheti

🌿 भूमिका: भारत – मसालों की भूमि
प्राचीन काल से ही भारत को “मसालों की भूमि” कहा जाता है। धनिया (Coriander) हमारी रसोई का अनिवार्य मसाला है। इसके बीज और हरी पत्तियाँ भोजन को सुगंधित व स्वादिष्ट बनाती हैं। धनिया बीजों में मौजूद वाष्पशील तेल कन्फेक्शनरी, दवा उद्योग और पेय पदार्थों में उपयोग होते हैं। हरा धनिया विटामिन-C का अच्छा स्रोत है और चटनी, सूप, सॉस आदि में खूब इस्तेमाल होता है। औषधीय गुणों के कारण धनिया कार्मिनेटिव और डाययूरेटिक के रूप में भी जाना जाता है।
भारत में तमिलनाडु, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और राजस्थान धनिया के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। मध्य प्रदेश के गुना, मंदसौर, शाजापुर, राजगढ़, विदिशा, छिंदवाड़ा जैसे जिले विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं।
भारत धनिया का प्रमुख उत्पादक और निर्यातक देश है। इससे किसानों को अच्छा आर्थिक लाभ और देश को विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है।
🌾 मध्यप्रदेश में धनिया की खेती का महत्व
मध्यप्रदेश भारत का प्रमुख धनिया उत्पादक राज्य है।
यहाँ धनिया की खेती लगभग 2.88 लाख एकड़ क्षेत्र में होती है और औसतन 74,700 टन उत्पादन प्राप्त होता है।
प्रमुख धनिया उत्पादक जिले:
- गुना
- मंदसौर
- शाजापुर
- राजगढ़
- विदिशा
- छिंदवाड़ा
औसत उपज लगभग 170–180 किग्रा प्रति एकड़ होती है, जिसे उन्नत तकनीक से बढ़ाया जा सकता है।
🌿 धनिया का उपयोग एवं आर्थिक महत्व
उपयोग
- मसाले के रूप में (बीज)
- हरी पत्तियों के रूप में
- आयुर्वेदिक औषधियों में
- पाचन सुधारक (Carminative)
- मूत्रवर्धक (Diuretic)
आर्थिक महत्व
- कम लागत में अच्छी आय
- घरेलू और निर्यात बाजार में मांग
- मसाला उद्योग की मुख्य फसल
- किसान, व्यापारी और निर्यातक सभी के लिए लाभकारी
🌦️ जलवायु की आवश्यकता
धनिया एक शीतोष्ण जलवायु की फसल है।
| अवस्था | उपयुक्त तापमान |
|---|---|
| अंकुरण | 25–26°C |
| वृद्धि | 20–25°C |
| फूल व दाना | ठंडा, पाला रहित मौसम |
⚠️ पाले से धनिया को बहुत नुकसान होता है, इसलिए फूल आने के समय पाला न पड़े इसका विशेष ध्यान रखें।
🌱 भूमि का चयन एवं तैयारी
उपयुक्त भूमि
- सिंचित: दोमट या मटियार दोमट भूमि
- असिंचित: काली भारी मिट्टी
- pH मान: 6.5 – 7.5
- अच्छी जल निकासी अनिवार्य
⚠️ धनिया लवणीय और क्षारीय मिट्टी सहन नहीं करता।
खेत की तैयारी
- 2–3 गहरी जुताई
- पलेवा देकर जुताई (यदि नमी कम हो)
- अंतिम जुताई के बाद पाटा लगाएं
- खरपतवार नष्ट करें
🌾 उन्नत किस्में (प्रति एकड़ उपज)
| किस्म | अवधि (दिन) | उपज (क्विंटल/एकड़) | विशेषता |
|---|---|---|---|
| हिसार सुगंध | 120–125 | 7–8 | अच्छी सुगंध |
| कुंभराज | 115–120 | 6 | रोग सहनशील |
| RCR-436 | 90–100 | 5–6 | जल्दी पकने वाली |
| पंत हरितमा | 120–125 | 6–8 | बीज + पत्ती |
| गुजरात धनिया-2 | 110–115 | 6–6.5 | हरी पत्तियाँ |
| RCR-446 | 110–130 | 5–6 | असिंचित हेतु |
🕒 बुवाई का सही समय
- बीज के लिए: 1–15 नवम्बर
- हरी पत्तियों के लिए: अक्टूबर–दिसंबर
- पाले से बचाव: नवम्बर का दूसरा सप्ताह सर्वोत्तम
🌱 बीज दर (प्रति एकड़)
| स्थिति | बीज मात्रा |
|---|---|
| सिंचित | 6–8 किग्रा |
| असिंचित | 10–12 किग्रा |
🧪 बीज उपचार
बीज जनित रोगों से बचाव हेतु:
- कार्बेन्डाजिम + थाइरम (2:1) → 3 ग्राम/किग्रा बीज
या - कार्बोक्सिन + थाइरम → 3 ग्राम/किग्रा
- ट्राइकोडर्मा विरिडी → 5 ग्राम/किग्रा
🌿 खाद एवं उर्वरक प्रबंधन (प्रति एकड़)
असिंचित फसल
- गोबर खाद: 8 टन
- नत्रजन: 16 किग्रा
- फास्फोरस: 12 किग्रा
- पोटाश: 8 किग्रा
- सल्फर: 8 किग्रा
सिंचित फसल
- नत्रजन: 24 किग्रा
- फास्फोरस: 16 किग्रा
- पोटाश: 8 किग्रा
- सल्फर: 8 किग्रा
💧 सिंचाई प्रबंधन
- पहली सिंचाई: बुवाई के 30–35 दिन बाद
- बाद की सिंचाई: 20–25 दिन के अंतर से
- फूल अवस्था में जल तनाव न होने दें
🌾 खरपतवार नियंत्रण
- 30–35 दिन में निराई-गुड़ाई
- आवश्यकता अनुसार 2 बार
🐛 रोग एवं कीट नियंत्रण (संक्षेप)
- उकठा रोग → बीज उपचार
- स्टेम गाल → रोगरोधी किस्म
- माहू → नीम तेल 3 मिली/लीटर
🌾 कटाई एवं उपज
- फसल पकने पर पौधे पीले पड़ने लगते हैं
- सुबह कटाई करें
- सुखाकर मड़ाई करें
- औसत उपज: 5–8 क्विंटल/एकड़
💰 मुनाफा (अनुमान)
| विवरण | राशि (₹/एकड़) |
|---|---|
| लागत | 10,000–12,000 |
| आय | 35,000–50,000 |
| शुद्ध लाभ | 25,000–38,000 |
❓ FAQs – धनिया की खेती से जुड़े सवाल
H2: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. धनिया की खेती कौन से मौसम में होती है?
रबी मौसम में।
Q2. धनिया की सबसे अच्छी किस्म कौन सी है?
कुंभराज, पंत हरितमा, हिसार सुगंध।
Q3. प्रति एकड़ कितनी उपज मिलती है?
5 से 8 क्विंटल।
Q4. धनिया पाले से कैसे बचाएं?
समय पर बुवाई और हल्की सिंचाई।
Q5. हरे धनिया की खेती कब करें?
अक्टूबर से दिसंबर।
Q6. बीज उपचार क्यों जरूरी है?
रोगों से बचाव के लिए।
Q7. धनिया में कितनी सिंचाई चाहिए?
3–4 सिंचाई पर्याप्त।
Q8. क्या धनिया निर्यात होता है?
हाँ, भारत प्रमुख निर्यातक है।
Q9. धनिया किस मिट्टी में अच्छा होता है?
दोमट मिट्टी में।
Q10. धनिया की खेती लाभकारी है?
हाँ, कम लागत में अच्छा मुनाफा।
🌾 निष्कर्ष: किसानों के लिए प्रेरणा
धनिया की खेती कम लागत, कम जोखिम और अधिक मुनाफे वाली फसल है। यदि किसान सही किस्म, समय पर बुवाई और वैज्ञानिक विधियों को अपनाएं, तो निश्चित रूप से अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं।
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👉 मसालों की खेती के बारे में और जानकारी के लिए देखें:
https://subsistencefarming.in/masalon-ki-kheti/
🔗 अधिक जानकारी के लिए देखें
👉 https://hi.vikaspedia.in
👉 HP Agriculture Department
👉 Indian Institute of Horticultural Research
👉 Krishi Vigyan Kendra Portal
