कॉफी की खेती | Coffee Ki Kheti

🌱 परिचय: भारत में कॉफी की खेती क्यों विशेष है?
भारत में कॉफी की खेती मुख्य रूप से पश्चिमी घाट—कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में की जाती है। इसके अतिरिक्त आंध्र प्रदेश, ओडिशा और उत्तर-पूर्वी राज्यों में भी कॉफी का विस्तार तेज़ी से बढ़ रहा है। भारत में पैदा होने वाली कॉफी का 65–70% निर्यात होता है, जिससे किसानों को विदेशी मुद्रा और बेहतर दाम मिलते हैं।
भारत की रॉबस्टा कॉफी अपनी ब्लेंडिंग क्वालिटी के लिए और अरेबिका कॉफी अपनी सुगंध और स्वाद के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
कॉफी क्षेत्र में 6 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है। यानी यह फसल न सिर्फ किसानों बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ है।
अब आइए प्रति एकड़ आधार पर खेती को विस्तार से समझते हैं।
🌿 भारत में उगाई जाने वाली कॉफी की किस्में – प्रति एकड़ खेती के अनुसार जानकारी
1. अरेबिका कॉफी (Arabica Coffee)
- अधिक सुगंधित और उच्च कीमत वाली किस्म
- ऊँचाई: 300–1800 मीटर
- तापमान: 15°C–25°C
- प्रति एकड़ पैदावार: 350–500 किलोग्राम
- बीमारियों के प्रति संवेदनशील—विशेषकर White Stem Borer और Leaf Rust
- बड़े व प्रबंधित खेतों में अधिक उपयुक्त
2. रॉबस्टा कॉफी (Robusta Coffee)
- अधिक मजबूत, ब्लेंडिंग में उपयोग, कम देखभाल
- तापमान: 20°C–30°C
- प्रति एकड़ पैदावार: 600–900 किलोग्राम
- बीमारियों के प्रति अरेबिका से कम संवेदनशील
- छोटे किसानों के लिए बेहतर विकल्प
🌱 प्रति एकड़ कॉफी की खेती के लिए आवश्यक जलवायु, मिट्टी और स्थितियाँ
आदर्श जलवायु
| कारक | आवश्यकता |
|---|---|
| तापमान (अरबिका) | 15–25°C |
| तापमान (रॉबस्टा) | 20–30°C |
| वर्षा | 150–250 से.मी. |
| ऊँचाई | 300–1800 मीटर |
| छाया (%) | 50–60% |
मिट्टी
- गहरी, उपजाऊ जंगल जैसी दोमट मिट्टी
- pH 5.0–6.5
- अच्छी जल-निकासी आवश्यक
🌱 प्रति एकड़ कॉफी नर्सरी प्रबंधन
- बीज अधिकृत स्रोत से ही लें।
- कॉफी बेरी बोरर प्रभावित क्षेत्रों से बीज न लें।
- बीज तुरंत बोएँ – इनकी जीवंतता कम समय रहती है।
- नर्सरी मिट्टी में जंगल मिट्टी, गोबर खाद और रेत का संतुलित मिश्रण करें।
- एक एकड़ रोपण हेतु लगभग 1200–1400 पौधों की आवश्यकता होती है।
🌧️ प्रति एकड़ मिट्टी एवं जल संरक्षण
चुनौतियाँ
- मानसून में ढलानों पर मिट्टी कटाव
- गर्मी के मौसम में नमी की कमी
समाधान
- कंटूर प्लांटिंग व टेरेसिंग
- घाटी के पास वेटीवर घास, पास्पालम आदि का उपयोग
- मई–जून में हरी खाद: कौपी, सेम, ढैंचा
- पौधों के पास सूखी पत्तियों से मल्चिंग
- खाई (trenches) बनाकर पानी रोकना
🌾 प्रति एकड़ खरपतवार नियंत्रण
प्रारंभिक अवस्था
- हाथ से निराई, स्कफलिंग, कवर क्रॉप (कौपी/सेम)
स्थापित खेतों में
- प्री-मॉनसून व पोस्ट-मॉनसून वेड़ीसाइड का प्रयोग
- ग्रामॉक्सोन, ग्लाइसेल या राउंड-अप का रोटेशन में उपयोग
🌳 शेड मैनेजमेंट – छाया का सही प्रबंधन
- कॉफी 50–60% छाया में बेहतर फलती है।
- दो-स्तरीय छाया:
- अस्थायी—डाडप
- स्थायी—अंजीर, अल्बिज़िया, कटहल
- हर वर्ष हल्की छँटाई से छाया नियंत्रित रखें।
🌿 प्रति एकड़ पौधा प्रबंधन (Bush Management)
- हर वर्ष हल्की छँटाई
- जून–जुलाई में हैंडलिंग, सेंट्रिंग
- फलों का बोझ सही रखने के लिए डि-सकरिंग
- रोगग्रस्त पौधों पर टॉप-वर्किंग
🌱 पोषण प्रबंधन (प्रति एकड़ उर्वरक कार्यक्रम)
pH संतुलन
- समय-समय पर लाइमिंग
- नवंबर में कृषि चूना @ 200–250 किग्रा/एकड़
- डोलोमाइट का उपयोग हर 2–3 साल में
जैविक खाद
- गोबर खाद/कंपोस्ट: 2–3 टन प्रति एकड़ प्रति 2 वर्ष में
रासायनिक उर्वरक
तीन भागों में दें:
- पोस्ट-ब्लॉसम
- प्री-मॉनसून
- पोस्ट-मॉनसून
🐛 कॉफी में प्रमुख कीट – लक्षण और नियंत्रण (प्रति एकड़ प्रबंधन)
1. व्हाइट स्टेम बोरर
- मुख्यतः अरेबिका में गंभीर
- पत्तियाँ पीली, तना उभरा हुआ
नियंत्रण
- मार्च व सितंबर में सर्वे
- प्रभावित पौधे उखाड़कर जलाएँ
- तने पर 10% लाइम पेंट
- फेरोमोन ट्रैप: 25 ट्रैप/एकड़
2. कॉफी बेरी बोरर
- फल के सिरे पर छोटे छेद
- दानों को अंदर से खाती है
नियंत्रण
- साफ-सुथरी तुड़ाई
- गिरी हुई बेरियाँ हटाएँ
- ब्रॉका ट्रैप: 60/एकड़
3. शॉट होल बोरर
- शाखाएँ सूखना, पत्तियाँ गिरना
नियंत्रण
- 5–7 सेमी नीचे तक टहनी काटें
- पतली छाया व अच्छा जल-निकास रखें
4. मिली बग
- पतों व फलों पर सफेद कीट
- चींटी की गतिविधि बढ़ जाती है
नियंत्रण
- पेड़ों के नीचे 1.5% क्विनालफॉस
- कीटग्रस्त टहनियों पर स्प्रे
- जैव-नियंत्रण—Cryptolaemus montrouzieri
5. ग्रीन स्केल
- पत्तियों पर काला कालिख जैसे धब्बे
- पौधे कमजोर
नियंत्रण
- चींटी नियंत्रण
- क्विनालफॉस/फेनीट्रोथियन स्प्रे
🍃 प्रमुख रोग और नियंत्रण (प्रति एकड़ उपचार योजना)
1. कॉफी लीफ रस्ट
- पत्तियों के नीचे पीले-नारंगी धब्बे
- अधिक संक्रमण में 70% नुकसान
नियंत्रण
- उचित छाया
- 0.5% बोर्डो मिश्रण (प्रि-मॉनसून व पोस्ट-मॉनसून)
2. ब्लैक रॉट
- बारिश में गीली परिस्थितियों में फैलता है
- पत्तियाँ काली होकर गिरती हैं
नियंत्रण
- पतली छाया
- जल-निकासी
- 1% बोर्डो मिश्रण
3. रूट रोग (Brown, Red, Black Root, Santavery)
सामान्य लक्षण
- पीलापन, पत्तियां गिरना
- पौधे का धीरे-धीरे सुखना
समाधान
- 60 सेमी गहरी खाई बनाकर अलग करना
- प्रभावित पौधों को जलाना
- बाविस्टिन 0.4% ड्रेंच
- ट्राइकोडर्मा का प्रयोग
🌾 कॉफी की कटाई और प्रसंस्करण (Post-Harvest)
कटाई
- केवल पकी हुई लाल बेरियाँ तोड़ें
- अधिक पकी या कच्ची अलग रखें
प्रसंस्करण
1. वेट प्रोसेसिंग
– प्लांटेशन/पार्चमेंट कॉफी
2. ड्राय प्रोसेसिंग
– चेरी कॉफी
सुखाना
- पहले जाली पर सुखाएँ
- फिर कंक्रीट यार्ड पर
- नमी 10–12% तक करें
भंडारण
- साफ बोरे
- लकड़ी के फर्श पर
- खाद/रसायनों के पास न रखें
🌱 भारत में ऑर्गेनिक कॉफी की खेती (Organic Coffee Farming)
क्यों लोकप्रिय?
- जैविक खाद उपलब्ध
- छोटा किसान प्राकृतिक खेती पहले से करता है
- कम लागत
- विदेशी कीमत बेहतर
चुनौतियाँ
- रॉबस्टा की माँग कम
- बाजार तक पहुँच
- गुणवत्ता बनाए रखना
संभावनाएँ
- भारत में जंगल जैसी मिट्टी
- दो-स्तरीय छाया
- प्राकृतिक लाभ – कम रसायनों की जरूरत
💰 प्रति एकड़ कॉफी की खेती की लागत (अनुमानित)
| खर्च | अनुमान (₹) |
|---|---|
| पौधे (1200–1400) | 12,000–18,000 |
| गड्ढे व रोपण | 10,000 |
| छाया प्रबंधन | 6,000 |
| खाद/उर्वरक | 8,000–12,000 |
| मजदूरी | 18,000–22,000 |
| कीटनाशक/रोगनाशक | 5,000–8,000 |
| सिंचाई/अन्य | 4,000–6,000 |
कुल लागत प्रति एकड़:
👉 ₹60,000 – ₹75,000
🌾 प्रति एकड़ पैदावार (Yield)
| किस्म | पैदावार |
|---|---|
| अरेबिका | 350–500 किग्रा |
| रॉबस्टा | 600–900 किग्रा |
| ऑर्गेनिक | 250–400 किग्रा |
💵 प्रति एकड़ संभावित आय
बाजार भाव (औसत)
- अरेबिका: ₹220–300/किग्रा
- रॉबस्टा: ₹150–200/किग्रा
संभावित आय
- अरेबिका: ₹80,000–1,20,000
- रॉबस्टा: ₹90,000–1,50,000
👉 सही प्रबंधन से 30–40% अधिक आय संभव।
❓ कॉफी की खेती पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. भारत में कॉफी की खेती कहाँ होती है?
कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और अब आंध्र प्रदेश, ओडिशा व उत्तर-पूर्वी राज्यों में।
2. कौन-सी कॉफी किस्म अधिक लाभ देती है?
रॉबस्टा कम लागत और अधिक पैदावार देती है।
3. प्रति एकड़ कॉफी की पैदावार कितनी होती है?
350–900 किग्रा, किस्म और प्रबंधन पर निर्भर।
4. क्या कॉफी की खेती छोटे किसान कर सकते हैं?
हाँ, रॉबस्टा किस्म छोटे किसानों के लिए उपयुक्त है।
5. कॉफी को कितनी छाया चाहिए?
लगभग 50–60% छाया।
6. क्या भारत में ऑर्गेनिक कॉफी फायदे की है?
हाँ, अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रीमियम मिलता है।
7. कॉफी लीफ रस्ट का इलाज क्या है?
0.5% बोर्डो मिश्रण दो बार स्प्रे।
8. प्रति एकड़ पौधों की संख्या कितनी?
1200–1400 पौधे।
9. कॉफी की खेती में कितना खर्च आता है?
60,000–75,000 रुपये प्रति एकड़।
10. सबसे बड़ा जोखिम क्या है?
कीट – खासतौर पर White Stem Borer और बेरी बोरर।
🌟 भारतीय किसान कॉफी की खेती से बड़ा लाभ कमा सकते हैं
कॉफी की खेती मेहनत, अनुशासन और सही प्रबंधन में अद्भुत लाभ देती है। भारत में प्राकृतिक परिस्थितियाँ पहले से ही अनुकूल हैं। सरकारी संस्थाएँ जैसे Coffee Board, कृषि विश्वविद्यालय, और KVK लगातार किसानों को प्रशिक्षण और सहायता प्रदान करते हैं।
यदि आप वैज्ञानिक तरीके अपनाते हैं—
✔ सही छाया
✔ उचित खाद
✔ समय पर रोग प्रबंधन
✔ साफ-सुथरी कटाई
✔ बाजार की समझ
तो एक एकड़ कॉफी आपको लंबे समय तक स्थिर और उच्च आय दे सकती है।
किसान भाइयों – नई फसलों से डरें नहीं, सही जानकारी और तकनीक अपनाएँ।
कॉफी की खेती आपका भविष्य बदल सकती है!
अधिक जानकारी के लिए स्रोत
👉 Indian Institute of Horticultural Research
👉 Krishi Vigyan Kendra Portal
👉 अगर आप नगदी फसलों की खेती से जुड़ी और जानकारी चाहते हैं, तो इस वेबसाइट पर जरूर जाएं
