अजवाइन की खेती | Ajwain Ki Kheti

अजवाइन की खेती

🌱 अजवाइन की खेती कैसे करें: कम लागत में ज्यादा मुनाफा

अजवाइन भारत की एक अत्यंत उपयोगी मसाला एवं औषधीय फसल है। इसकी मांग घरेलू रसोई से लेकर आयुर्वेदिक उद्योग तक हमेशा बनी रहती है। कम लागत, कम जोखिम और अच्छे बाजार भाव के कारण अजवाइन की खेती किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बनती जा रही है।

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अजवाइन की खेती कैसे होती है,
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अजवाइन की खेती किस महीने में होती है,
अजवाइन की खेती की पूरी जानकारी,
तो यह लेख आपके लिए एक संपूर्ण मार्गदर्शक है।

🌿 1. फसल का परिचय | Crop Introduction

अजवाइन एक झाड़ीदार मसाला फसल है, जो रबी मौसम में उगाई जाती है। इसका उपयोग मसाले, दवा और घरेलू उपचार के रूप में किया जाता है।

🔹 मुख्य विशेषताएं

• अजवाइन धनिया कुल की फसल है
• इसके बीज सुगंधित और औषधीय होते हैं
• पेट संबंधी रोगों में अत्यंत लाभकारी
• बाजार में पूरे साल मांग बनी रहती है

👉 अजवाइन की खेती कहाँ होती है
भारत में राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और तमिलनाडु प्रमुख राज्य हैं।

❤️ 2. अजवाइन के स्वास्थ्य लाभ | Health Benefits

अजवाइन केवल मसाला नहीं बल्कि आयुर्वेदिक औषधि है।

🔹 प्रमुख फायदे

• गैस, अपच और पेट दर्द में राहत
• सर्दी जुकाम और खांसी में उपयोगी
• गठिया और जोड़ों के दर्द में लाभ
• रक्त शुद्धिकरण में सहायक
• वजन घटाने में मददगार
• दमा और सांस रोगों में उपयोग

👉 इसमें विटामिन C, K, B6, फोलेट और पोटैशियम प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

🔬 3. वैज्ञानिक वर्गीकरण | Scientific Classification

वनस्पति नाम: Apium graveolens
कुल: Apiaceae
सामान्य नाम: अजवाइन
• अंग्रेजी नाम: Celery Seed
पौधे का प्रकार: शाकीय

🌤️ 4. जलवायु और तापमान | Climate & Temperature

🔹 उपयुक्त जलवायु

• ठंडी और शुष्क जलवायु सर्वोत्तम
• अत्यधिक गर्मी नुकसानदायक

🔹 तापमान आवश्यकता

• अंकुरण: 25 से 30 डिग्री
• वृद्धि: 12 से 25 डिग्री
• बीज पकना: 25 से 30 डिग्री

👉 अजवाइन की खेती कब होती है
यह मुख्य रूप से रबी फसल है। रबी फसलों की बुवाई आमतौर पर अक्टूबर से नवंबर के बीच की जाती है और कटाई मार्च से अप्रैल तक होती है।

🌱 5. मिट्टी की आवश्यकता | Soil Requirement

🔹 उपयुक्त मिट्टी

• बलुई दोमट मिट्टी सर्वोत्तम
• अच्छी जल निकास व्यवस्था जरूरी
• जैविक पदार्थों से भरपूर भूमि

🔹 पीएच मान

• 6.5 से 7.5 उपयुक्त

❌ जलभराव और क्षारीय मिट्टी से बचें।

🌾 6. बीज और उन्नत किस्में | अजवाइन की प्रमुख किस्में

अजवाइन की खेती में अधिक उत्पादन और अच्छा मुनाफा पाने के लिए सही किस्म का चयन बहुत जरूरी होता है। अलग अलग क्षेत्रों की जलवायु, मिट्टी और सिंचाई व्यवस्था के अनुसार किस्म चुनने से फसल का जोखिम कम होता है और पैदावार बढ़ती है।

नीचे दी गई सभी किस्में विश्वसनीय और प्रमाणित जानकारी के आधार पर दी गई हैं।

🌱 6.1. यूटा और पास्कल (Uta और Pascal)

• विश्व स्तर पर लोकप्रिय किस्में
• पौधे कटाई तक हरे बने रहते हैं
• गुणवत्ता बहुत अच्छी मानी जाती है
• मुख्य रूप से हरी अजवाइन के लिए उपयोग
• सलाद और सब्जी के लिए उपयुक्त

👉 यह किस्में बीज मसाले की तुलना में ताजी सब्जी के रूप में अधिक उपयोग होती हैं।

🌱 6.2. फोर्डहुक एम्परर (Fordhook Emperor)

• बहुत अच्छी गुणवत्ता वाली किस्म
• पत्तियां मोटी और सुगंधित होती हैं
• रोगों के प्रति अच्छी प्रतिरोधक क्षमता
• सलाद, सूप और औषधीय उपयोग के लिए श्रेष्ठ
• व्यावसायिक सब्जी खेती में लोकप्रिय

🌱 6.3. एए 1 (AA-1)

• राष्ट्रीय बीज मसाला ब्यूरो, तबीजी, अजमेर द्वारा विकसित
• देर से पकने वाली उन्नत किस्म
• सभी प्रकार की मिट्टी में सफल
• रोग सहनशील क्षमता अच्छी
• औसत उत्पादन: 12 से 15 क्विंटल प्रति एकड़

👉 बीज मसाले के लिए सबसे भरोसेमंद किस्मों में से एक।

🌱 6.4. गुजरात अजवाइन 1 (Gujarat Ajwain 1)

• उच्च उत्पादन देने वाली किस्म
• शुष्क और अर्ध शुष्क क्षेत्रों के लिए उपयुक्त
• बीज का आकार एक समान और गुणवत्ता अच्छी
• कम पानी में भी अच्छी पैदावार
• औसत उत्पादन: 8 से 12 क्विंटल प्रति एकड़

🌱 6.5. आरए 19-80 (RA 19-80)

• सिंचित और असिंचित दोनों परिस्थितियों में उपयुक्त
• फसल अवधि लगभग 155 से 160 दिन
• स्थिर और भरोसेमंद उत्पादन
• औसत उत्पादन: 9 से 10 क्विंटल प्रति एकड़

🌱 6.6. लाभ सलेक्शन 1 और लाभ सलेक्शन 2

• जल्दी तैयार होने वाली किस्में
• राजस्थान और गुजरात में अधिक लोकप्रिय
• कम समय में कटाई के लिए तैयार

लाभ सलेक्शन 1
• उत्पादन: 8 से 9 क्विंटल प्रति एकड़

लाभ सलेक्शन 2
• उत्पादन: 9 से 10 क्विंटल प्रति एकड़

👉 सीमित समय और कम जोखिम वाली खेती के लिए अच्छी किस्में।

🌱 6.7. फ्यूजेरियम रोग प्रतिरोधी किस्में

Utah 52-70R Improved
Tall Utah 52-70HK
Picador
Matador

• फ्यूजेरियम विल्ट रोग के प्रति प्रतिरोधी या सहनशील
• रोग प्रभावित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त
• सुरक्षित और स्थिर उत्पादन देने वाली किस्में

👉 जिन खेतों में फ्यूजेरियम रोग की समस्या रहती है, वहां इन किस्मों का चयन करें।

किस्म चयन करते समय ध्यान देने योग्य बातें

• अपने क्षेत्र की जलवायु को ध्यान में रखें
• सिंचाई सुविधा के अनुसार किस्म चुनें
• रोग प्रभावित क्षेत्रों में प्रतिरोधी किस्म लगाएं
• हमेशा प्रमाणित और शुद्ध बीज ही प्रयोग करें

👉 सही किस्म का चुनाव करने से अजवाइन की खेती कैसे होती है यह आसान हो जाती है और प्रति एकड़ मुनाफा स्पष्ट रूप से बढ़ता है।

🌰 7. बीज दर | Seed Rate

🔹 प्रति एकड़ बीज मात्रा

• 400 ग्राम बीज प्रति एकड़

🔹 बीज उपचार

• कार्बेन्डाजिम या थिरम
• 2 से 3 ग्राम प्रति किलो बीज

👉 बीज उपचार से रोग कम होते हैं।

🚜 8. खेत की तैयारी | Land Preparation

🔹 तैयारी की विधि

• 2 से 3 गहरी जुताई
• 4 से 5 हल्की जुताई
• खेत को भुरभुरा और समतल बनाएं

🔹 जैविक खाद

• 12 से 15 टन सड़ी गोबर खाद प्रति एकड़

🌱 9. बुवाई की विधि | Sowing Method

🔹 बुवाई का सही समय

नर्सरी: सितंबर से अक्टूबर
रोपाई: नवंबर से दिसंबर

👉 अजवाइन की खेती किस महीने में होती है
सितंबर से अक्टूबर सबसे उपयुक्त।

🔹 दूरी

• कतार से कतार: 45 सेमी
• पौधे से पौधे: 25 सेमी

🔹 गहराई

• 2 से 4 सेमी

🧪 10. खाद एवं उर्वरक प्रबंधन | Fertilizer Management

🔹 पोषक तत्व आवश्यकता (Per Acre)

• नाइट्रोजन: 40 किलो
• फास्फोरस: 16 किलो

🔹 उर्वरक मात्रा

• यूरिया: 90 किलो
• एसएसपी: 35 किलो

🔹 प्रयोग विधि

• आधी नाइट्रोजन रोपाई के समय
• शेष दो भागों में 45 और 75 दिन बाद

💧 11. सिंचाई प्रबंधन | Irrigation Schedule

अजवाइन की जड़ें उथली होती हैं, इसलिए नियमित पानी जरूरी है।

🔹 सिंचाई योजना

• पहली सिंचाई: रोपाई के तुरंत बाद
• बाद में: 10 से 15 दिन के अंतर पर
• कुल सिंचाई: 4 से 6 बार

👉 ड्रिप सिंचाई सबसे बेहतर मानी जाती है।

🌾 12. खरपतवार नियंत्रण | Weed Control

अजवाइन की खेती में खरपतवार एक बड़ी समस्या होती है। यदि समय पर खरपतवार नियंत्रण नहीं किया गया तो फसल की पैदावार में 30 से 40 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। इसलिए अजवाइन की खेती कैसे होती है इसमें खरपतवार नियंत्रण का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।

🌱 12.1 खरपतवार से होने वाले नुकसान

• पौधों के पोषक तत्वों को चुरा लेते हैं
• नमी और पानी की कमी हो जाती है
• कीट और रोगों को बढ़ावा मिलता है
• पौधों की बढ़वार रुक जाती है
• बीज उत्पादन कम हो जाता है

👉 इसलिए अजवाइन की खेती kaise karen में खरपतवार नियंत्रण बहुत जरूरी है।

🧹 12.2 हाथ से खरपतवार नियंत्रण

यह सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका माना जाता है।

• पहली निराई गुड़ाई: बुवाई या रोपाई के 25 से 30 दिन बाद
• दूसरी निराई: 45 से 50 दिन बाद
• आवश्यकता अनुसार तीसरी निराई भी की जा सकती है

👉 हाथ से निराई करने से मिट्टी भी भुरभुरी रहती है और जड़ों को हवा मिलती है।

⚙️ 12.3 यांत्रिक विधि से खरपतवार नियंत्रण

• खुरपी या हल्की कुदाल का उपयोग
• कतारों के बीच हल्की गुड़ाई
• पौधों की जड़ों को नुकसान न पहुंचे इसका ध्यान रखें

👉 यह तरीका छोटे और मध्यम किसानों के लिए उपयुक्त है।

🧪 12.4 रासायनिक खरपतवार नियंत्रण

यदि खेत में खरपतवार अधिक हो तो रसायनों का प्रयोग किया जा सकता है।

• लिन्यूरॉन 6 किलो प्रति एकड़
• बुवाई के बाद और अंकुरण से पहले प्रयोग
• पर्याप्त नमी होना जरूरी

⚠️ ध्यान रखें
• दवा की मात्रा अधिक न करें
• छिड़काव सुबह या शाम करें
• सुरक्षा उपकरण अवश्य पहनें

🍂 12.5 मल्चिंग द्वारा खरपतवार नियंत्रण

• सूखी घास या भूसा खेत में बिछाएं
• नमी बनी रहती है
• खरपतवार उगने नहीं पाते
• सिंचाई की जरूरत कम होती है

👉 यह तरीका जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए बहुत अच्छा है।

🌿 12.6 जैविक खरपतवार नियंत्रण के उपाय

• फसल चक्र अपनाएं
• खेत को हमेशा साफ रखें
• नर्सरी और रोपाई में स्वस्थ पौध लगाएं
• समय पर सिंचाई और निराई करें

👉 जैविक तरीकों से अजवाइन की खेती kab aur kaise kare यह ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ बनती है।

12.7 खरपतवार नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

• शुरुआती 40 से 50 दिन सबसे महत्वपूर्ण
• खरपतवार छोटे हों तभी निकालें
• जलभराव से बचें
• खेत का नियमित निरीक्षण करें

🐛 13. कीट एवं रोग प्रबंधन | Pest & Disease Management

अजवाइन की खेती में कीट और रोग समय पर नियंत्रित न किए जाएं तो उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए रोकथाम, नियमित निरीक्षण और सही दवा का प्रयोग बहुत जरूरी है।

🌿 13.1 प्रमुख कीट एवं उनका नियंत्रण

🔹 1. माहू | Aphids

• पत्तियों और कोमल तनों का रस चूसते हैं
• पौधे कमजोर हो जाते हैं
• वायरस रोग फैलने का खतरा

नियंत्रण
• मलेथियान 50 EC 400 मिली प्रति एकड़
• 150 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव
• 15 दिन के अंतराल पर आवश्यकता अनुसार

🔹 2. लीफ माइनर | Leaf Miner

• पत्तियों में सफेद टेढ़ी लकीरें बनती हैं
• पत्तियां झुलसी हुई दिखाई देती हैं

नियंत्रण
• प्रभावित पत्तियां तोड़कर नष्ट करें
• उपयुक्त कीटनाशक का छिड़काव करें
• नीम आधारित दवा का प्रयोग लाभकारी

🔹 3. कैटरपिलर | Caterpillar

• पत्तियों को खाकर नुकसान पहुंचाते हैं
• अधिक प्रकोप में पौधा नष्ट हो सकता है

नियंत्रण
• खेत की नियमित निगरानी करें
• जैविक नियंत्रण को प्राथमिकता दें
• आवश्यकता पड़ने पर अनुशंसित कीटनाशक प्रयोग करें

🔹 4. गाजर वीविल और जड़ खाने वाले कीट

• जड़ों में सुरंग बनाकर पौधे को नुकसान
• पौधे पीले पड़कर सूखने लगते हैं

नियंत्रण
• गहरी जुताई करें
• फसल चक्र अपनाएं
• संक्रमित पौध तुरंत हटा दें

🍂 13.2 प्रमुख रोग एवं उनका नियंत्रण

🔹 1. डैंपिंग ऑफ रोग

• बीज सड़ जाते हैं
• अंकुरण कम हो जाता है

नियंत्रण
• बीज उपचार अनिवार्य करें
• कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 400 ग्राम प्रति एकड़
• 150 लीटर पानी में घोलकर ड्रेंचिंग

🔹 2. डाउनी मिल्ड्यू

• पत्तियों पर पीले धब्बे
• नीचे की सतह पर सफेद फफूंद

नियंत्रण
• खेत में जल निकास सही रखें
• कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या M 45
• 400 ग्राम प्रति एकड़ छिड़काव

🔹 3. अर्ली ब्लाइट

• पत्तियों पर छोटे पीले धब्बे
• धीरे धीरे पत्तियां सूख जाती हैं

नियंत्रण
• ज़िनेब 75 WP 400 ग्राम प्रति एकड़
• 150 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव

🔹 4. फ्यूजेरियम विल्ट

• पौधों का विकास रुक जाता है
• जड़ें भूरी और सड़ी हुई
• पौधे धीरे धीरे मर जाते हैं

नियंत्रण
• रोगग्रस्त खेत में अजवाइन न लगाएं
• बीज उपचार और फसल चक्र अपनाएं
• कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 400 ग्राम प्रति एकड़

🛡️ 13.3 रोग एवं कीट से बचाव के सामान्य उपाय

• प्रमाणित और स्वस्थ बीज का उपयोग करें
• खेत में जलभराव न होने दें
• संतुलित उर्वरक का प्रयोग करें
• अत्यधिक नाइट्रोजन से बचें
• खेत का नियमित निरीक्षण करें
• संक्रमित पौध तुरंत हटा दें

👉 याद रखें
रोग और कीट का इलाज करने से बेहतर है उनकी रोकथाम करना। समय पर निगरानी और सही प्रबंधन से अजवाइन की फसल सुरक्षित और अधिक उत्पादन देने वाली बनती है।

14. फसल अवधि | Crop Duration

📌 ajwain ki kheti kab hoti hai aur kitne din mein taiyar hoti hai

अजवाइन की फसल मध्यम अवधि की मानी जाती है। सही जलवायु, किस्म और देखभाल मिलने पर यह फसल समय पर तैयार हो जाती है।

🌱 अजवाइन की औसत फसल अवधि

● कुल फसल अवधि: 140 से 170 दिन
● नर्सरी अवधि: 60 से 70 दिन
● खेत में रोपाई के बाद: 80 से 100 दिन

📅 विकास चरण अनुसार अवधि विवरण

1️⃣ बीज अंकुरण
● समय: 12 से 15 दिन
● इस समय हल्की सिंचाई बहुत जरूरी

2️⃣ पौध वृद्धि अवस्था
● अवधि: 30 से 45 दिन
● इस समय निराई गुड़ाई और पहली टॉप ड्रेसिंग करें

3️⃣ फूल आने की अवस्था
● अवधि: 45 से 60 दिन
● इसी समय कीट और रोगों पर विशेष ध्यान दें

4️⃣ दाना बनने और पकने की अवस्था
● अवधि: 30 से 40 दिन
● इस समय अधिक नमी नुकसानदायक हो सकती है

🌾 किस्म अनुसार फसल अवधि

● जल्दी पकने वाली किस्में: 130 से 140 दिन
● मध्यम अवधि की किस्में: 145 से 160 दिन
● देर से पकने वाली किस्में: 160 से 170 दिन

⚠️ फसल अवधि को प्रभावित करने वाले मुख्य कारण

● तापमान में अधिक उतार चढ़ाव
● अनियमित सिंचाई
● अधिक नाइट्रोजन का प्रयोग
● खरपतवार और रोग प्रकोप

किसानों के लिए जरूरी सलाह

👉 समय पर कटाई न करने से दाने झड़ने लगते हैं
👉 सही समय पर कटाई से उपज और गुणवत्ता दोनों बढ़ती हैं

📌 सही योजना के साथ ajwain ki kheti kaise karen यह समझना आसान हो जाता है और किसान बेहतर मुनाफा कमा सकता है।

✂️ 1️5. अजवाइन की कटाई | Harvesting

📌 ajwain ki kheti kab aur kaise kare कटाई के समय

अजवाइन की फसल की कटाई सही समय पर करना बहुत जरूरी होता है। देरी होने पर बीज झड़ने लगते हैं और नुकसान हो सकता है।

⏳ कटाई का सही समय

● बुवाई या रोपाई के 140 से 160 दिन बाद
● जब पौधों पर लगे गुच्छों के दाने
✔️ हल्के भूरे रंग के
✔️ पूरी तरह विकसित
✔️ सुगंधित
हो जाएं

⚠️ बहुत ज्यादा देर करने पर दाने झड़ जाते हैं, जिससे उत्पादन कम हो जाता है।

🔪 कटाई की सही विधि

1️⃣ सबसे पहले मौसम साफ और सूखा चुनें
2️⃣ पौधों को जमीन से थोड़ा ऊपर
तेज धार वाले हंसिये या चाकू से काटें
3️⃣ कटे हुए पौधों को
खेत में ही 3 से 5 दिन
धूप में अच्छे से सुखाएं

🌾 बीज अलग करने की प्रक्रिया

1️⃣ जब पौधे पूरी तरह सूख जाएं
2️⃣ तब गुच्छों को
लकड़ी की डंडी से हल्का पीटें
3️⃣ इससे अजवाइन के दाने
आसानी से अलग हो जाते हैं
4️⃣ दानों को साफ कर
छलनी से छान लें

☀️ अंतिम सुखाई

● दानों को 2 से 3 दिन
हल्की धूप में सुखाएं
● नमी पूरी तरह खत्म होनी चाहिए
● नमी रहने पर भंडारण में नुकसान होता है

✅ कटाई के समय ध्यान रखने योग्य बातें

✔️ कटाई सुबह या शाम करें
✔️ नमी वाले मौसम में कटाई न करें
✔️ बीज पूरी तरह सूखे हों
✔️ देर से कटाई से बचें

🌾 1️6. प्रति एकड़ उत्पादन | Yield per Acre

● औसतन 8 से 15 क्विंटल

💰 17. बाजार भाव और मुनाफा | Market Price & Profit

📊 बाजार भाव

● 12000 से 20000 रुपए प्रति क्विंटल

💸 संभावित मुनाफा

● 1.5 से 2.5 लाख रुपए प्रति एकड़

📦 1️8. भंडारण | Storage

● पूरी तरह सूखे बीज
● सूखी और हवादार जगह
● जूट बैग या ड्रम में संग्रह

🏛️ 1️9. सरकारी योजनाएं | Government Schemes

● राष्ट्रीय बीज मसाला मिशन
● राष्ट्रीय बागवानी मिशन
● ड्रिप सिंचाई सब्सिडी योजना

👉 जानकारी के लिए कृषि विभाग से संपर्क करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न 1. अजवाइन की खेती किस महीने में होती है

उत्तर:
अजवाइन की खेती रबी मौसम में की जाती है। इसकी बुवाई के लिए अगस्त से सितंबर का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। इसके बाद नर्सरी में तैयार पौधों की खेत में रोपाई नवंबर से दिसंबर के बीच की जाती है।

प्रश्न 2. अजवाइन की खेती कब होती है

उत्तर:
अजवाइन की खेती मुख्य रूप से सर्दियों के मौसम में की जाती है। ठंडी और शुष्क जलवायु इस फसल की अच्छी बढ़वार और बेहतर उत्पादन के लिए सबसे अनुकूल होती है।

प्रश्न 3. अजवाइन की खेती कैसे होती है

उत्तर:
अजवाइन की खेती दो प्रमुख तरीकों से की जाती है।
● नर्सरी में पौधे तैयार करके खेत में रोपाई द्वारा
● सीधे खेत में बीज की बुवाई करके

हालांकि, अधिकांश किसान नर्सरी विधि को अपनाते हैं क्योंकि इससे पौधे मजबूत बनते हैं और पैदावार अधिक प्राप्त होती है।

प्रश्न 4. अजवाइन की खेती कैसे करें जिससे ज्यादा पैदावार मिले

उत्तर:
अजवाइन की अच्छी और अधिक पैदावार प्राप्त करने के लिए निम्न बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
● उन्नत और प्रमाणित किस्म का चयन करें
● दोमट और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी का प्रयोग करें
● संतुलित मात्रा में खाद और उर्वरक दें
● समय पर सिंचाई और निराई गुड़ाई करते रहें

प्रश्न 5. अजवाइन की खेती कब और कैसे करें

उत्तर:
अजवाइन की खेती की शुरुआत अगस्त से सितंबर के बीच बीज बुवाई से करनी चाहिए। इसके बाद लगभग 60 से 70 दिन में तैयार पौधों को खेत में रोपित करना चाहिए।

प्रश्न 6. अजवाइन की खेती कौन से महीने में की जाती है

उत्तर:
अजवाइन की खेती का पूरा समय इस प्रकार रहता है।
● बुवाई: अगस्त से सितंबर
● रोपाई: नवंबर से दिसंबर
● कटाई: मार्च से अप्रैल

प्रश्न 7. अजवाइन की खेती कहां होती है

उत्तर:
भारत में अजवाइन की खेती मुख्य रूप से
राजस्थान
उत्तर प्रदेश
गुजरात
मध्य प्रदेश
पंजाब
महाराष्ट्र
जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर की जाती है।

प्रश्न 8. अजवाइन की खेती में कितना पानी चाहिए

उत्तर:
अजवाइन की फसल को हल्की लेकिन नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है।
● सामान्यतः 15 से 20 दिन के अंतर पर सिंचाई करें
● फूल और दाना बनने की अवस्था में विशेष ध्यान दें
● बेहतर जल प्रबंधन के लिए ड्रिप सिंचाई सबसे उपयुक्त मानी जाती है

प्रश्न 9. अजवाइन की खेती से प्रति एकड़ कितना उत्पादन होता है

उत्तर:
उन्नत किस्मों और वैज्ञानिक खेती विधि अपनाने पर 8 से 15 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।

प्रश्न 10. अजवाइन की खेती में प्रति एकड़ कितना मुनाफा होता है

उत्तर:
अजवाइन का बाजार भाव सामान्यतः 12000 से 20000 रुपए प्रति क्विंटल के बीच रहता है। इस आधार पर किसान प्रति एकड़ लगभग 1.5 से 2.5 लाख रुपए तक की कमाई कर सकते हैं।

✅ निष्कर्ष

अजवाइन की खेती कम लागत, कम जोखिम और ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल है।
सही समय
सही किस्म
और वैज्ञानिक विधि अपनाकर
किसान भाई प्रति एकड़ लाखों रुपए कमा सकते हैं।

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🙏 आपकी खेती सफल हो, यही शुभकामनाएं।

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संदर्भ स्रोत