तोरी की खेती | Tori Ki Kheti

तोरी की खेती

🌱तोरी की खेती कैसे करें? कम लागत में ज्यादा मुनाफा

तोरी की खेती भारत के किसानों के लिए एक लाभदायक, कम लागत और जल्दी तैयार होने वाली सब्जी फसल है। इसे कई जगह स्पंज लौकी या लूफा के नाम से भी जाना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है क्योंकि इसकी मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है और सही तकनीक अपनाने पर प्रति एकड़ अच्छा मुनाफा मिलता है।

यह ब्लॉग पोस्ट खास तौर पर ग्रामीण किसानों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, ताकि वे सरल भाषा, सही जानकारी और व्यावहारिक तरीकों से तोरी की खेती कर सकें।

🌿 फसल परिचय | Crop Introduction

तोरी की खेती एक बेलदार सब्जी फसल के रूप में की जाती है। इसकी बेलें 30 फीट या उससे भी अधिक लंबी हो सकती हैं। फल बेलनाकार होते हैं, ऊपर से चिकने हरे रंग के और अंदर से सफेद, रेशेदार गूदा होता है।

कच्ची अवस्था में तोरी को सब्जी के रूप में उपयोग किया जाता है, जबकि पूरी तरह पकने पर इसके अंदर से प्राकृतिक स्पंज प्राप्त होता है, जिसका उपयोग
• बर्तन साफ करने
• स्नान के लिए
• टेबल मैट
• जूते के सोल
जैसे कार्यों में किया जाता है।

भारत में तोरी की खेती मुख्य रूप से
पंजाब
उत्तर प्रदेश
बिहार
हरियाणा
राजस्थान
दिल्ली
गुजरात
झारखंड
जैसे राज्यों में की जाती है।

🥗 1. तोरी के स्वास्थ्य लाभ | Health Benefits of Tori

तोरी केवल किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए भी बेहद फायदेमंद सब्जी है।

🔹 प्रमुख स्वास्थ्य लाभ

• विटामिन A और C से भरपूर
• पाचन क्रिया को मजबूत बनाती है
• शरीर को डिटॉक्स करने में सहायक
• मधुमेह नियंत्रण में उपयोगी
• पीलिया रोग में लाभकारी
• त्वचा रोगों में सहायक
• रक्त शुद्ध करने में मददगार
• कम कैलोरी होने के कारण वजन घटाने में सहायक

इसी कारण बाजार में इसकी मांग लगातार बनी रहती है।

🔬 2. वैज्ञानिक वर्गीकरण | Scientific Classification

🔬 वैज्ञानिक जानकारी

सामान्य नाम: तोरी, स्पंज लौकी
अंग्रेजी नाम: Sponge Gourd
वानस्पतिक नाम: Luffa cylindrica
कुल: Cucurbitaceae
फसल प्रकार: सब्जी फसल
जीवन काल: एक वर्षीय

🌤️3. जलवायु और तापमान | Climate & Temperature

तोरी की खेती के लिए गर्म और आर्द्र जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है।

🌡️ आदर्श तापमान

• न्यूनतम तापमान: 18 डिग्री सेल्सियस
• उत्तम तापमान: 25 से 28 डिग्री सेल्सियस
• अधिकतम सहनशील: 35 डिग्री सेल्सियस

ठंड और पाला फसल के लिए हानिकारक होता है।

🌾4. मिट्टी की आवश्यकता | Soil Requirement

तोरी की खेती कई प्रकार की मिट्टियों में की जा सकती है, लेकिन अधिक उत्पादन के लिए सही मिट्टी का चयन जरूरी है।

🌱 उपयुक्त मिट्टी

• बलुई दोमट मिट्टी सर्वोत्तम
• जल निकास अच्छा होना चाहिए
• भारी मिट्टी से बचें

📊 मिट्टी का पीएच मान

• 6.5 से 7.0
• सामान्य से हल्की क्षारीय मिट्टी

मिट्टी की जांच कराकर खेती करना सबसे अच्छा रहता है।

🌱 5. बीज और किस्में | Seed & Varieties

अच्छी उपज के लिए उन्नत और प्रमाणित किस्मों का चयन बहुत जरूरी है।

🌟 प्रमुख किस्में और उपज

✔️ PSG 9

• पहली तुड़ाई: 60 दिन
• औसत उपज: 65 क्विंटल प्रति एकड़

✔️ पंजाब निखार

• पहली तुड़ाई: 43 दिन
• औसत उपज: 82 क्विंटल प्रति एकड़

✔️ पूसा चिकनी

• औसत उपज: 35 से 40 क्विंटल प्रति एकड़

✔️ पंजाब काली तोरी 9

• पहली तुड़ाई: 60 दिन
• औसत उपज: 65 क्विंटल प्रति एकड़

🌟 ICAR IIHR द्वारा विकसित किस्में

✔️ अर्का विक्रम

• पहली तुड़ाई: 46 दिन
• उपज: 136 क्विंटल प्रति एकड़

✔️ अर्का सुमीत

• उपज: 200 क्विंटल प्रति एकड़
• लंबा और सुगंधित फल

🌾6. बीज दर | Seed Rate

📌 प्रति एकड़ बीज मात्रा

• 2.0 किलोग्राम बीज प्रति एकड़

🌱 बीज उपचार

• बीज के छिलके को हल्का खुरचें
• 24 घंटे पानी में भिगोएं
• इससे अंकुरण अच्छा होता है

🚜 7. भूमि तैयारी | Land Preparation

अच्छी फसल के लिए खेत की सही तैयारी जरूरी है।

🛠️ भूमि तैयारी के चरण

• 2 से 3 जुताई
• खेत को भुरभुरा बनाएं
• खरपतवार पूरी तरह हटाएं

🐄 जैविक खाद

• गोबर की सड़ी खाद: 84 क्विंटल प्रति एकड़

🌱 8. बुवाई विधि | Sowing Method

तोरी की खेती में सही बुवाई विधि अपनाना अच्छी अंकुरण क्षमता और मजबूत पौधों के लिए बहुत जरूरी है। नीचे बुवाई से जुड़ी मुख्य बातें संक्षेप में दी गई हैं।

⏰ बुवाई का उपयुक्त समय

• पहली बुवाई: फरवरी से मार्च
• दूसरी बुवाई: मई से जुलाई

📏 पौधों की दूरी

• पंक्ति से पंक्ति की दूरी: 3 मीटर
• पौधे से पौधे की दूरी: 75 से 90 सेंटीमीटर
• प्रत्येक स्थान पर 2 बीज लगाएं

🌱 बुवाई की गहराई

• बीज को 2.5 से 3 सेंटीमीटर गहराई में बोएं

✋ बुवाई की विधि

• डिब्लिंग विधि सबसे उपयुक्त
• बुवाई के बाद हल्की सिंचाई अवश्य करें

👉 सही समय और सही दूरी पर बुवाई करने से पौधों का विकास अच्छा होता है और उपज में वृद्धि होती है।

🌾9. खाद और उर्वरक प्रबंधन | Fertilizer & Manure

🔬 पोषक तत्व मात्रा प्रति एकड़

• नाइट्रोजन: 40 किलोग्राम
• फास्फोरस: 20 किलोग्राम
• पोटाश: 20 किलोग्राम

🧪 उर्वरक मात्रा

• यूरिया: 90 किलोग्राम
• एसएसपी: 125 किलोग्राम
• एमओपी: 35 किलोग्राम

उर्वरक को तीन चरणों में दें।

💧10. सिंचाई प्रबंधन | Irrigation Schedule

• पहली सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद
• गर्मी में 7 से 10 दिन का अंतर
• वर्षा ऋतु में कम सिंचाई
• कुल सिंचाई: 7 से 8 बार

🌿11. खरपतवार नियंत्रण | Weed Control

तोरी की अच्छी उपज के लिए खेत को शुरुआती अवस्था में खरपतवार मुक्त रखना बहुत जरूरी है, क्योंकि खरपतवार पौधों से पोषक तत्व, पानी और जगह छीन लेते हैं।

🔹 प्रभावी खरपतवार नियंत्रण उपाय

• खेत की समय पर निराई गुड़ाई करें
• मल्चिंग का प्रयोग करने से खरपतवार कम उगते हैं
• बुवाई के बाद लेकिन अंकुरण से पहले शाकनाशी का प्रयोग करें

🧪 अनुशंसित शाकनाशी मात्रा प्रति एकड़

• पेंडीमेथालिन: 1 लीटर
• फ्लूक्लोरालिन: 800 मिली

👉 शाकनाशी का छिड़काव हल्की नमी वाली मिट्टी में करें और छिड़काव के बाद खेत को न जोतें।

🐛 12. कीट और रोग प्रबंधन | Pest & Disease Management

तोरी की खेती में अधिक उपज और स्वस्थ फसल के लिए कीट एवं रोगों का समय पर नियंत्रण बहुत जरूरी है। नीचे मुख्य रोग, कीट और उनके संक्षिप्त नियंत्रण उपाय दिए गए हैं।

🦠 मुख्य रोग और नियंत्रण उपाय

✔️ पाउडरी मिल्ड्यू

लक्षण
• पत्तियों की ऊपरी सतह पर सफेद पाउडर जैसे धब्बे
• पत्तियां पीली होकर सूखने लगती हैं

नियंत्रण
• एम 45 @ 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव
• आवश्यकता अनुसार क्लोरोथालोनिल या बेनोमाइल का प्रयोग
• रोग की शुरुआत में ही दवा का छिड़काव करें

🐞 मुख्य कीट और नियंत्रण उपाय

✔️ कद्दू बीटल

लक्षण
• पत्तियों, फूलों और तनों को नुकसान
• पौधे की बढ़वार रुक जाती है

नियंत्रण
• उपयुक्त कीटनाशक का समय पर छिड़काव
• खेत की नियमित निगरानी

✔️ माहू और थ्रिप्स

लक्षण
• पत्तियों से रस चूसते हैं
• पत्तियां पीली होकर मुड़ जाती हैं
• थ्रिप्स से पत्तियां कप के आकार की हो जाती हैं

नियंत्रण
• थायमेथोक्साम @ 5 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव

🌿 रोकथाम के सामान्य उपाय

• खेत को साफ रखें
• रोगग्रस्त पौधों को तुरंत निकालें
• संतुलित खाद और सिंचाई अपनाएं
• फसल चक्र का पालन करें

👉 समय पर सही दवा और देखभाल से तोरी की फसल को कीट और रोगों से आसानी से बचाया जा सकता है।

⏳13. फसल अवधि | Crop Duration

तोरी की खेती एक कम अवधि में तैयार होने वाली सब्जी फसल है, जिससे किसान जल्दी उत्पादन और आय प्राप्त कर सकते हैं।

⏱️ फसल की अवधि

• बुवाई के बाद पहली तुड़ाई: 60 से 80 दिन
• कुल फसल अवधि: 120 से 135 दिन
• तुड़ाई का अंतराल: 3 से 4 दिन

📌 विशेष जानकारी

• जल्दी फल देने वाली फसल होने से बाजार में जल्दी बिक्री संभव
• समय पर तुड़ाई करने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर रहती हैं

👉 सही देखभाल और प्रबंधन से पूरी फसल अवधि में लगातार अच्छी पैदावार मिलती है।

🧺 14. कटाई विधि | Harvesting Method

• तोरी की पहली तुड़ाई बुवाई के 60 से 80 दिन बाद शुरू हो जाती है
• तुड़ाई हमेशा कोमल और मध्यम आकार के फलों की करें
• अधिक परिपक्व फल बाजार में कम दाम पर बिकते हैं
• नियमित उत्पादन के लिए हर 3 से 4 दिन के अंतर से तुड़ाई करें
• तुड़ाई सुबह या शाम के समय करना बेहतर रहता है
• फल को हाथ से या तेज चाकू से सावधानीपूर्वक तोड़ें ताकि बेल को नुकसान न पहुंचे

👉 सही समय पर कटाई करने से उपज, गुणवत्ता और बाजार मूल्य तीनों बढ़ते हैं

📦 15. प्रति एकड़ उपज | Yield per Acre

• सामान्य उपज: 66 से 83 क्विंटल
• उन्नत किस्मों से 200 क्विंटल तक

💰 16. बाजार भाव और मुनाफा | Market Price & Profit

📊 औसत बाजार भाव

• 10 से 25 रुपये प्रति किलोग्राम

💸 अनुमानित मुनाफा

• लागत: 25000 से 30000 रुपये
• आय: 80000 से 150000 रुपये
• शुद्ध लाभ: 50000 से 120000 रुपये प्रति एकड़

🏠 17. भंडारण | Storage

• ताजे फल 7 से 10 दिन तक सुरक्षित
• ठंडी और हवादार जगह रखें

🇮🇳 18. सरकारी योजनाएं | Government Schemes

• राष्ट्रीय बागवानी मिशन
• प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना
• सब्जी उत्पादन अनुदान योजना
• कृषि विभाग से बीज सब्सिडी

तोरी की खेती से जुड़े FAQ

Q1. तोरी की खेती के लिए सबसे अच्छा समय कौन सा है

👉 फरवरी से मार्च और मई से जुलाई का समय सबसे उपयुक्त होता है।

Q2. प्रति एकड़ बीज की मात्रा कितनी होनी चाहिए

👉 लगभग 2 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ पर्याप्त होता है।

Q3. तोरी की खेती में कितनी सिंचाई जरूरी है

👉 पूरी फसल में 7 से 8 सिंचाई पर्याप्त होती है।

Q4. तोरी की पहली तुड़ाई कब शुरू होती है

👉 बुवाई के 60 से 80 दिनों बाद पहली तुड़ाई हो जाती है।

Q5. सबसे ज्यादा उपज देने वाली किस्म कौन सी है

👉 अर्का सुमीत और अर्का विक्रम किस्म सबसे अधिक उपज देती हैं।

Q6. क्या तोरी की खेती कम लागत में की जा सकती है

👉 हां, यह कम लागत और अधिक मुनाफे वाली फसल है।

Q7. प्रमुख रोग और कीट कौन से होते हैं

👉 पाउडरी मिल्ड्यू, एफिड और थ्रिप्स मुख्य समस्या हैं।

Q8. तोरी की बाजार में मांग कैसी रहती है

👉 पूरे वर्ष इसकी बाजार में अच्छी मांग बनी रहती है।

Q9. क्या तोरी की जैविक खेती संभव है

👉 हां, जैविक खाद और प्राकृतिक कीटनाशकों से संभव है।

Q10. तोरी की खेती से प्रति एकड़ कितना लाभ होता है

👉 औसतन 50000 से 120000 रुपये प्रति एकड़ शुद्ध लाभ संभव है।

✅ निष्कर्ष | Conclusion 🌿

तोरी की खेती कम समय में अधिक मुनाफा देने वाली सब्जी फसल है। यदि किसान सही किस्म, सही समय, संतुलित खाद और सिंचाई प्रबंधन अपनाएं, तो प्रति एकड़ शानदार उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

👉 तोरी की खेती अपनाएं और अपनी आमदनी बढ़ाएं।
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संदर्भ स्रोत