जीरे की खेती | Jeera Ki Kheti

Jeera ki Kheti

🌾जीरे की खेती: उन्नत तकनीक, तरीका, और पूरी जानकारी

भारत में मसालों का महत्व किसी से छुपा नहीं है। इन्हीं मसालों में जीरा एक प्रमुख व मूल्यवान बीजीय फसल है। पूरे देश के कुल उत्पादन का लगभग 80% से अधिक जीरा सिर्फ गुजरात और राजस्थान में उगाया जाता है। राजस्थान अकेले लगभग 28% उत्पादन देता है, लेकिन यहाँ की औसत उपज (380 किग्रा/हे.) गुजरात (550 किग्रा/हे.) से कम है।
उन्नत खेती तकनीक अपनाई जाए तो जीरे की पैदावार को 25–50% तक बढ़ाया जा सकता है।

इस ब्लॉग में हम आपके लिए लेकर आए हैं—

✔ जीरे की खेती की पूरी जानकारी
✔ जीरे की खेती करने की विधि
✔ जीरे की खेती का समय
✔ jeera ki kheti kab hoti hai
✔ jeera ki kheti kaise karen
✔ बीज, किस्में, भूमि, बुवाई, सिंचाई, खाद
✔ बीमारियों व कीट नियंत्रण के तरीके
✔ उपज व मुनाफे का पूरा हिसाब

सारी जानकारी सरल, ग्रामीण भाषा में ताकि हर किसान भाई इसे आसानी से समझ सके।

भारत में जीरे की खेती कहाँ होती है? (Jeera ki Kheti Kahan Hoti Hai)

भारत में जीरे का सबसे अधिक उत्पादन निम्न राज्यों में होता है:

  • गुजरात – देश का 55%–60% उत्पादन
  • राजस्थान – देश का लगभग 28% उत्पादन
  • पश्चिमी राजस्थान में राज्य का लगभग 80% जीरा पैदा होता है

इसके अलावा कुछ मात्रा में हरियाणा, मध्यप्रदेश व उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी जीरा बोया जाता है।

जीरा क्या है? पौधे की खास बातें

जीरा (Botanical Name: Cuminum cyminum) एक सुगंधित मसाला है।

इसके पौधे की मुख्य विशेषताएँ:

  • ऊँचाई 20–50 सेमी
  • तना शाखाओं वाला
  • हल्के गुलाबी या सफेद फूल
  • बीज लंबे, हल्के भूरे और सुगंधित
  • प्राकृतिक रूप से पाचन में मददगार (इसलिए संस्कृत में “जीरक”)

जीरे का पौधा सौंफ जैसे दिखाई देता है, पर इसका स्वाद और औषधीय गुण काफी अलग होते हैं।

जीरे में पाए जाने वाले पोषक तत्व

जीरे के बीज में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं:

  • आयरन
  • जिंक
  • फाइबर
  • कैल्शियम
  • मैग्नीशियम
  • विटामिन A, C, E
  • B-कॉम्प्लेक्स विटामिन

यह एक बहुत अच्छा एंटीऑक्सीडेंट और पाचन सुधारक मसाला है।

जीरे की उन्नत किस्में (Jeera Varieties)

नीचे जीरे की महत्वपूर्ण किस्में और उनकी विशेषताएँ दी गई हैं:

1. आर जेड – 19

  • अवधि: 120–125 दिन
  • उपज: 9–11 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
  • रोग: उखटा, छाछिया और झुलसा कम लगता है

2. आर जेड – 209

  • अवधि: 120–125 दिन
  • उपज: 7–8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
  • दाने मोटे
  • छाछिया व झुलसा रोग कम लगता है

3. जी सी – 4

  • अवधि: 105–110 दिन
  • उपज: 7–9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
  • बड़े आकार के बीज
  • उखटा रोग के प्रति सहनशील

4. आर जेड – 223

  • अवधि: 110–115 दिन
  • उपज: 6–8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
  • उखटा रोग के प्रति रोधक
  • बीज में 3.25% तेल

जीरे की खेती से पहले क्या जानें?

jeera ki kheti kab hoti hai?
जीरे की बुवाई का सबसे उपयुक्त समय
1 नवंबर से 25 नवंबर तक होता है।

✔ जीरे की खेती के लिए शुष्क व हल्की ठंडी जलवायु सर्वोत्तम है।
✔ 10°C से कम और 30°C से अधिक तापमान अंकुरण प्रभावित करता है।
✔ भारी नमी वाले क्षेत्रों में छाछिया व झुलसा रोग अधिक लगते हैं।
✔ जीरा रेतीली दोमट या दोमट मिट्टी में सबसे अच्छा उगता है।

भूमि का चयन और तैयारी

जीरे के लिए भूमि ऐसी होनी चाहिए:

  • हल्की, भुरभुरी
  • बलुई दोमट या दोमट
  • अच्छी जल निकासी वाली
  • कार्बनिक पदार्थ वाली

भूमि की तैयारी:

  1. मिट्टी पलटने वाले हल से एक गहरी जुताई
  2. हैरो से क्रॉस जुताई
  3. पाटा चलाकर मिट्टी को भुरभुरी करें
  4. अंतिम जुताई कल्टीवेटर से करें

बीज और बुवाई (jeera ki bawai kaise karen)

तापमान: 24–28°C
बुवाई का समय: 1–25 नवंबर

अधिकतर किसान छिड़काव विधि से बुवाई करते हैं, लेकिन 30 सेमी दूरी वाली कतारें बनाकर बुवाई करना सर्वोत्तम माना जाता है।

  • बीज दर: 12 किग्रा प्रति हेक्टेयर
  • गहराई: 1.5 सेमी से अधिक नहीं
  • बीज उपचार: कार्बेन्डाजिम या ट्राइकोडर्मा से अवश्य करें

खाद एवं उर्वरक प्रबंधन

  1. अंतिम जुताई के समय 5 टन गोबर खाद डालें
  2. बुवाई के समय
    • 65 किग्रा DAP
    • 9 किग्रा यूरिया
  3. पहली सिंचाई पर 33 किग्रा यूरिया

यदि पिछली फसल में जैविक खाद दी गई हो, तो अलग से खाद की जरूरत कम पड़ती है।

सिंचाई प्रबंधन (Jeera ki Sinchai)

जीरे में सिंचाई का सही समय बहुत महत्वपूर्ण है।

1️⃣ पहली सिंचाई: बुवाई के तुरंत बाद
2️⃣ दूसरी सिंचाई: 6–7 दिन बाद
3️⃣ आवश्यकता अनुसार: हर 8–10 दिन पर हल्की सिंचाई
4️⃣ दाना बनने तक 20–20 दिन के अंतराल पर 3 सिंचाइयाँ
5️⃣ दाना पकने पर सिंचाई नहीं करनी चाहिए, वरना बीज हल्के बनते हैं।

फव्वारा (Sprinkler) विधि सबसे उत्तम मानी जाती है।

खरपतवार नियंत्रण

जीरे में खरपतवार का प्रकोप अधिक होता है, इसलिए:

  • बुवाई के 2 दिन के भीतर
    पेंडीमैथालिन (Stomp) – 3.3 लीटर/हे.
    को 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़कें
  • 25–30 दिन बाद
    एक गुड़ाई आवश्यक है
  • यदि मजदूर न मिलें तो
    ऑक्सीडाईजॉरिल (Raft) – 750 मि.ली.
    500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़कें

फसल चक्र अपनाना क्यों जरूरी?

जीरे की फसल एक ही खेत में लगातार 3 वर्ष नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि उखटा रोग बहुत बढ़ता है।

उत्तम फसल चक्र:
बाजरा → जीरा → मूंग → गेहूं → बाजरा → जीरा

पौध संरक्षण – कीट व रोग नियंत्रण

1. एफिड (चैंपा)

  • पौधों का रस चूसते हैं
  • नियंत्रण:
    • इमिडाक्लोप्रिड 0.5 मि.ली./लीटर
    • मैलाथियान 50 EC – 1 लीटर/हे.

2. दीमक

  • जड़ नष्ट कर देती है
  • रोकथाम:
    • क्लोरोपाइरीफॉस 20–25 किग्रा/हे.
    • बुवाई से पहले बीज उपचार

3. उखटा रोग

  • पौधे मुरझा जाते हैं
  • नियंत्रण:
    • ट्राइकोडर्मा – 4 ग्राम/किग्रा बीज
    • या बाविस्टीन – 2 ग्राम/किग्रा बीज

4. झुलसा रोग

  • पत्तियों व तने पर भूरे धब्बे
  • नियंत्रण:
    • मैन्कोजेब – 2 ग्राम/लीटर

5. छाछिया रोग

  • पौधे पर सफेद पाउडर
  • नियंत्रण:
    • गंधक का चूर्ण – 25 किग्रा/हे.
    • कैराथेन 1 लीटर/हे.

छिड़काव कार्यक्रम (Spray Schedule)

1️⃣ पहला छिड़काव:
30–35 दिन बाद मैन्कोजेब 2 ग्राम/लीटर

2️⃣ दूसरा छिड़काव:
45–50 दिन बाद

  • मैन्कोजेब
  • इमिडाक्लोप्रिड
  • घुलनशील गंधक

3️⃣ तीसरा छिड़काव:
60–70 दिन बाद
मैन्कोजेब + एमिडाक्लोप्रिड + गंधक

बीज उत्पादन की विधि

बीज उत्पादन के लिए:

  • ऐसे खेत चुनें जहाँ पिछले 2 वर्षों से जीरा न बोया गया हो
  • आसपास 10–20 मीटर में जीरा नहीं होना चाहिए
  • रोगमुक्त पौधे ही रखें
  • कटाई के बाद अच्छी धूप में सुखाकर दानों की नमी 8–9% रखें
  • साफ बोरे या टंकी में संग्रह करें

कटाई और गहाई

  • जब पौधा व बीज भूरे रंग के हो जाएँ तो कटाई करें
  • धूप में सुखाकर थ्रेसर से दाना निकालें
  • अच्छी तरह सुखाकर ही भंडारण करें

उपज और आर्थिक लाभ

उन्नत तकनीक अपनाने पर:

  • उपज: 7–8 क्विंटल/हेक्टेयर
  • खर्च: 30,000–35,000 रुपये/हे.
  • मुनाफा: 40,000–45,000 रुपये/हे. (100 रु./किलो भाव पर)

अच्छी तकनीक अपनाकर किसान भाई ज्यादा कमाई कर सकते हैं।

FAQs – जीरे की खेती से जुड़े सामान्य प्रश्न

1. जीरे की खेती कब होती है?

जीरे की बुवाई 1 नवंबर से 25 नवंबर के बीच होती है।

2. जीरा किन राज्यों में सबसे अधिक उगता है?

गुजरात व राजस्थान में 80% से अधिक उत्पादन होता है।

3. जीरे की बुवाई कितनी गहराई पर करनी चाहिए?

1.5 सेमी से अधिक गहराई नहीं होनी चाहिए।

4. जीरे का कितना बीज प्रति हेक्टेयर लगता है?

12 किलोग्राम बीज पर्याप्त है।

5. जीरे की कौन-कौन सी उन्नत किस्में हैं?

RZ-19, RZ-209, GC-4, RZ-223 प्रमुख किस्में हैं।

6. जीरे की सिंचाई कितनी बार करनी चाहिए?

बुवाई के बाद तुरंत, फिर 6–7 दिन बाद, उसके बाद आवश्यकता अनुसार हल्की सिंचाई।

7. जीरे में कौन-कौन से रोग लगते हैं?

उखटा, झुलसा, छाछिया, दीमक, चैंपा आदि रोग लगते हैं।

8. दाना पकने पर सिंचाई क्यों नहीं करनी चाहिए?

क्योंकि सिंचाई से दाना हल्का बन जाता है।

9. जीरे की औसत उपज कितनी मिलती है?

7–8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर।

10. जीरे की खेती से कितना मुनाफा होता है?

40–45 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक लाभ मिलता है।

किसान भाइयों के लिए प्रेरणादायक संदेश

जीरे की खेती भारत के किसानों के लिए कम लागत, ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल है। यदि किसान उन्नत तकनीक, सही किस्में, समय पर छिड़काव, सिंचाई और उचित रोग नियंत्रण अपनाएं, तो उपज 50% तक बढ़ सकती है।

सही जानकारी और आधुनिक कृषि तकनीक ही किसान का भविष्य बदल सकती है।
आप भी इसे अपनाएँ और अपनी खेती में नई प्रगति लाएँ।

👉 मसालों की खेती के बारे में और जानकारी के लिए देखें:
https://subsistencefarming.in/masalon-ki-kheti/