पराली के बदले गोबर की खाद योजना | यूपी सरकार की नई पहल

🌾 किसानों के लिए नई उम्मीद की किरण
उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों के लिए एक अनोखी योजना शुरू की है — “पराली दीजिए और बदले में गोबर की खाद लीजिए।”
यह योजना न केवल पर्यावरण की रक्षा करेगी, बल्कि किसानों को अतिरिक्त लाभ भी देगी।
हर साल पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण देश की बड़ी समस्या बन चुका है। धुआं न केवल वातावरण को प्रदूषित करता है, बल्कि खेतों की उर्वरता को भी घटा देता है। इस समस्या से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक पर्यावरण-अनुकूल समाधान खोजा है।
इस योजना के तहत किसानों से पराली लेकर गौशालाओं में उपयोग किया जाएगा — पशुओं के बिछावन और आहार के रूप में। इसके बदले में किसानों को जैविक गोबर की खाद दी जाएगी, जो उनके खेतों की उत्पादकता को बढ़ाएगी।
🌱 योजना का उद्देश्य
इस योजना का मुख्य उद्देश्य पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकना और किसानों को प्राकृतिक खाद का विकल्प देना है।
सरकार चाहती है कि किसान पराली को कचरा न समझें, बल्कि इसे एक उपयोगी संसाधन के रूप में देखें।
मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं:
- पराली जलाने की घटनाओं को कम करना
- पर्यावरण को प्रदूषण से बचाना
- पशुओं के लिए बिछावन और आहार की व्यवस्था करना
- किसानों को जैविक खाद (गोबर की खाद) उपलब्ध कराना
- गोशालाओं की कार्यक्षमता बढ़ाना
- किसानों को आधुनिक पशुपालन तकनीक से जोड़ना
🚜 योजना का संचालन कैसे होगा?
इस योजना को उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग द्वारा संचालित किया जा रहा है।
प्रक्रिया इस प्रकार होगी:
- किसान अपनी पराली नजदीकी गोशालाओं में देंगे।
- गोशालाओं में पराली का उपयोग पशुओं के बिछावन और चारे के रूप में किया जाएगा।
- गोशालाओं में जमा हुए गोबर से जैविक खाद तैयार की जाएगी।
- यह खाद किसानों को वापस दी जाएगी, ताकि वे अपने खेतों में इसका उपयोग कर सकें।
👉 इस प्रकार, किसान और सरकार दोनों को लाभ होगा – एक ओर प्रदूषण कम होगा, दूसरी ओर खेतों की उर्वरता बढ़ेगी।
🐄 गो आश्रय स्थलों की भूमिका
गोशालाएं इस योजना की रीढ़ हैं। सरकार ने उन्हें न केवल पराली संग्रह का केंद्र बनाया है, बल्कि गो काष्ठ (Cow-based wood substitute) जैसे पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों के उत्पादन केंद्र के रूप में भी विकसित किया जा रहा है।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि गोशालाओं में “गो काष्ठ – मोक्ष वटिका” उत्पादन के लिए मशीनें CSR फंड से लगाई जाएंगी।
यह गोबर से बने लकड़ी के विकल्प होंगे, जिनका उपयोग अंतिम संस्कार और अन्य धार्मिक कार्यों में किया जा सकेगा।
🧑🌾 किसानों को मिलने वाले प्रमुख लाभ
इस योजना से किसानों को अनेक लाभ मिलेंगे, जैसे:
1. पराली से अतिरिक्त आय
अब पराली जलाने के बजाय किसान उसे गोशालाओं को देकर बदले में खाद प्राप्त कर सकते हैं।
2. मुफ्त जैविक खाद
सरकार किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली गोबर की खाद देगी, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी।
3. प्रदूषण से राहत
पराली जलाने से निकलने वाले धुएं से वातावरण प्रदूषित होता है। इस योजना से यह समस्या घटेगी।
4. खेतों की उपज में वृद्धि
जैविक खाद से फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार होगा।
5. पशुपालन और कृषि का एकीकरण
किसान अब पशुपालन और खेती दोनों से लाभ कमा सकते हैं, क्योंकि दोनों गतिविधियाँ एक-दूसरे का समर्थन करेंगी।
💡 सरकार की अन्य पहलें इस योजना से जुड़ी
- दूध समितियों को सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं।
- किसानों को समय पर दूध का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।
- अन्य राज्यों में प्रशिक्षण और भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि किसान आधुनिक पशुपालन तकनीकों से जुड़ सकें।
🌏 पर्यावरण और समाज पर प्रभाव
यह योजना केवल किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए फायदेमंद है।
पराली जलाने से जो कार्बन उत्सर्जन होता था, वह अब काफी हद तक कम होगा।
साथ ही, जैविक खाद के उपयोग से मिट्टी की सेहत सुधरेगी और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी।
❓ FAQs: पराली और गोबर की खाद योजना से जुड़े सामान्य प्रश्न
1. इस योजना का नाम क्या है?
यह योजना “पराली दीजिए और बदले में गोबर की खाद लीजिए” के नाम से जानी जा रही है।
2. यह योजना किस राज्य में लागू की गई है?
यह योजना उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई है।
3. योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
मुख्य उद्देश्य पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकना और किसानों को जैविक खाद उपलब्ध कराना है।
4. इस योजना का संचालन कौन कर रहा है?
इस योजना का संचालन पशुपालन विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किया जा रहा है।
5. किसानों को इस योजना से क्या लाभ मिलेगा?
किसान अपनी पराली के बदले मुफ्त गोबर की खाद प्राप्त कर सकते हैं, जिससे उनकी मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी।
6. पराली का उपयोग कैसे किया जाएगा?
पराली का उपयोग गोशालाओं में पशुओं के बिछावन और आहार के रूप में किया जाएगा।
7. क्या किसानों को खाद खरीदनी पड़ेगी?
नहीं, किसानों को खाद बदले में मुफ्त दी जाएगी।
8. क्या इससे प्रदूषण कम होगा?
हाँ, पराली जलाने से निकलने वाला धुआं रुक जाएगा, जिससे वायु प्रदूषण में भारी कमी आएगी।
9. क्या यह योजना सभी जिलों में लागू होगी?
सरकार का उद्देश्य इसे संपूर्ण उत्तर प्रदेश में लागू करने का है, शुरुआत चयनित जिलों से की जाएगी।
10. क्या इस योजना से पशुपालन को भी बढ़ावा मिलेगा?
हाँ, गोशालाओं में पराली का उपयोग होने से पशुओं की देखभाल और गोबर के उपयोग दोनों में सुधार होगा।
🌿 निष्कर्ष: किसानों के लिए पर्यावरण और लाभ का संगम
उत्तर प्रदेश सरकार की यह योजना किसानों के लिए एक दोहरा लाभ लेकर आई है – एक ओर उन्हें पराली का उचित उपयोग और गोबर की खाद का लाभ मिलेगा, दूसरी ओर पर्यावरण को प्रदूषण से राहत मिलेगी।
👉 सरकार, किसान और समाज – तीनों मिलकर अगर इस पहल को अपनाएं, तो आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश स्वच्छ, हरित और समृद्ध कृषि राज्य के रूप में उभरेगा।
किसान भाइयों से अपील है कि वे पराली न जलाएं,
बल्कि इसे गोशालाओं में देकर अपने खेतों के लिए अमृत समान गोबर की खाद प्राप्त करें।
यह न केवल आपकी मिट्टी को उर्वर बनाएगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ वातावरण भी सुनिश्चित करेगा।
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