अमरूद की खेती | Amrud Ki Kheti

🌿 अमरूद की खेती: अधिक उपज और कम लागत से ज्यादा मुनाफा
अमरूद (Guava) एक ऐसा फल है जो हर वर्ग के लोगों में लोकप्रिय है। इसे “गरीबों का सेब” कहा जाता है क्योंकि यह सस्ता, पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक होता है। इसकी खेती भारत के लगभग सभी राज्यों में की जाती है। अमरूद का पौधा विपरीत परिस्थितियों में भी फल देता है और गर्मी तथा सूखे को सहन करने में सक्षम होता है।
अमरूद के फलों में प्रोटीन (1.5%), वसा (0.2%), कार्बोहाइड्रेट (14.5%), लवण (0.8%) और विटामिन C (299 mg/100g) की मात्रा होती है, जो सेब और संतरे से भी अधिक है। ताजे फल के अलावा इससे जेली, जूस, जैम और चीज बनाई जाती है।
🌱 भूमिका
भारत में अमरूद की खेती का आर्थिक और पोषणीय महत्व दोनों है। इसकी खेती में लागत कम और लाभ अधिक होता है। इस फल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह साल में दो बार फल देता है – बरसात और सर्दी के मौसम में। सर्दियों के फल स्वाद में अधिक मीठे और गुणवत्ता में श्रेष्ठ होते हैं।
🌾 अमरूद की उत्पत्ति और महत्व
अमरूद का वानस्पतिक नाम Psidium guajava है और यह Myrtaceae कुल का पौधा है। वैज्ञानिकों के अनुसार अमरूद की उत्पत्ति दक्षिण अमेरिका और वेस्ट इंडीज़ में हुई थी। 17वीं शताब्दी में इसे भारत में लाया गया। आज यह भारत में सबसे सफल फल फसलों में से एक है।
संस्कृत शब्द अमरुद्ध का अर्थ है “आम के प्रभाव को रोकने वाला फल”, और इसी से “अमरूद” शब्द बना है।
🌤️ भूमि और जलवायु
अमरूद सभी प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है, लेकिन गहरी बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
- पीएच मान: 6.0 से 6.5 आदर्श
- तापमान: 25°C से 35°C सबसे अच्छा
- वर्षा: 100-125 सेमी पर्याप्त
- पाला: छोटे पौधों को नुकसान पहुँचा सकता है, इसलिए ठंड से सुरक्षा जरूरी है।
अमरूद उष्ण और उपोष्ण जलवायु में बहुत अच्छा पनपता है। पूर्ण विकसित पेड़ 44°C तक का तापमान सहन कर लेते हैं।
🍃 अमरूद की प्रमुख किस्में (Varieties)
भारत में कई किस्में पाई जाती हैं, जिनमें से कुछ अत्यंत लोकप्रिय और उच्च उत्पादन वाली हैं।
🔸 प्रमुख किस्में
- इलाहाबादी सफेदा: सबसे प्रसिद्ध, मीठा स्वाद और बड़ी उपज।
- सरदार (लखनऊ-49): व्यावसायिक दृष्टि से उत्कृष्ट किस्म।
- इलाहाबादी सुरखा: लाल गूदे वाला आकर्षक फल।
- चित्तीदार, लालगूदा, बेदाना, हरिझा, केरला: स्थानीय स्तर पर उगाई जाने वाली किस्में।
- सेबनुमा अमरूद: आकार और स्वाद में खास।
🌱 पौध तैयार करने की विधि (Propagation)
अमरूद की पौध वानस्पतिक विधि से तैयार की जाती है क्योंकि बीज से बने पौधे मूल गुण खो देते हैं।
प्रमुख विधियाँ
- गूटी विधि: बिहार में प्रचलित, लेकिन पौधे कमजोर जड़ों वाले होते हैं।
- इनाचिंग (Inarching): मजबूत पौधे तैयार करने के लिए उपयुक्त।
- बडिंग और ग्राफ्टिंग: उच्च उत्पादन और गुणवत्ता के लिए सर्वश्रेष्ठ।
🌿 पौध रोपण (Plantation)
समय
- जून–जुलाई: मानसून के प्रारंभ में सर्वोत्तम।
- फरवरी–मार्च: जहाँ सिंचाई की सुविधा हो।
विधि
- खेत की 2–3 बार जुताई करके समतल करें।
- 6×6 मीटर की दूरी पर 60x60x60 सेमी के गड्ढे खोदें।
- प्रत्येक गड्ढे में डालें:
- 30 किलो गोबर की सड़ी खाद
- 1 किलो सिंगल सुपर फॉस्फेट
- 2 किलो लकड़ी की राख
- पौधा लगाने के बाद हल्की सिंचाई करें।
💧 सिंचाई (Irrigation)
अमरूद के पौधों को नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है।
- नए पौधे: हर 10–15 दिन पर।
- पूर्ण विकसित पौधे: ठंड में 2–3 बार सिंचाई पर्याप्त।
- फूल आने के समय सिंचाई से बचें।
सिंचाई के बाद पौधों के आस-पास की मिट्टी को हल्के हाथ से गुड़ाई करें ताकि खरपतवार हट जाएँ।
🌾 खाद एवं उर्वरक (Fertilizers)
| पौधे की आयु (वर्ष) | गोबर खाद (किग्रा) | नाइट्रोजन (ग्राम) | फास्फोरस (ग्राम) | पोटाश (ग्राम) |
|---|---|---|---|---|
| 1–2 | 10–15 | 60 | 30 | 30 |
| 3 | 20 | 120 | 60 | 60 |
| 4 | 30 | 180 | 90 | 90 |
| 5 | 40 | 240 | 120 | 120 |
| 6 | 50 | 300 | 150 | 150 |
| 7 और अधिक | 60 | 360 | 180 | 180 |
- नाइट्रोजन दो भागों में दें: आधी जून में और आधी अक्टूबर में।
- फास्फोरस और पोटाश अक्टूबर में दें।
- जिंक की कमी के लिए वर्ष में दो बार 0.5% जिंक सल्फेट का छिड़काव करें।
🌿 सधाई और छंटाई (Training & Pruning)
- शुरुआत में पौधों की सधाई करके 60 सेमी ऊँचाई तक मुख्य तना बनाएं।
- सूखी और रोगग्रस्त शाखाएँ हर वर्ष हटा दें।
- पुराने पेड़ों की हल्की छंटाई करने से नए फूल और फल आते हैं।
🪴 अन्तर्वर्ती फसलें (Intercropping)
अमरूद के बाग में शुरुआती वर्षों में किसान इन फसलों को उगा सकते हैं:
- केला, पपीता, टमाटर, बैंगन, मटर, मूँगफली।
यदि सिंचाई की सुविधा न हो तो दलहनी फसलें लगाएँ – ये मिट्टी को नाइट्रोजन भी प्रदान करती हैं।
🍈 अमरूद के फलने का समय और उपज
अमरूद साल में दो बार फल देता है:
- पहला प्रकार: जून–जुलाई में फूल, नवंबर–जनवरी में फल (उत्तम गुणवत्ता)।
- दूसरा प्रकार: फरवरी–मार्च में फूल, जुलाई–सितंबर में फल (कम गुणवत्ता)।
- तीसरा प्रकार: अक्टूबर–नवंबर में फूल, फरवरी–अप्रैल में फल (कम उपज)।
एक 8–10 वर्ष का पौधा प्रति वर्ष 2.0–2.5 क्विंटल तक फल दे सकता है।
🐛 कीट एवं रोग नियंत्रण (Pest & Disease Management)
🔸 प्रमुख कीट
- फलमक्खी: बरसात में फल के अंदर कीड़ा हो जाता है।
- रोकथाम: रोगर दवा का 0.05% घोल 10 दिन के अंतराल पर छिड़कें।
- छाल खाने वाली इल्ली: तनों में सुरंग बनाती है।
- रोकथाम: पेट्रोल में भीगी रुई को छेदों में भरें।
🔸 प्रमुख रोग
- उकठा रोग: शाखाएँ सूखने लगती हैं।
- नियंत्रण: रोगग्रस्त शाखाएँ काटें और मिट्टी में 1% नीला तूतिया घोल डालें।
- फल पर दाग: बरसात में फल पर धब्बे बनते हैं।
- नियंत्रण: कोसेन दवा (300 ग्राम/100 लीटर पानी) का छिड़काव करें।
🌸 फूलों के नियंत्रण की तकनीकें
सर्दियों में अधिक और स्वादिष्ट फल पाने के लिए बरसात के फूलों को नियंत्रित करना जरूरी है। इसके लिए निम्न विधियाँ अपनाई जाती हैं:
- सिंचाई रोकना: फरवरी से मई तक पानी न देने से पेड़ सुप्तावस्था में चला जाता है।
- जड़ों की मिट्टी हटाना: अप्रैल–मई में जड़ों के पास की मिट्टी हटा दें और 20–25 दिन बाद पुनः भरें।
- पेड़ों को झुकाना: अप्रैल–जून में शाखाएँ झुकाकर रस्सी से बाँध दें, 40–45 दिन बाद फूल आते हैं।
- फूल झाड़ना: अनावश्यक फूलों को हटाने के लिए NAA (1000 ppm) या यूरिया (10%) का छिड़काव करें।
🌿 खरपतवार नियंत्रण
नए पौधों के चारों ओर 10–15 दिन के अंतराल पर निराई-गुड़ाई करें। बड़े पौधों के लिए बरसात के बाद जुताई करें ताकि खरपतवार समाप्त हो जाएँ।
🧺 फलों की तुड़ाई और भंडारण
फूल आने के लगभग 120–140 दिन बाद फल पकते हैं। जब फल हल्के पीले रंग के हो जाएँ, तभी तोड़ें।
- बरसात की फसल जल्दी बेचें क्योंकि इसकी भंडारण क्षमता कम होती है।
- सर्दियों की फसल अधिक मीठी और टिकाऊ होती है।
❓ अमरूद की खेती से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. अमरूद की खेती के लिए सबसे अच्छी मिट्टी कौन-सी है?
गहरी बलुई दोमट मिट्टी जिसमें पानी निकासी अच्छी हो, सबसे उपयुक्त है।
2. अमरूद के पौधे कब लगाएँ?
जून–जुलाई में पौध लगाना सर्वोत्तम माना जाता है।
3. अमरूद के पौधों में कितनी दूरी रखनी चाहिए?
प्रत्येक पौधे के बीच 6×6 मीटर की दूरी रखें।
4. एक अमरूद के पेड़ से कितनी उपज मिलती है?
एक पूर्ण विकसित पेड़ से 2–2.5 क्विंटल तक फल मिल सकते हैं।
5. अमरूद की कौन-सी किस्म सबसे ज्यादा लोकप्रिय है?
इलाहाबादी सफेदा और लखनऊ-49 (सरदार) सबसे लोकप्रिय हैं।
6. अमरूद में कौन-कौन से रोग लगते हैं?
मुख्यतः उकठा रोग, फलमक्खी और फल पर दाग लगते हैं।
7. अमरूद के फलों में कीड़ा क्यों लगता है?
बरसात के मौसम में फलमक्खी के अंडे देने से कीड़े बनते हैं।
8. अमरूद की छंटाई कब करनी चाहिए?
फल तोड़ने के बाद सूखी और रोगग्रस्त शाखाएँ काटनी चाहिए।
9. अमरूद के लिए कितनी खाद देनी चाहिए?
7 वर्ष या अधिक उम्र के पौधे को 60 किलो गोबर खाद, 360 ग्राम नाइट्रोजन, 180 ग्राम फास्फोरस, और 180 ग्राम पोटाश दें।
10. अमरूद की खेती से कितना लाभ हो सकता है?
कम लागत में प्रति हेक्टेयर लाखों रुपये तक की आमदनी संभव है, यदि देखभाल, सिंचाई और रोग नियंत्रण सही तरीके से किया जाए।
🌾 निष्कर्ष
अमरूद की खेती भारत के किसानों के लिए एक सुनहरा अवसर है। यह फसल कम लागत में ज्यादा उत्पादन देती है और साल में दो बार फलने की क्षमता रखती है। अगर किसान सही किस्म, उचित खाद, सिंचाई और रोग नियंत्रण अपनाएँ, तो वे अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं।
👉 प्रेरणादायक संदेश:
“मेहनती किसान जब अमरूद की बागवानी करते हैं, तो न सिर्फ अपने खेत की मिट्टी को सोना बनाते हैं, बल्कि देश की फल उत्पादन शक्ति को भी बढ़ाते हैं। अमरूद लगाइए, स्वास्थ्य और संपन्नता दोनों पाइए!” 🌱🇮🇳
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👉 https://subsistencefarming.in/phalon-ki-kheti/
