किसानों के लिए आज की बड़ी खबरें | 17 अगस्त 2026

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🏛️ कृषि नीति और सरकार के बड़े फैसले

1️⃣ 🌱 बड़वानी में एसडी पद्धति से कपास की खेती को बढ़ावा, 5 हजार हेक्टेयर में प्रयोग

मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में कपास उत्पादन के लिए एसडी पद्धति को अपनाने की शुरुआत की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत जिले के किसानों से सीधे संवाद करते हुए इस आधुनिक खेती पद्धति के बारे में जानकारी ली। बातचीत के दौरान किसानों से कपास उत्पादन, सिंचाई व्यवस्था, कृषि आदानों की उपलब्धता और सरकारी योजनाओं से मिल रहे लाभ के बारे में जानकारी ली गई। किसानों ने बताया कि एसडी पद्धति अपनाने पर खाद की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम हो रही है और उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

किसानों के अनुसार शुरुआती चरण में करीब 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र में इस पद्धति को अपनाया गया है। बड़वानी कपास उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण जिला है और जिले के कृषि क्षेत्र के करीब एक-तिहाई हिस्से में कपास की खेती होती है। सरकार का कहना है कि किसानों की समस्याओं और सुझावों को सुनकर कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इस पद्धति से खेती की लागत नियंत्रित करने और किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिलने की संभावना बताई गई है।

2️⃣ 🚜 मध्य प्रदेश में इस साल खुलेंगे 1,000 कस्टम हायरिंग सेंटर, किसानों को मिलेंगे कृषि यंत्र किराए पर

मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों को आधुनिक कृषि मशीनरी आसानी से उपलब्ध कराने के लिए इस वर्ष 1,000 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इन केंद्रों के माध्यम से किसान ट्रैक्टर और अन्य कृषि यंत्र खरीदने के बजाय जरूरत के अनुसार किराए पर ले सकेंगे। इससे खेती में मशीनों का इस्तेमाल बढ़ाने के साथ कृषि कार्यों की लागत को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

योजना के तहत इच्छुक किसान और पात्र आवेदक कृषि यंत्र खरीदने के लिए बैंक ऋण के साथ सरकारी अनुदान का लाभ ले सकेंगे। कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने के लिए ट्रैक्टर और कृषि यंत्रों की खरीद लागत अधिकतम 25 लाख रुपये निर्धारित की गई है। चयनित आवेदकों को इस लागत का 40 प्रतिशत, अधिकतम 1 लाख रुपये तक अनुदान दिए जाने की जानकारी दी गई है।

इसके अलावा बैंक से लिए गए ऋण पर एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत 3 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी का लाभ भी बताया गया है। सरकार का उद्देश्य गांवों में कृषि मशीनरी की उपलब्धता बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर पैदा करना भी है।

3️⃣ 🍄 हरियाणा में मशरूम उत्पादन को बढ़ावा, किसानों को 40 से 50% तक अनुदान

हरियाणा सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए पारंपरिक फसलों के साथ बागवानी और मशरूम उत्पादन को भी प्रोत्साहित कर रही है। राज्य में सफेद बटन मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को मशरूम इकाइयां स्थापित करने पर 40 से 50 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार का जोर किसानों को खेती के अतिरिक्त आय के विकल्प उपलब्ध कराने पर है।

इसके अलावा अनुसूचित जाति के किसानों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए संचालित विशेष योजनाओं के तहत विभिन्न बागवानी गतिविधियों पर 85 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। राज्य सरकार बागवानी के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए नई बागवानी नीति तैयार कर रही है।

प्रस्तावित नीति के तहत संरक्षित खेती, एरोपोनिक्स, हाइड्रोपोनिक्स, ग्रीनहाउस और वर्टिकल फार्मिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने की योजना है। सरकार इस वर्ष करीब 1,000 एकड़ क्षेत्र को इन तकनीकों के दायरे में लाने का लक्ष्य रख रही है।

इसके साथ ही बागवानी उत्पादों की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने की दिशा में विभागीय ढांचे में बदलाव का प्रस्ताव है, ताकि किसान उत्पादन के साथ प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन से भी जुड़ सकें।

🌱 कृषि व्यवसाय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था

4️⃣ 🧵 ओडीओपी से बनारस के पारंपरिक कारीगरों को नई तकनीक और बाजार का सहारा

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट यानी ओडीओपी योजना के माध्यम से पारंपरिक कारीगरों और बुनकरों को तकनीक, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। योजना के तहत वाराणसी के तीन प्रमुख उत्पादों—बनारसी साड़ी, गुलाबी मीनाकारी और लकड़ी के खिलौनों—को शामिल किया गया है।

ओडीओपी योजना की शुरुआत 24 जनवरी 2018 को की गई थी। इसका उद्देश्य प्रत्येक जिले के विशेष उत्पादों को पहचान दिलाना और उनसे जुड़े कारीगरों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। वाराणसी के जगतपुर में स्थापित ओडीओपी कॉमन फैसिलिटी सेंटर बुनकरों के लिए महत्वपूर्ण सुविधा केंद्र बनकर सामने आया है।

यहां डिजिटल प्रिंटिंग, स्क्रीन प्रिंटिंग, ब्लॉक प्रिंटिंग, डाइंग और फिनिशिंग जैसी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे बुनकरों को अलग-अलग स्थानों पर जाने की आवश्यकता कम हुई है और समय तथा लागत दोनों की बचत हो रही है।

रिपोर्ट के अनुसार इस केंद्र की शुरुआत चार कर्मचारियों से हुई थी और अब यहां 70 से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। योजना के माध्यम से प्रशिक्षण और टूलकिट देकर युवाओं को पारंपरिक कारोबार से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।

5️⃣ 🌍 बनारसी साड़ी के निर्यात में करीब पांच गुना बढ़ोतरी, ओडीओपी से कारीगरों को बाजार

वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के तहत वाराणसी के पारंपरिक उत्पादों को देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। योजना के माध्यम से बनारसी साड़ी सहित अन्य स्थानीय उत्पादों की मार्केटिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ओडीओपी योजना लागू होने के बाद बनारसी साड़ी के निर्यात में करीब पांच गुना वृद्धि दर्ज की गई है।

कारीगरों को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उन्हें प्रशिक्षण, टूलकिट, आर्थिक सहायता और बाजार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। ओडीओपी के तहत आयोजित प्रदर्शनियों में भाग लेने वाले कारीगरों को स्टॉल, किराया, यात्रा और माल ढुलाई से संबंधित सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।

वाराणसी के कॉमन फैसिलिटी सेंटर में आधुनिक तकनीकों की सुविधाएं मिलने से बुनकरों को उत्पादन और फिनिशिंग से जुड़े कई काम एक ही स्थान पर करने में मदद मिल रही है। रिपोर्ट में कारीगरों द्वारा देश-विदेश से ऑर्डर मिलने की बात भी कही गई है।

सरकार का उद्देश्य पारंपरिक हुनर को आधुनिक बाजार की जरूरतों से जोड़ना है। इससे पुराने शिल्प को नई पहचान मिलने के साथ इससे जुड़े परिवारों के लिए रोजगार और आय के अवसर मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

🌦️ मौसम और वैश्विक कृषि संकट

6️⃣ 🌾 अलनीनो से दुनिया की प्रमुख फसलों पर बढ़ा मौसम का खतरा, चावल पर खास चिंता

अलनीनो की शुरुआत के बाद दुनिया की कई प्रमुख कृषि फसलों पर मौसम संबंधी जोखिम बढ़ने की जानकारी सामने आई है। चावल, गेहूं, कोको, पाम ऑयल, चीनी और रोबस्टा कॉफी जैसी फसलों पर मौसम में बदलाव का असर पड़ सकता है। हालांकि इसका प्रभाव सभी फसलों और सभी क्षेत्रों में समान नहीं होगा। इसका वास्तविक असर संबंधित फसल के उत्पादन क्षेत्र और वहां की मौसम परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

रिपोर्ट में चावल को विशेष चिंता वाली फसल बताया गया है। इसका कारण वैश्विक स्तर पर चावल का अतिरिक्त स्टॉक सीमित होना और उत्पादन तथा निर्यात में एशियाई देशों की बड़ी भूमिका है। एशिया के प्रमुख उत्पादक देशों में मौसम में बदलाव होने पर चावल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

भारत के लिए बढ़ा हुआ चावल भंडार कुछ राहत देने वाला कारक बताया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत का चावल भंडार 2023-24 में कुल खपत के 30.1 प्रतिशत के बराबर था, जबकि 2026 में इसके 42.2 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान बताया गया है।

इस बढ़े हुए स्टॉक के कारण भारत को चावल निर्यात पर अचानक प्रतिबंध लगाने से बचने में मदद मिलने की संभावना व्यक्त की गई है।

7️⃣ 🍚 भारत में चावल का भंडार बढ़ा, वैश्विक मौसम जोखिम के बीच मिली राहत

वैश्विक स्तर पर अलनीनो से कृषि उत्पादन पर संभावित असर की चर्चा के बीच भारत के बढ़े हुए चावल भंडार को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में चावल का स्टॉक 2023-24 में कुल घरेलू खपत के लगभग 30.1 प्रतिशत के बराबर था। वर्ष 2026 में यह अनुपात बढ़कर अनुमानित 42.2 प्रतिशत होने की बात कही गई है।

विश्लेषण के अनुसार पर्याप्त भंडार होने से मौसम संबंधी जोखिम बढ़ने की स्थिति में भारत के पास घरेलू जरूरतों को संभालने के लिए अधिक स्टॉक उपलब्ध रहेगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बढ़ा हुआ भंडार भारत को चावल के निर्यात पर अचानक प्रतिबंध लगाने से बचाने में मदद कर सकता है।

2023-24 में चावल की कीमतों में तेजी का कारण केवल फसल नुकसान नहीं था। रिपोर्ट के अनुसार भारत सहित कुछ देशों द्वारा पहले लगाए गए निर्यात प्रतिबंध भी कीमतों में बढ़ोतरी का प्रमुख कारण रहे थे।

इस बार बेहतर स्टॉक स्थिति के कारण वैसी स्थिति बनने की संभावना कम बताई गई है। हालांकि वैश्विक कृषि बाजार पर अलनीनो का असर उत्पादन क्षेत्रों और स्थानीय मौसम परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इसलिए आने वाले समय में चावल सहित अन्य प्रमुख खाद्य फसलों पर मौसम के प्रभाव पर नजर रखना महत्वपूर्ण रहेगा।

🏛️ राज्य सरकारों के कृषि फैसले

8️⃣ 🚜 महाराष्ट्र में किसानों की कर्जमाफी और मुफ्त बिजली का दावा, पानी योजना पर भी जोर

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने कहा है कि राज्य सरकार ने 2024 विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए प्रमुख वादों को पूरा कर दिया है। इनमें किसानों की कर्जमाफी और मुफ्त बिजली से जुड़ा वादा भी शामिल बताया गया है। मुख्यमंत्री ने यह बात जालना एमआईडीसी में भाजपा कार्यालय के भूमि पूजन कार्यक्रम के दौरान कही।

मुख्यमंत्री ने किसानों के हित में सरकार द्वारा लगातार काम किए जाने की बात कही। साथ ही उन्होंने पिछली सरकार पर चुनावी वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया। समाचार में मुख्यमंत्री द्वारा महिलाओं के लिए संचालित लाडकी बहन योजना को बंद नहीं किए जाने की बात भी कही गई है।

इसके अलावा मराठवाड़ा क्षेत्र में पानी की समस्या को कम करने के लिए पश्चिमी महाराष्ट्र के अतिरिक्त बाढ़ के पानी को मराठवाड़ा की ओर ले जाने की योजना पर काम करने की जानकारी दी गई है।

मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि इस योजना से सूखा प्रभावित मराठवाड़ा में पानी की समस्या कम करने में सहायता मिलेगी और भविष्य की पीढ़ियों को पानी की कमी का सामना कम करना पड़ेगा। यह योजना राज्य के जल प्रबंधन और सूखा प्रभावित क्षेत्रों की जरूरतों से जुड़ी हुई है।

💧 जल, गांव और ग्रामीण विकास

9️⃣ 🌧️ कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, किसानों को जलभराव से सतर्क रहने की सलाह

देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय बना हुआ है और मौसम विभाग ने कई राज्यों में भारी बारिश की संभावना जताई है। अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल के गंगा तटीय क्षेत्रों के लिए भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, झारखंड, कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में अगले दो से तीन दिनों के दौरान भारी बारिश की संभावना बताई गई है। पूर्वोत्तर क्षेत्र में 21 अगस्त तक मौसम की ऐसी स्थिति बने रहने का अनुमान है।

इसके अलावा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, पुदुचेरी, कराईकल, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, तेलंगाना, बिहार तथा विदर्भ में अगले तीन से चार दिनों के दौरान गरज-चमक, बिजली और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है।

कृषि के लिहाज से लगातार बारिश के दौरान खेतों में जलभराव से बचाव महत्वपूर्ण है। धान को छोड़कर कई फसलों में अतिरिक्त पानी नुकसान पहुंचा सकता है। बारिश की स्थिति को देखते हुए खेतों में जल निकासी की व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है।

🔟 🌊 असम में बाढ़ का असर घटा, फिर भी 62 हजार से अधिक लोग प्रभावित

असम में बाढ़ की स्थिति में कुछ सुधार दर्ज किया गया है। बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या घटकर करीब 62 हजार रह गई है और प्रभावित जिलों की संख्या भी कम होकर पांच बताई गई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार गोलाघाट, होजाई, नगांव, शिवसागर और जोरहाट जिलों के 16 राजस्व मंडल और 235 गांव अभी भी बाढ़ की चपेट में हैं।

कुल 62,443 लोग प्रभावित बताए गए हैं। इनमें सबसे अधिक प्रभावित लोगों की संख्या नगांव जिले में बताई गई है। विस्थापित लोगों के लिए 28 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां 4,800 से अधिक लोगों ने शरण ली है। इसके अलावा नौ राहत सामग्री वितरण केंद्र भी चलाए जा रहे हैं।

कृषि क्षेत्र के लिए स्थिति अभी भी चिंता का विषय है। राज्य में लगभग 4,954.43 हेक्टेयर फसल क्षेत्र पानी में डूबा हुआ बताया गया है। पिछले 24 घंटों में बाढ़ के कारण किसी नई मौत की सूचना नहीं मिली है और इस वर्ष बाढ़ से मरने वालों की संख्या 104 पर बनी हुई है।

प्रशासन प्रभावित इलाकों में राहत व्यवस्था बनाए हुए है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

1️⃣1️⃣ ⛰️ अरुणाचल प्रदेश में भूस्खलन से तीन लोगों की मौत, मलबे में दबे व्यक्ति की तलाश जारी

अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसरी क्षेत्र में भारी बारिश के बीच भूस्खलन की घटना में तीन लोगों की मौत हो गई। एक अन्य व्यक्ति के मलबे में दबे होने की आशंका जताई गई है। राहत और बचाव दल लापता व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं।

घटना में घायल एक व्यक्ति को डिपोरीजो अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका उपचार चल रहा है। लगातार बारिश और जमीन के अस्थिर होने के कारण राहत एवं बचाव कार्य में कठिनाइयां सामने आ रही हैं।

भूस्खलन की घटना ऐसे समय हुई है जब क्षेत्र में भारी बारिश जारी है। इससे पहाड़ी और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा बढ़ गया है। राहतकर्मी मलबे में दबे व्यक्ति की तलाश कर रहे हैं और प्रभावित क्षेत्र में बचाव कार्य जारी है।

समाचार में मृतकों और घायल व्यक्ति की जानकारी भी दी गई है। प्रशासन और राहत दल लगातार स्थिति पर नजर रख रहे हैं। भारी बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए स्थानीय लोगों को प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करना जरूरी है।

1️⃣2️⃣ 🌊 ओडिशा के कई जिलों में बाढ़ गंभीर, 95 हजार से ज्यादा लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए

ओडिशा के कई जिलों में लगातार भारी बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य सरकार ने निचले इलाकों से 95,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। रिपोर्ट के अनुसार कई प्रभावित जिलों के 52 प्रखंडों और 503 गांवों में करीब 2.70 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।

बैतरणी, ब्राह्मणी, जालका और अन्य नदियों तथा उनकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ने से जनजीवन प्रभावित हुआ है। प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्यों को तेज कर दिया है। कुल 95,206 लोगों को 226 राहत शिविरों में पहुंचाया गया है।

इन राहत शिविरों में पका हुआ भोजन, सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता, रोशनी और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। राज्य प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में बचाव, राहत और आपातकालीन कार्यों के लिए 118 प्रतिक्रिया दल तैनात किए हैं।

मयूरभंज, बालासोर, भद्रक, जाजपुर और क्योंझड़ जिलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। लगातार बारिश के कारण कृषि क्षेत्र पर भी असर पड़ने की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन द्वारा निचले और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत गतिविधियां जारी रखी गई हैं।

🚜 आज की राज्यवार खेती सलाह

1️⃣3️⃣ 🌾 पंजाब-हरियाणा के किसानों के लिए बारिश के बीच जरूरी खेती सलाह

पंजाब और हरियाणा के किसानों के लिए बारिश और मौसम को ध्यान में रखते हुए विभिन्न फसलों के प्रबंधन की सलाह दी गई है। पंजाब के पश्चिमी क्षेत्रों में खेत की स्थिति अनुकूल होने पर खरीफ प्याज की बुवाई या रोपाई की जा सकती है। बारिश के बाद खेत की मेड़ों से खरपतवार हटाने और उचित जल निकासी बनाए रखने की सलाह दी गई है।

पश्चिमी पंजाब के मैदानी क्षेत्रों में धान की रोपाई वाले खेतों में उचित जल स्तर बनाए रखने और बारिश की संभावना होने पर अतिरिक्त सिंचाई न करने की सलाह है। अमरूद में फल मक्खी की निगरानी करने को कहा गया है।

पंजाब के कुछ क्षेत्रों में फूलगोभी की रोपाई तथा गाजर और मूली की बुवाई की जा सकती है। मौसम साफ रहने पर सोयाबीन और मूंगफली में निराई-गुड़ाई करने की सलाह दी गई है। मक्के में जलभराव से बचाव जरूरी बताया गया है।

मध्य पंजाब में गन्ने और मक्के के खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने तथा मिर्च में सूखने और फल सड़ने की समस्या पर निगरानी रखने को कहा गया है। हरियाणा में धान और कपास में कीटों तथा सब्जियों में चूसक कीटों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

🥦 फसल, बुवाई और कीट प्रबंधन

1️⃣4️⃣ 🥕 मूली की पूसा चेतकी किस्म की बुवाई का सही समय, 40-45 दिन में तैयार फसल

मूली की पूसा चेतकी किस्म की बुवाई के लिए यह समय अनुकूल बताया गया है। इसकी बुवाई मध्य अप्रैल से अगस्त तक की जा सकती है और इसे पूरे भारत में उगाया जा सकता है। एक हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी उपज 250 क्विंटल तक बताई गई है।

पूसा चेतकी मूली नरम और खाने में अपेक्षाकृत कम तीखी होती है। इसकी जड़ें लंबी और मोटी होती हैं तथा इसकी लंबाई करीब 15 से 22 सेंटीमीटर बताई गई है। बुवाई के लगभग 40 से 45 दिनों में फसल तैयार हो सकती है।

एक हेक्टेयर के लिए करीब 9 से 12 किलोग्राम बीज पर्याप्त बताया गया है। बुवाई के दौरान कतार से कतार की दूरी 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर रखने की सलाह दी गई है।

बुवाई से पहले खेत की अच्छी जुताई करके उसे समतल करने और खरपतवार पूरी तरह हटाने की जरूरत है। फसल में 6 से 7 दिन के अंतराल पर सिंचाई करने की सलाह दी गई है। हालांकि बारिश वाले क्षेत्रों में खेत की नमी और मौसम के अनुसार पानी का प्रबंधन करना जरूरी रहेगा।

1️⃣5️⃣ 🌿 मूली में चेपा नियंत्रण के लिए पहले नीम आधारित उपाय अपनाएं

मूली की पूसा चेतकी किस्म की खेती में चेपा यानी एफिड की समस्या पर किसानों को नियमित निगरानी रखने की सलाह दी गई है। फसल में कीट दिखाई देने पर तुरंत रासायनिक दवाओं का उपयोग करने के बजाय पहले नीम के घोल या नीम के तेल का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

यदि नीम आधारित उपायों से समस्या नियंत्रित नहीं होती, तभी रासायनिक दवाओं के इस्तेमाल पर विचार करने को कहा गया है। दवाओं का छिड़काव विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही करने पर जोर दिया गया है।

मूली की अच्छी फसल के लिए बुवाई से पहले खेत को अच्छी तरह तैयार करना भी जरूरी है। खेत की जुताई करके उसे समतल करने और खरपतवार हटाने की सलाह दी गई है। एक हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 9 से 12 किलोग्राम बीज पर्याप्त बताया गया है।

बुवाई के बाद करीब 6 से 7 दिन के अंतराल पर सिंचाई की व्यवस्था रखने को कहा गया है। हालांकि बारिश की स्थिति में खेत में अतिरिक्त पानी जमा नहीं होने देना जरूरी है। फसल की नियमित निगरानी करने से चेपा सहित अन्य समस्याओं का समय पर पता लगाया जा सकता है।

💳 सरकारी योजनाएं और वित्तीय समावेशन

1️⃣6️⃣ 🏦 प्रधानमंत्री जनधन योजना के 12 साल पूरे होने वाले, 58.90 करोड़ से अधिक खाते खुले

प्रधानमंत्री जनधन योजना के 12 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। योजना की शुरुआत 28 अगस्त 2014 को उन लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से की गई थी, जो औपचारिक बैंकिंग सेवाओं से बाहर थे। योजना को मिशन मोड में शुरू किया गया था और इसका उद्देश्य प्रत्येक परिवार में कम से कम एक बैंक खाता सुनिश्चित करना था।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अब तक 58.90 करोड़ से अधिक जनधन खाते खोले जा चुके हैं। इन खातों में करीब 3.10 लाख करोड़ रुपये जमा होने की जानकारी दी गई है। कुल खातों में लगभग 77.8 प्रतिशत खाते ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में हैं, जबकि करीब 56 प्रतिशत खाते महिलाओं के नाम हैं।

रिपोर्ट के अनुसार देश के 99.92 प्रतिशत आबाद गांवों में पांच किलोमीटर के भीतर बैंकिंग आउटलेट उपलब्ध है। जनधन योजना ने बैंकिंग पहुंच के साथ आधार, यूपीआई और डिजिटल लेनदेन के विस्तार के लिए भी आधार तैयार किया है।

योजना का विस्तार गांवों तक होने के कारण सरकारी योजनाओं के लाभ को सीधे बैंक खातों तक पहुंचाने में भी मदद मिली है। वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में इसे एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

1️⃣7️⃣ 💰 जनधन खातों से डीबीटी को मिला आधार, बीमा और पेंशन सेवाओं तक भी पहुंच

प्रधानमंत्री जनधन योजना ने बैंक खाते खोलने के साथ लोगों को विभिन्न वित्तीय सेवाओं से जोड़ने का रास्ता भी तैयार किया है। योजना के तहत पात्र खाताधारकों को रुपे डेबिट कार्ड, दुर्घटना बीमा कवर और 10,000 रुपये तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है।

जनधन खाते बीमा, पेंशन, मुद्रा और अन्य वित्तीय सेवाओं से जुड़ने का माध्यम भी बने हैं। योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी है। इसके माध्यम से सरकारी योजनाओं की राशि सीधे पात्र लाभार्थियों के बैंक खाते में भेजी जा सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार शुरुआती दौर में कई जनधन खातों में लेनदेन नहीं होता था और जीरो बैलेंस खातों की संख्या भी अधिक थी। बाद के वर्षों में ऐसी स्थिति में कमी आने की जानकारी दी गई है।

योजना के तहत ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में खाते खोले गए हैं तथा महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय बताई गई है। इससे बैंकिंग सेवाओं की पहुंच गांवों तक बढ़ाने में मदद मिली है।

किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए बैंक खाता सरकारी सहायता, वित्तीय सेवाओं और डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जुड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।

🏛️ राष्ट्रीय और सामाजिक खबरें

1️⃣8️⃣ 🇮🇳 पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर देश ने दी श्रद्धांजलि

पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर देश ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री सहित कई नेताओं ने उन्हें याद किया और श्रद्धासुमन अर्पित किए।

अटल बिहारी वाजपेयी देश के पूर्व प्रधानमंत्री रहे और भारतीय राजनीति में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर राष्ट्रीय स्तर पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के कार्यक्रम आयोजित किए गए।

वाजपेयी की पहचान एक प्रमुख राजनेता और पूर्व प्रधानमंत्री के रूप में रही। देश के राजनीतिक इतिहास में उनका कार्यकाल महत्वपूर्ण माना जाता है। पुण्यतिथि के अवसर पर नेताओं ने उनके योगदान और सार्वजनिक जीवन को याद किया।

समाचार सामग्री में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री सहित कई प्रमुख नेताओं द्वारा श्रद्धांजलि दिए जाने की जानकारी दी गई है।

यह खबर मुख्य रूप से राष्ट्रीय स्मरण और श्रद्धांजलि से संबंधित है। किसानों और कृषि क्षेत्र से इसका सीधा संबंध समाचार सामग्री में नहीं बताया गया है। हालांकि ग्रामीण और कृषि क्षेत्र से जुड़े पाठकों के लिए राष्ट्रीय घटनाक्रमों की जानकारी के लिहाज से यह प्रमुख राष्ट्रीय खबरों में शामिल है।

1️⃣9️⃣ ⚖️ वंदे मातरम विवाद पर भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना, माफी की मांग

वंदे मातरम के कथित अपमान को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर राजनीतिक हमला किया है। भाजपा ने कांग्रेस को लेकर कड़े आरोप लगाए और राहुल गांधी तथा सोनिया गांधी से माफी मांगने की मांग की।

समाचार सामग्री के अनुसार भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए हैं। भाजपा की ओर से कांग्रेस को लेकर आपत्तिजनक राजनीतिक टिप्पणी भी की गई है। विवाद का केंद्र वंदे मातरम से जुड़ा कथित अपमान बताया गया है।

इस मुद्दे को लेकर भाजपा ने कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। उपलब्ध समाचार सामग्री में कांग्रेस की ओर से इस आरोप के जवाब का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।

इसलिए खबर में उपलब्ध जानकारी के आधार पर मुख्य तथ्य यही हैं कि वंदे मातरम के कथित अपमान को लेकर भाजपा ने कांग्रेस को निशाना बनाया और राहुल गांधी तथा सोनिया गांधी से माफी मांगने की मांग की।

यह घटनाक्रम राजनीतिक विवाद से जुड़ा है और इसका कृषि या किसान नीति से सीधा संबंध उपलब्ध सामग्री में नहीं बताया गया है।

2️⃣0️⃣ 🎓 झारखंड में छात्र आंदोलन तेज, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग

झारखंड में आंदोलन कर रहे छात्रों ने राज्य सरकार के खिलाफ अपना विरोध तेज करने की घोषणा की है। समाचार के अनुसार आंदोलनकारी छात्र मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

छात्रों ने राज्य के सभी जिलों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुतले जलाने का कार्यक्रम घोषित किया है। इससे राज्य में छात्र आंदोलन के आगे बढ़ने की जानकारी सामने आती है।

उपलब्ध समाचार सामग्री में छात्रों के आंदोलन के विस्तृत कारणों या उनकी सभी मांगों का विस्तार से उल्लेख नहीं किया गया है। इसलिए इस खबर में केवल आंदोलनकारियों द्वारा मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग और प्रस्तावित विरोध कार्यक्रम से संबंधित जानकारी शामिल की जा रही है।

राज्य के सभी जिलों में विरोध प्रदर्शन किए जाने की घोषणा से आंदोलन का दायरा व्यापक होने की बात सामने आती है। आगे की स्थिति आंदोलनकारियों और सरकार के बीच होने वाले संवाद तथा प्रशासन की कार्रवाई पर निर्भर करेगी।

यह खबर फिलहाल राज्य की राजनीतिक और छात्र गतिविधियों से संबंधित है।

2️⃣1️⃣ 🏥 पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत योजना शुरू, 3.5 करोड़ लोगों को लाभ मिलने का दावा

पश्चिम बंगाल में आयुष्मान दिवस के अवसर पर आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में करीब 3.5 करोड़ लोगों को इस योजना का लाभ मिलने की बात कही गई है।

पात्र लाभार्थियों को पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिलने का उल्लेख किया गया है। योजना का उद्देश्य पात्र परिवारों को स्वास्थ्य संबंधी खर्च से आर्थिक राहत उपलब्ध कराना है।

पश्चिम बंगाल में योजना की शुरुआत को राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा महत्वपूर्ण घटनाक्रम बताया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले पात्र परिवारों के लिए सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी और उपलब्धता विशेष महत्व रखती है।

समाचार में योजना के तहत लाभार्थियों की अनुमानित संख्या करीब 3.5 करोड़ बताई गई है और पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा का उल्लेख है।

इस खबर में योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया, पात्रता की विस्तृत शर्तें या अस्पतालों की सूची उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसलिए पाठकों को इस खबर से केवल योजना की शुरुआत और बताए गए लाभ की जानकारी मिलती है।

2️⃣2️⃣ 🕯️ रामपुरहाट में पूर्व विधायक आशीष बनर्जी मृत पाए गए, सुसाइड नोट मिलने की जानकारी

पश्चिम बंगाल के रामपुरहाट में टीएमसी के पूर्व विधायक और पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी पार्टी कार्यालय में फंदे से लटके हुए पाए गए। समाचार के अनुसार घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि कथित सुसाइड नोट में उन्होंने अपनी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं बताया। घटना की जानकारी सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आया है।

आशीष बनर्जी पश्चिम बंगाल की राजनीति में पूर्व विधायक और पूर्व डिप्टी स्पीकर के रूप में कार्य कर चुके थे। घटना के संबंध में उपलब्ध सामग्री में पुलिस जांच या आगे की कानूनी कार्रवाई का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।

इसलिए खबर में उपलब्ध जानकारी के आधार पर केवल घटना, मृत पाए जाने की स्थिति और सुसाइड नोट मिलने की बात शामिल की जा रही है।

किसी भी आत्महत्या से जुड़ी घटना की रिपोर्टिंग में तथ्यों और आधिकारिक जांच के निष्कर्षों का इंतजार करना महत्वपूर्ण होता है। उपलब्ध समाचार सामग्री में इससे आगे की जांच का विस्तृत परिणाम नहीं दिया गया है।

2️⃣3️⃣ 🚔 चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों में टकराव, लोक भवन की ओर मार्च

चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर कौमी इंसाफ मोर्चा के प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति सामने आई। प्रदर्शनकारी बंदी सिखों की रिहाई सहित विभिन्न मांगों को लेकर पंजाब के राज्यपाल के आवास लोक भवन की ओर मार्च कर रहे थे।

प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर मार्च का आयोजन किया था। इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ। समाचार सामग्री में प्रदर्शन के दौरान पैदा हुई स्थिति और पुलिस के साथ हुई झड़प की जानकारी दी गई है।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में बंदी सिखों की रिहाई सहित अन्य मुद्दे शामिल बताए गए हैं। वे अपनी मांगों को लेकर राज्यपाल के आवास की ओर बढ़ रहे थे।

उपलब्ध सामग्री में इस घटना के बाद पुलिस की विस्तृत कार्रवाई, गिरफ्तारियों की संख्या या प्रशासन के अगले कदमों की जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए खबर में केवल प्रदर्शन और टकराव से संबंधित उपलब्ध तथ्य शामिल किए गए हैं।

घटना चंडीगढ़-मोहाली सीमा क्षेत्र में हुई और इसका संबंध प्रदर्शनकारियों द्वारा अपनी मांगों को लेकर किए जा रहे आंदोलन से है।

2️⃣4️⃣ 🚌 दिल्ली में महिलाओं के कागजी पिंक बस टिकट की सुविधा 31 अगस्त तक बढ़ी

दिल्ली सरकार ने डीटीसी और क्लस्टर बसों में महिलाओं के लिए कागजी पिंक टिकट की सुविधा 31 अगस्त तक बढ़ा दी है। इस फैसले के बाद मुफ्त बस यात्रा की पात्र महिलाएं निर्धारित अवधि तक कागजी टिकट का इस्तेमाल कर सकेंगी।

महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की सुविधा के तहत पिंक टिकट व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता है। सरकार ने कागजी टिकट की सुविधा की अवधि बढ़ाकर 31 अगस्त तक कर दी है।

इसका लाभ उन महिलाओं को मिलेगा जो दिल्ली की डीटीसी और क्लस्टर बसों में मुफ्त यात्रा के लिए पात्र हैं। समाचार में बताया गया है कि पहले उपलब्ध कागजी टिकट व्यवस्था को अब 31 अगस्त तक जारी रखा जाएगा।

यह सुविधा दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन से जुड़ी महिलाओं के लिए है और विशेष रूप से उन यात्रियों के लिए उपयोगी है जो इस अवधि में मुफ्त यात्रा की पात्र हैं।

उपलब्ध समाचार सामग्री में इसके आगे की अवधि या 31 अगस्त के बाद टिकट व्यवस्था में संभावित बदलाव की जानकारी नहीं दी गई है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार पात्र महिलाएं 31 अगस्त तक कागजी पिंक टिकट का इस्तेमाल कर सकती हैं।



📌 स्रोत: DD Kisan