किसानों के लिए आज की बड़ी खबरें | 19 अगस्त 2026

🏛️ कृषि नीति और सरकार के बड़े फैसले
1️⃣ 🚜 राजस्थान में खेती को खेत से ग्लोबल बाजार तक ले जाने की तैयारी
राजस्थान के बारा और झालावाड़ क्षेत्र में कृषि विकास को नई दिशा देने के लिए व्यापक कृषि रोडमैप तैयार करने की घोषणा की गई है। केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वैज्ञानिकों की मदद से क्षेत्र की कृषि संभावनाओं का अध्ययन कराया जाएगा। इसमें नई फसलों की पहचान से लेकर उत्पादन, प्रसंस्करण, मार्केटिंग और निर्यात तक पूरी मूल्य श्रृंखला विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा। उद्देश्य यह है कि किसानों को केवल कच्चे कृषि उत्पाद बेचने तक सीमित न रहना पड़े और प्रसंस्करण तथा बेहतर बाजार से उन्हें अधिक मूल्य मिल सके। राज्य सरकार के सहयोग से बारा और झालावाड़ समेत राजस्थान की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। वैज्ञानिक तकनीक और आधुनिक कृषि पद्धतियों को खेती से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में काम करने की बात कही गई है।
2️⃣ 🏠 राजस्थान में 2.89 लाख ग्रामीण परिवारों के लिए पक्के मकानों की मंजूरी
राजस्थान में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत 2,89,355 मकानों को मंजूरी दी गई है। इन मकानों के लिए 3,473 करोड़ रुपये की परियोजना राशि स्वीकृत की गई है। इसके साथ कृषि विकास और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना से संबंधित गतिविधियों के लिए 340.59 करोड़ रुपये की मंजूरी भी दी गई। कार्यक्रम में बताया गया कि नए संभावित लाभार्थियों का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और पात्र लोगों के भौतिक सत्यापन के बाद आगे मकानों की मंजूरी दी जाएगी। लाभार्थियों की सूची पंचायत और जिला स्तर पर पारदर्शी तरीके से प्रदर्शित करने तथा पात्र परिवारों को गलत तरीके से लाभ से बाहर न करने पर जोर दिया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में आवास सुविधा बढ़ाने के साथ कृषि विकास के लिए भी धन उपलब्ध कराने की बात सामने आई है।
3️⃣ 🏡 PMAY-G में बदलाव: छोटे किसान और कुछ दोपहिया मालिक भी पात्र होंगे
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता से जुड़े नियमों में कुछ बदलावों की घोषणा की गई है। अब दोपहिया वाहन रखने वाले परिवार भी पक्के मकान की सहायता के लिए पात्र हो सकेंगे, जबकि पहले इस आधार पर पात्रता प्रभावित होती थी। महिलाओं की मासिक आय की सीमा भी बढ़ाई गई है। पहले 10,000 रुपये तक की मासिक आय वाली महिलाओं के लिए सीमा थी, जिसे बढ़ाकर 15,000 रुपये किया गया है। इसके अलावा छोटे किसान, जिनके पास अधिकतम 5 एकड़ असिंचित या 2.5 एकड़ सिंचित भूमि है, उन्हें भी आवास सहायता की पात्रता में शामिल किया गया है। इन बदलावों का उद्देश्य पात्र ग्रामीण परिवारों तक आवास योजना का लाभ पहुंचाना है। लाभार्थियों के चयन में भौतिक सत्यापन और पारदर्शी सूची की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है।
4️⃣ 👩🌾 राजस्थान में लखपति दीदी का लक्ष्य 16 लाख से बढ़ाकर 32 लाख
राजस्थान में लखपति दीदी अभियान को और विस्तार देने का लक्ष्य रखा गया है। बताया गया कि राज्य में अब तक 16 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं और इस संख्या को बढ़ाकर 32 लाख करने का लक्ष्य रखा गया है। ग्रामीण महिलाओं को आजीविका और छोटे व्यवसायों से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। महिलाओं को अलग-अलग बैंकों के माध्यम से कारोबार और रोजगार गतिविधियों के लिए 13,400 करोड़ रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध कराए जाने की जानकारी दी गई। लखपति दीदी अभियान का उद्देश्य महिलाओं को नियमित और बेहतर आय के अवसर उपलब्ध कराना है। सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आर्थिक भागीदारी बढ़ाने को प्राथमिकता बताया है। इस अभियान के विस्तार से स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिला उद्यमिता से जुड़ी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
5️⃣ 🌾 किसानों को ₹266 में यूरिया, नकली खाद-बीज पर सख्त कानून की तैयारी
किसानों को उर्वरक की बढ़ती लागत से राहत देने के लिए यूरिया की उपलब्धता पर सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया है। बताया गया कि यूरिया की वास्तविक लागत लगभग 3,000 रुपये प्रति बोरी होने के बावजूद किसानों को यह करीब 266 रुपये प्रति बोरी की दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की बात कही गई है। नकली कीटनाशक और घटिया बीजों की समस्या से निपटने के लिए मौजूदा कानूनी व्यवस्था को मजबूत करने की घोषणा भी की गई। इसके लिए कीटनाशक और बीज से संबंधित नए कानून लाने की तैयारी बताई गई है। प्रस्तावित व्यवस्था में नकली कृषि इनपुट बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और किसानों को बेहतर सुरक्षा देने पर जोर रहेगा। किसानों के लिए गुणवत्तापूर्ण खाद, बीज और कीटनाशक उपलब्ध कराना इसका प्रमुख उद्देश्य बताया गया है।
👩🌾 सरकारी योजनाएं और महिला सशक्तिकरण
6️⃣ 💰 महिलाओं को कारोबार के लिए ₹13,461 करोड़ से अधिक की बैंकिंग सहायता
राजस्थान में ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए बैंकों के माध्यम से बड़ी राशि उपलब्ध कराए जाने की जानकारी दी गई है। कार्यक्रम में बताया गया कि अलग-अलग बैंकों से महिलाओं को काम-धंधे और आजीविका गतिविधियों के लिए 13,461 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है। यह सहायता ग्रामीण महिलाओं को स्वयं के रोजगार और आय के साधन विकसित करने में मदद करने के उद्देश्य से दी जा रही है। सरकार का लखपति दीदी अभियान भी इसी दिशा में काम कर रहा है, जिसके तहत महिलाओं की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर है। राजस्थान में लखपति दीदियों की संख्या 16 लाख से बढ़ाकर 32 लाख करने का लक्ष्य घोषित किया गया है। इससे स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने की योजना है।
7️⃣ 💳 कटिहार में ₹50 करोड़ के कृषि और ग्रामीण ऋण स्वीकृत
कटिहार में आयोजित कृषि क्रेडिट आउटरीच कार्यक्रम में कुल 50 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए गए और 30 करोड़ रुपये के ऋण सीधे लाभार्थियों को वितरित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों, जीविका समूहों, ग्रामीण उद्यमियों और विभिन्न सरकारी योजनाओं के पात्र लोगों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाना था। पीएम सूर्यघर, पीएम विश्वकर्मा, पीएम एफएमई, नारी शक्ति लखपति दीदी और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना से जुड़े 14 चयनित लाभार्थियों को सांकेतिक चेक दिए गए। कार्यक्रम में किसानों और जीविका समूहों की महिलाओं ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। वक्ताओं ने महिला आर्थिक आत्मनिर्भरता को ग्रामीण विकास से जोड़ते हुए सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की अपील की। कार्यक्रम का उद्देश्य वित्तीय समावेशन, रोजगार, स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण को गति देना बताया गया।
🥔 फसल और किसान योजनाएं
8️⃣ 🥔 आलू किसानों के लिए ₹1,000 करोड़ का भाव स्थिरता कोष
उत्तर प्रदेश सरकार ने आलू किसानों को बाजार भाव गिरने की स्थिति में राहत देने के लिए 1,000 करोड़ रुपये का भामाशाह भाव स्थिरता कोष बनाने की घोषणा की है। इसके साथ आलू भंडारण और गुणवत्तापूर्ण बीज से जुड़ी दो अन्य योजनाएं भी शुरू की गई हैं। निजी शीतगृहों में आलू भंडारण पर किसानों को प्रति क्विंटल 100 रुपये तक का अनुदान मिलेगा। उच्च गुणवत्ता वाले आलू बीज की खरीद पर भी प्रति क्विंटल 1,000 रुपये तक की छूट देने की व्यवस्था बताई गई है। इन योजनाओं के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया गया है। सरकार के अनुसार इन तीनों योजनाओं से 15 लाख से अधिक आलू किसानों को सीधा लाभ मिल सकता है। योजनाओं का उद्देश्य बाजार में कीमत गिरने, भंडारण लागत और गुणवत्तापूर्ण बीज की लागत से किसानों को राहत देना है।
9️⃣ 🧊 निजी शीतगृह में आलू रखने पर ₹100 प्रति क्विंटल तक अनुदान
उत्तर प्रदेश में आलू किसानों के लिए शुरू की गई नई योजनाओं में निजी शीतगृह में आलू भंडारण पर आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है। किसानों को निजी कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने पर प्रति क्विंटल 100 रुपये तक का अनुदान मिलेगा। यह सुविधा खास तौर पर उस स्थिति में किसानों को राहत देने के उद्देश्य से है जब बाजार में आलू का भाव कम हो और किसान तत्काल बिक्री करने की स्थिति में न हों। सरकार ने आलू किसानों के लिए तीन योजनाएं शुरू की हैं और इनके लिए ऑनलाइन पोर्टल भी लॉन्च किया गया है। इसके साथ उच्च गुणवत्ता वाले आलू बीज की खरीद पर भी सहायता देने की व्यवस्था है। सरकार का अनुमान है कि इन योजनाओं से 15 लाख से अधिक किसानों को फायदा होगा। भंडारण सहायता किसानों को फसल के विपणन का बेहतर समय चुनने में मदद कर सकती है।
🔟 🌱 उच्च गुणवत्ता वाले आलू बीज पर ₹1,000 प्रति क्विंटल तक छूट
उत्तर प्रदेश सरकार ने आलू किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के लिए नई सहायता योजना शुरू की है। इसके तहत उच्च गुणवत्ता वाले आलू बीज की खरीद पर किसानों को प्रति क्विंटल 1,000 रुपये तक की छूट देने की व्यवस्था की गई है। योजना के लिए ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया गया है, जहां संबंधित किसान योजनाओं से जुड़ी प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। सरकार ने आलू किसानों के लिए बाजार भाव में गिरावट से राहत देने के लिए 1,000 करोड़ रुपये का भाव स्थिरता कोष और निजी शीतगृह में भंडारण पर प्रति क्विंटल 100 रुपये तक अनुदान की व्यवस्था भी की है। इन तीनों योजनाओं को मिलाकर आलू उत्पादन से जुड़े किसानों की लागत और बाजार जोखिम को कम करने का प्रयास किया गया है। सरकार के अनुसार योजनाओं का लाभ 15 लाख से अधिक किसानों तक पहुंच सकता है।
🌍 कृषि निर्यात और प्रसंस्कृत खाद्य
1️⃣1️⃣ 🥭 भारतीय आम, चेरी, मखाना और अन्य कृषि उत्पाद विदेश पहुंचे
भारत के कई कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों को नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जगह मिली है। आम्रपाली आम, प्रीमियम चेरी, फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज, अदरक, अनानास, शहद, लाका डोंग हल्दी, आलू बुखारा और मखाना जैसे उत्पाद अलग-अलग देशों को भेजे गए। झारखंड के गुमला और देवघर के आम्रपाली आम दुबई भेजे गए। कर्नाटक के नीलम और तोतापुरी आम मालदीव पहुंचे। जम्मू-कश्मीर की प्रीमियम चेरी और आलू बुखारा संयुक्त अरब अमीरात और सिंगापुर भेजे गए। उत्तराखंड के काशीपुर में तैयार फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज इराक भेजे गए। मेघालय के रीभोई से अदरक, अनानास, शहद और जीआई टैग वाली लाका डोंग हल्दी सिंगापुर भेजी गई। बिहार के दरभंगा के मखाना को कनाडा में खरीदार मिले। असम की प्रसंस्कृत आइसक्रीम का निर्यात भूटान किया गया।
1️⃣2️⃣ 📦 कृषि निर्यात में मूल्यवर्धित उत्पादों पर बढ़ता जोर
भारत से कृषि उत्पादों के निर्यात में पारंपरिक फसलों के साथ मूल्यवर्धित और विशेष खाद्य उत्पादों को भी नए बाजारों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। हाल की निर्यात खेपों में आम, चेरी, आलू बुखारा, फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज, अदरक, अनानास, शहद, जीआई टैग वाली हल्दी और मखाना जैसे उत्पाद शामिल रहे। इन्हें सिंगापुर, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कनाडा, भूटान और मालदीव जैसे देशों में भेजा गया। अलग-अलग राज्यों के स्थानीय उत्पादों को विदेशी बाजारों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। इसका एक महत्वपूर्ण पहलू प्रसंस्करण और विशेष गुणवत्ता वाले उत्पादों की मांग का लाभ उठाना है। उदाहरण के तौर पर दरभंगा का मखाना कनाडा पहुंचा और रीभोई के कृषि उत्पाद सिंगापुर भेजे गए। इससे अलग-अलग राज्यों के विशिष्ट कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहचान दिलाने की दिशा में प्रयास दिखाई देता है।
🌱 प्राकृतिक खेती और परमाकल्चर
1️⃣3️⃣ 🌳 परमाकल्चर खेती में खेत को एक प्राकृतिक सिस्टम मानने पर जोर
परमाकल्चर को स्थायी और प्रकृति आधारित खेती की अवधारणा के रूप में समझाया गया है। इसमें खेत को केवल फसल उत्पादन की जगह मिट्टी, पानी, पेड़, पक्षियों, जीवाणुओं और जैव विविधता से जुड़े पूरे सिस्टम के रूप में देखा जाता है। इसका उद्देश्य ऐसी खेती व्यवस्था विकसित करना है जिसमें हर मौसम के बाद खेत की प्राकृतिक क्षमता प्रभावित न हो और समय के साथ मिट्टी की स्थिति बेहतर हो। इस पद्धति में खेत की मेड़ों पर पेड़ लगाने और बारिश के पानी को जमीन में पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। पेड़ों की जड़ें मिट्टी को खोलने और पानी के रिसाव में मदद कर सकती हैं। इसके साथ जैव विविधता बढ़ाने पर जोर दिया जाता है। छोटे और सीमांत किसान भी इसे अपना सकते हैं। परमाकल्चर में खेती को प्रकृति के साथ संतुलित करके लंबे समय तक उत्पादन और खाद्य सुरक्षा बनाए रखने की अवधारणा पर काम किया जाता है।
1️⃣4️⃣ 💧 परमाकल्चर में बारिश का पानी खेत में रोकना पहला महत्वपूर्ण कदम
परमाकल्चर की अवधारणा में बारिश के पानी को खेत से बाहर जाने देने के बजाय उसे जमीन में रोकने और सोखने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके लिए खेत की मेड़ों पर पेड़ लगाने की सलाह दी जाती है। पेड़ों की जड़ें मिट्टी में जगह बनाती हैं, जिससे बारिश का पानी जमीन के अंदर जाने में मदद मिल सकती है। इसके साथ जैविक गतिविधियां और जीवाणुओं की मौजूदगी मिट्टी की स्थिति सुधारने में भूमिका निभा सकती है। इस पद्धति में केवल पानी रोकना पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि पानी का जमीन में पहुंचना भी जरूरी बताया गया है। खेत में पेड़, पानी और मिट्टी को एक-दूसरे से जुड़े हिस्सों के रूप में देखा जाता है। परमाकल्चर में प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करके खेत की सेहत सुधारने का प्रयास किया जाता है। इससे खेती में बाहरी संसाधनों पर निर्भरता घटाने की दिशा में भी काम किया जा सकता है।
1️⃣5️⃣ 🌾 छोटे किसानों के लिए बहुफसली परमाकल्चर मॉडल पर जोर
परमाकल्चर को छोटे और सीमांत किसानों के लिए उपयोगी खेती पद्धति के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय खेत में अलग-अलग फसलों को शामिल करने की सलाह दी जाती है। किसान अपनी घरेलू जरूरतों के अनुसार दाल, अनाज, सब्जियां और अन्य खाद्य फसलें एक साथ उगा सकते हैं। इससे परिवार की खाद्य जरूरतों को पूरा करने के बाद बची उपज को स्थानीय बाजार में बेचने का अवसर मिल सकता है। परमाकल्चर में बारिश के पानी, पेड़ों, पक्षियों और जैविक गतिविधियों का उपयोग करके खेती की लागत घटाने पर जोर दिया जाता है। पेड़ों से मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता और पक्षियों से प्राकृतिक कीट नियंत्रण में मदद मिलने की बात कही गई है। मल्चिंग से जमीन ढकी रहने पर निराई की जरूरत कम हो सकती है। इसका मुख्य विचार उत्पादन के साथ खेती की लागत को नियंत्रित करना है।
1️⃣6️⃣ 🌿 परमाकल्चर से सिंचाई, खाद और कीट नियंत्रण खर्च घटाने पर जोर
परमाकल्चर खेती में बाहरी इनपुट की जरूरत कम करने का लक्ष्य रखा जाता है। इसमें बारिश के पानी का अधिक उपयोग करने से सिंचाई पर होने वाला खर्च घटाने की बात कही गई है। पेड़ों और प्राकृतिक जैविक प्रक्रियाओं से मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने का प्रयास किया जाता है, जिससे बाहरी खाद पर निर्भरता कम हो सकती है। खेत में पक्षियों और अन्य जीवों की मौजूदगी प्राकृतिक कीट नियंत्रण में भूमिका निभा सकती है। मल्चिंग से मिट्टी ढकी रहती है और इससे निराई-गुड़ाई का काम कम हो सकता है। इस खेती मॉडल में केवल उत्पादन की मात्रा बढ़ाना लक्ष्य नहीं है, बल्कि खेती की कुल लागत कम करना और खेत की उत्पादकता को लंबे समय तक बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। स्थानीय स्तर पर उत्पाद बेचने को भी उपयोगी बताया गया है, जिससे किसान को दूर के बाजार पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़े।
1️⃣7️⃣ 🌳 जलवायु परिवर्तन से निपटने में पेड़ और टिकाऊ खेती की भूमिका
परमाकल्चर की अवधारणा में खेती, पेड़ और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देखा गया है। खेतों से पेड़ों की कमी को एक महत्वपूर्ण समस्या बताते हुए अधिक पेड़ लगाने पर जोर दिया गया। गांवों में उपलब्ध भूमि पर और शहरों में उपलब्ध संसाधनों के अनुसार वृक्षारोपण में भागीदारी की बात कही गई। पेड़ बढ़ने से मिट्टी, पानी और स्थानीय पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना बताई गई है। बारिश के पानी को जमीन में पहुंचाने और भूजल स्तर सुधारने की दिशा में भी काम करने पर जोर है। परमाकल्चर को किसी चमत्कारी समाधान के बजाय प्रकृति के नियमों को समझकर खेती करने की पद्धति बताया गया है। इसका उद्देश्य खेती को प्राकृतिक संसाधनों के साथ संतुलित बनाना और मिट्टी, पानी तथा जैव विविधता को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है।
📊 कृषि जिले और विकास योजनाएं
1️⃣8️⃣ 🏆 डिंडोरी प्रधानमंत्री धनधान्य कृषि योजना में जुलाई में अव्वल
मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले ने प्रधानमंत्री धनधान्य कृषि योजना के क्रियान्वयन में जुलाई महीने में चयनित जिलों के बीच पहला स्थान हासिल किया। जिले के प्रदर्शन में 36 अलग-अलग योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, विभागों के बीच समन्वय और प्रभावी निगरानी की भूमिका रही। योजना के तहत कृषि उत्पादकता बढ़ाने, किसानों की आय में सुधार, सिंचाई संसाधनों को मजबूत करने और आधुनिक कृषि तकनीक को बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जा रहा है। डिंडोरी में प्राकृतिक खेती, मिलेट उत्पादन, कृषि मशीनीकरण, सिंचाई, पशुपालन, डेयरी और किसान प्रशिक्षण जैसी गतिविधियों ने योगदान दिया। इसके अलावा फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड, शिकायतों के समाधान, प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्थाओं के डिजिटलीकरण, आधार सीडिंग और उद्यानिकी गतिविधियों में भी प्रदर्शन बेहतर रहा। जिले की उपलब्धि को विभिन्न विभागों के संयुक्त प्रयास और योजना की निगरानी से जोड़कर देखा गया है।
🌾 खरीफ फसल और बुवाई की स्थिति
1️⃣9️⃣ 🌾 देश में धान की बुवाई का रकबा 3.65% कम हुआ
14 अगस्त तक देश में धान की बुवाई 379.07 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि पिछले वर्ष इसी समय यह क्षेत्र 393.44 लाख हेक्टेयर था। इस तरह धान का बुवाई क्षेत्र 3.65 प्रतिशत घटा है। कर्नाटक, झारखंड और महाराष्ट्र में कम बारिश के कारण धान की बुवाई का रकबा प्रभावित हुआ। कर्नाटक में 2.86 लाख हेक्टेयर, झारखंड में 2.26 लाख हेक्टेयर और महाराष्ट्र में 2.25 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई। ओडिशा, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी धान के रकबे में कमी रही। खरीफ फसलों की बुवाई सामान्य तौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून शुरू होने के साथ जून में तेज होती है। इस वर्ष मानसून की शुरुआत में देरी का भी उल्लेख किया गया। बुवाई के आंकड़े बताते हैं कि बारिश की स्थिति ने कुछ प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में खरीफ क्षेत्र को प्रभावित किया है।
2️⃣0️⃣ 🌱 दलहन की बुवाई लगभग पिछले साल के स्तर पर
14 अगस्त तक देश में दलहन फसलों की बुवाई 108.14 लाख हेक्टेयर में हुई। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह क्षेत्र 108.49 लाख हेक्टेयर था। यानी कुल दलहन क्षेत्र में मामूली कमी रही। प्रमुख दलहनों में अरहर का रकबा पिछले साल के 42.01 लाख हेक्टेयर से घटकर 40.31 लाख हेक्टेयर हो गया। मूंग की बुवाई भी 33.42 लाख हेक्टेयर से घटकर 32.05 लाख हेक्टेयर रह गई। वहीं उड़द की बुवाई में बढ़ोतरी दर्ज हुई और इसका रकबा 20.79 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 23.52 लाख हेक्टेयर हो गया। इस तरह अलग-अलग दलहन फसलों में बुवाई का रुझान अलग रहा। कुल मिलाकर दलहन का क्षेत्र पिछले वर्ष के आसपास बना हुआ है। खरीफ बुवाई की स्थिति में बारिश की कमी का असर कुछ फसलों पर दिखाई दे रहा है, लेकिन दलहन का कुल क्षेत्र अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है।
2️⃣1️⃣ 🌽 मोटे अनाज का रकबा भी पिछले साल से कम
देश में मोटे अनाज की बुवाई का क्षेत्र भी पिछले वर्ष की तुलना में कम रहा। 14 अगस्त तक मोटे अनाज का रकबा 172.96 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 177.13 लाख हेक्टेयर था। यानी मोटे अनाज की बुवाई के क्षेत्र में कमी आई है। खरीफ सीजन में बारिश की स्थिति और विभिन्न राज्यों में मौसम का वितरण फसल बुवाई को प्रभावित कर रहा है। कुल मानसूनी बारिश 12 अगस्त तक सामान्य से 12 प्रतिशत कम दर्ज की गई थी। पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में कमी सबसे अधिक रही। दक्षिणी प्रायद्वीप और उत्तर-पश्चिम भारत में भी बारिश सामान्य से कम रही। ऐसे मौसम में अलग-अलग फसलों की बुवाई के क्षेत्र में बदलाव देखने को मिला है। मोटे अनाज का मौजूदा रकबा भी पिछले वर्ष की तुलना में कम दर्ज किया गया है।
🎣 मछुआरे और तटीय क्षेत्र
2️⃣2️⃣ 🚤 आंध्र प्रदेश में समुद्र में गए 8 मछुआरे लापता
आंध्र प्रदेश के अंबेडकर कोनसीमा जिले से समुद्र में मछली पकड़ने गए आठ मछुआरों का अब तक पता नहीं चल पाया है। जानकारी के अनुसार उनकी नाव 3 अगस्त को समुद्र में गई थी और 13 अगस्त तक वापस लौटने की उम्मीद थी। निर्धारित समय तक नाव वापस नहीं आई और मछुआरों से संपर्क भी नहीं हो सका। नाव में लगे मोबाइल फोन और जीपीएस सिस्टम के काम नहीं करने की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद जिला प्रशासन ने भारतीय तटरक्षक बल से सहायता मांगी। शुरुआती जानकारी के अनुसार नाव विशाखापटनम और पारादीप के बीच के तटीय क्षेत्र में हो सकती है। लापता मछुआरों और नाव की तलाश के लिए सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया जा रहा है। प्रशासन और बचाव एजेंसियां उपलब्ध जानकारी के आधार पर समुद्री क्षेत्र में खोज अभियान चला रही हैं।
🌊 बाढ़ और ग्रामीण विकास
2️⃣3️⃣ 🌊 ओडिशा में भारी बारिश से कई जिलों में बाढ़, लाखों लोग प्रभावित
ओडिशा में लगातार भारी बारिश के कारण उत्तर और तटीय इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। बालासोर, भद्रक, जाजपुर, केंद्रपाड़ा और मयूरभंज सहित कई जिलों के गांव पानी से प्रभावित हुए हैं। जाजपुर में आठ ब्लॉकों की 79 पंचायतों के 242 गांव बाढ़ की चपेट में बताए गए हैं और 16.68 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। करीब 40,500 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। केंद्रपाड़ा में 130 से अधिक गांव प्रभावित हुए हैं और राहत एवं बचाव के लिए 80 नावें लगाई गई हैं। मयूरभंज में करीब 28,000 लोग प्रभावित हुए तथा 26,741 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। एनडीआरएफ, ओडीआरएफ और फायर सर्विस की टीमें राहत कार्यों में लगी हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर स्थिति की समीक्षा की और लोगों को राहत व पुनर्वास का भरोसा दिया।
2️⃣4️⃣ 🛶 मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर लोगों की समस्याएं सुनीं
ओडिशा में बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने जाजपुर और भद्रक के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने बाढ़ग्रस्त इलाकों में पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनीं और राहत तथा पुनर्वास की व्यवस्था का भरोसा दिया। प्रभावित क्षेत्रों में पानी भरने के कारण कई गांवों में सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। प्रशासन और बचाव एजेंसियां लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में लगी हुई हैं। एनडीआरएफ, ओडीआरएफ और फायर सर्विस की टीमें राहत कार्य में तैनात हैं। केंद्रपाड़ा में भी बड़ी संख्या में नावों का उपयोग राहत एवं बचाव के लिए किया जा रहा है। जाजपुर और अन्य जिलों में प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है। सरकार का फोकस बाढ़ प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने और स्थिति सामान्य होने के बाद पुनर्वास कार्य आगे बढ़ाने पर है।
🐄 पशुपालन और पशु स्वास्थ्य
2️⃣5️⃣ 🐄 लंपी स्किन डिजीज को लेकर यूपी में पशुपालकों को सतर्क रहने की सलाह
उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग ने पशुपालकों को लंपी स्किन डिजीज यानी एलएसडी के संभावित लक्षणों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग ने पशुओं के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी करने और संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर उन्हें नजरअंदाज न करने को कहा है। किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर उसे तुरंत दूसरे पशुओं से अलग रखने और संबंधित अधिकारियों को सूचना देने की सलाह दी गई है। विभाग के अनुसार समय पर बीमारी की पहचान और जरूरी नियंत्रण उपाय पशुधन की सुरक्षा में मदद कर सकते हैं। पशुपालकों को अपने पशुओं के स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों पर नजर रखने की जरूरत बताई गई है। बीमारी के संदिग्ध मामलों में समय पर सूचना देने से आवश्यक कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है। विभाग की अपील का मुख्य उद्देश्य पशुओं में बीमारी की स्थिति को समय रहते पहचानना और संभावित प्रसार को नियंत्रित करना है।
🚜 राज्यवार खेती सलाह
2️⃣6️⃣ 🌱 तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के किसानों के लिए खेती की सलाह
दक्षिणी तेलंगाना में किसानों को तोरई और करेले की बुवाई करने की सलाह दी गई है। मिर्च, टमाटर, बैंगन और गेंदे की पौध को सड़ने की बीमारी से बचाने के लिए नर्सरी ऊंची क्यारियों में तैयार करने को कहा गया है। आंध्र प्रदेश के अधिक ऊंचाई वाले आदिवासी क्षेत्रों में धान की बुवाई करने और बुवाई के बाद खेत में उचित जल स्तर बनाए रखने की सलाह दी गई है। दक्षिणी आंध्र प्रदेश में किसान रागी और कोरा जैसे छोटे अनाजों की बुवाई कर सकते हैं। इन सलाहों का मुख्य उद्देश्य मौजूदा मौसम और क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार फसल गतिविधियों को व्यवस्थित करना है। नर्सरी में जलभराव रोकने और खेत में आवश्यक पानी बनाए रखने पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई है। किसानों को अपनी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कृषि विभाग की सलाह का पालन करने पर ध्यान देना चाहिए।
2️⃣7️⃣ 🌾 तमिलनाडु में धान, कपास, मक्का और केले के लिए जरूरी सलाह
तमिलनाडु के किसानों को क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग कृषि कार्य करने की सलाह दी गई है। केले के पौधों को तेज हवाओं से बचाने के लिए सहारा देने को कहा गया है। उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में साफ मौसम के दौरान धान की बुवाई करने और धान की नर्सरी में उचित जल निकासी बनाए रखने की सलाह दी गई है। पश्चिमी क्षेत्र में कपास और मक्का की बुवाई जारी रखने को कहा गया है। कावेरी डेल्टा क्षेत्र में धान की नर्सरी तैयार करने की सलाह दी गई है। पहाड़ी इलाकों में खेतों में पानी जमा न होने देने पर जोर दिया गया है और फिलहाल उर्वरक तथा कीटनाशकों का प्रयोग टालने की सलाह दी गई है। तटीय क्षेत्रों में केले के खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखने को कहा गया है। क्षेत्रवार सलाह का उद्देश्य फसल और मौसम की स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार खेती के कार्यों को व्यवस्थित करना है।
2️⃣8️⃣ 🌶️ शिमला मिर्च की खेती: रोपाई के बाद हल्की सिंचाई और नियमित पानी जरूरी
शिमला मिर्च की खेती के लिए नर्सरी तैयार करने के बाद पौधों को मुख्य खेत में रोपा जाता है। उपलब्ध कृषि सलाह के अनुसार शिमला मिर्च की खेती अलग-अलग परिस्थितियों में वर्षभर की जा सकती है। रोपाई के समय पौधों के बीच लगभग 45 सेंटीमीटर दूरी रखने की सलाह दी गई है। रोपाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करनी चाहिए। इसके बाद 10 से 15 दिन के अंतराल पर फसल में पानी देने की सलाह दी गई है। शिमला मिर्च में सफेद मक्खी का प्रकोप होने का खतरा रहता है। इससे बचाव के लिए किसी भी दवा का प्रयोग विशेषज्ञ की सलाह से करने को कहा गया है। सफेद मक्खी से बचाव के लिए नेट हाउस में शिमला मिर्च की खेती को भी बेहतर विकल्प बताया गया है। बाजार में हरी शिमला मिर्च के अलावा लाल और पीली शिमला मिर्च की भी मांग बताई गई है।
🏛️ अन्य राष्ट्रीय और राजनीतिक खबरें
2️⃣9️⃣ 🏛️ भाजपा ने कई राज्यों के लिए नए प्रभारी नियुक्त किए
भारतीय जनता पार्टी ने संगठन में बदलाव करते हुए उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात समेत कई राज्यों के लिए नए प्रभारियों की नियुक्ति की है। पार्टी ने आगामी चुनावों और संगठनात्मक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग राज्यों की जिम्मेदारियां सौंपी हैं। नए प्रभारियों की नियुक्ति का संबंध पार्टी के संगठनात्मक संचालन और राज्य स्तर की गतिविधियों के समन्वय से है। संबंधित नेता अपने-अपने राज्यों में संगठन के कामकाज और पार्टी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाएंगे। यह बदलाव पार्टी की आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक तैयारियों के बीच किया गया है। खबर का सीधा संबंध खेती से नहीं है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों और किसानों से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक दलों की गतिविधियों को देखते हुए राज्य स्तर के ऐसे संगठनात्मक बदलाव महत्वपूर्ण हो सकते हैं। उपलब्ध सामग्री में नए नियुक्त प्रभारियों के नामों का पूरा विवरण नहीं दिया गया है।
3️⃣0️⃣ ⚖️ कर्नाटक वेटरनरी ऑफिसर भर्ती मामले में ईडी की 21 जगहों पर कार्रवाई
कर्नाटक में वेटरनरी ऑफिसर भर्ती से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की है। ईडी के बेंगलुरु जोनल कार्यालय की टीम ने पीएमएलए की धारा 17 के तहत कर्नाटक और अहमदाबाद में कुल 21 ठिकानों पर कार्रवाई की। मामला भर्ती प्रक्रिया से संबंधित है। जांच एजेंसी द्वारा संबंधित परिसरों में तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की जा रही है। उपलब्ध जानकारी में कार्रवाई के दौरान जब्त की गई वस्तुओं या दस्तावेजों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए मामले में आगे की स्थिति जांच के आधार पर स्पष्ट होगी। यह कार्रवाई सरकारी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई को दर्शाती है। वेटरनरी ऑफिसर भर्ती से संबंधित मामले में ईडी की जांच आगे भी जारी रह सकती है और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
3️⃣1️⃣ 🎓 झारखंड छात्र आंदोलन के बीच भर्ती परीक्षाओं पर बड़ा फैसला
झारखंड में 24 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने भर्ती परीक्षाओं को लेकर बड़ा फैसला घोषित किया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने टीडीपीएल एजेंसी के माध्यम से कराई गई जेएसएससी, सीजीएल समेत सभी परीक्षाओं और उनके परिणामों को रद्द करने की घोषणा की। साथ ही 2014 से अब तक हुई भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच सीआईडी से कराने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार छात्रों की सभी मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं और आंदोलन जारी रहने की बात कही गई है। कुछ नौकरी कर रहे युवाओं ने फैसले पर असहमति जताते हुए न्यायालय का रास्ता अपनाने की बात कही। उनका कहना है कि उन्होंने अदालत के माध्यम से नौकरी प्राप्त की थी। इस मामले में सरकार के फैसले, सीआईडी जांच और छात्रों की आगे की रणनीति पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी।
🌾 आज की खेती से जुड़ी सबसे जरूरी बातें
📌 राजस्थान: कृषि रोडमैप में नई फसल, प्रोसेसिंग, मार्केटिंग और निर्यात पर जोर।
📌 लखपति दीदी: राजस्थान का लक्ष्य 16 लाख से बढ़ाकर 32 लाख।
📌 यूरिया: किसानों को ₹266 प्रति बोरी उपलब्ध कराने की बात।
📌 नकली खाद-बीज: सख्त कानून लाने की तैयारी।
📌 उत्तर प्रदेश आलू: ₹1,000 करोड़ भाव स्थिरता कोष।
📌 आलू भंडारण: निजी कोल्ड स्टोरेज पर ₹100/क्विंटल तक अनुदान।
📌 आलू बीज: उच्च गुणवत्ता वाले बीज पर ₹1,000/क्विंटल तक छूट।
📌 कृषि निर्यात: आम, चेरी, मखाना, अदरक, अनानास, शहद और अन्य उत्पाद विदेश पहुंचे।
📌 परमाकल्चर: पेड़, बारिश का पानी, मिट्टी और जैव विविधता संरक्षण पर जोर।
📌 डिंडोरी: प्रधानमंत्री धनधान्य कृषि योजना में जुलाई में चयनित जिलों में प्रथम।
📌 धान: 14 अगस्त तक बुवाई का क्षेत्र 3.65% कम।
📌 दलहन: कुल रकबा पिछले साल के लगभग बराबर।
📌 ओडिशा: भारी बारिश से कई जिलों में गंभीर बाढ़।
📌 आंध्र प्रदेश: 8 मछुआरे समुद्र में लापता, तलाश अभियान जारी।
📌 पशुपालन: यूपी में लंपी स्किन डिजीज के संभावित लक्षणों पर निगरानी की सलाह।
📌 शिमला मिर्च: रोपाई के बाद हल्की सिंचाई और 10–15 दिन के अंतराल पर पानी।
📌 तेलंगाना: तोरई और करेले की बुवाई की सलाह।
📌 तमिलनाडु: क्षेत्र के अनुसार धान, कपास, मक्का और केले की खेती संबंधी सलाह।
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