किसान समाचार: आज की बड़ी खबरें, सरकारी योजनाएं और खेती की ताजा जानकारी

🌾 1. 22 अक्टूबर से देशभर में शुरू होगा ‘खेत बचाओ अभियान’
देशभर के किसानों के लिए कृषि क्षेत्र से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। 22 अक्टूबर से देशभर में ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू किया जाएगा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण समस्याओं और उनके बेहतर प्रबंधन के बारे में व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराना है। अभियान के दौरान कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञ और मैदानी कर्मचारी सीधे किसानों तक पहुंचकर जानकारी देंगे।
इस अभियान में मुख्य रूप से मिट्टी की जांच, पराली प्रबंधन और संतुलित उर्वरक उपयोग जैसे विषयों पर किसानों को जागरूक किया जाएगा। कृषि मंत्रालय की समीक्षा बैठक में अभियान की तैयारियों पर चर्चा की गई और इसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।
अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य मिट्टी की घटती सेहत, फसल अवशेषों के अनुचित प्रबंधन और रासायनिक खादों के असंतुलित इस्तेमाल से जुड़ी समस्याओं को किसानों के सामने रखना है। अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों को गांवों तथा खेतों तक पहुंचकर किसानों से सीधे संवाद करने के लिए कहा गया है।
इस पहल के माध्यम से किसानों को खेती में मिट्टी की स्थिति समझने, फसल अवशेषों का बेहतर प्रबंधन करने और उर्वरकों के संतुलित उपयोग के बारे में व्यावहारिक जानकारी मिलने की उम्मीद है।
🌱 2. प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों की संख्या लक्ष्य से आगे
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन से जुड़ी समीक्षा में प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की जानकारी सामने आई है। वर्ष 2025-26 के लिए 18.75 लाख किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था, जबकि इस अवधि में 20.93 लाख किसान प्राकृतिक खेती से जुड़े बताए गए हैं।
इसी अवधि में प्राकृतिक खेती के लिए 7.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करने का लक्ष्य था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 10.3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र कवर किया गया। इस तरह किसानों की संख्या और कवर किए गए क्षेत्र दोनों के मामले में निर्धारित लक्ष्य से अधिक प्रगति दर्ज की गई।
कृषि योजनाओं की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री किसान योजना से जुड़े मामलों पर भी ध्यान देने के निर्देश दिए गए। पात्र किसानों को योजना से जोड़ने, अपात्र लाभार्थियों को हटाने और कृषि खरीद व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी करने पर जोर दिया गया।
प्राकृतिक खेती से संबंधित इस समीक्षा में सामने आए आंकड़े कृषि क्षेत्र में इस पद्धति से जुड़े किसानों की बढ़ती संख्या को दर्शाते हैं। हालांकि उपलब्ध समाचार में प्राकृतिक खेती से किसानों की व्यक्तिगत आय या उत्पादन में हुए बदलाव से संबंधित आंकड़े नहीं दिए गए हैं।
किसानों के लिए यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्राकृतिक खेती से जुड़े कार्यक्रमों के तहत बड़ी संख्या में किसानों और कृषि क्षेत्र को कवर किए जाने की जानकारी सामने आई है।
🧬 3. रांची में जीनोमिक सुविधा का उद्घाटन, 1,400 से अधिक किसान होंगे शामिल
झारखंड के रांची में कृषि क्षेत्र से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम 8 अक्टूबर को आयोजित किया जा रहा है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान, रांची में जीनोमिक सुविधा सहित कई महत्वपूर्ण सुविधाओं का उद्घाटन करेंगे।
कार्यक्रम के दौरान संस्थान के मुख्य प्रशासनिक भवन, बिरसा मुंडा बहुउद्देशीय सभागार और जयपाल सिंह मुंडा खेल परिसर का उद्घाटन किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा गेस्ट हाउस का शिलान्यास भी प्रस्तावित है।
इस अवसर पर प्री-रबी किसान गोष्ठी और कृषि आदान वितरण कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कार्यक्रम में 1,400 से अधिक किसान भाग लेंगे। किसानों, वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों के बीच संवाद तथा ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए इसे महत्वपूर्ण मंच बताया गया है।
कार्यक्रम में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री के अलावा अन्य केंद्रीय और राज्य स्तर के प्रतिनिधियों तथा कृषि क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों की उपस्थिति की जानकारी भी दी गई है।
किसानों के दृष्टिकोण से इस कार्यक्रम की खास बात यह है कि इसमें किसान और कृषि विशेषज्ञ एक ही मंच पर खेती से जुड़े विषयों पर संवाद करेंगे। साथ ही कृषि आदान वितरण कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को कृषि गतिविधियों से संबंधित सहायता उपलब्ध कराने की योजना भी कार्यक्रम का हिस्सा है।
🦪 4. मोती पालन योजना: किसानों को मिलेगा 40 प्रतिशत तक सब्सिडी का लाभ
उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में किसानों के लिए मोती पालन से जुड़ी एक नई योजना शुरू की गई है। इस पहल के तहत किसान पारंपरिक मछली पालन के साथ तालाब में मोती पालन को अतिरिक्त आय के विकल्प के रूप में अपना सकेंगे।
योजना के तहत इच्छुक किसानों को मोती पालन की तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने के साथ प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। उपलब्ध समाचार के अनुसार परियोजना लागत पर 40 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई है।
योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक किसानों को मत्स्य विभाग के पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन प्रक्रिया के बाद चयनित किसानों को मोती पालन की तकनीकी जानकारी दी जाएगी और उन्हें पालन की प्रक्रिया से भी जोड़ा जाएगा।
इस योजना का उद्देश्य पारंपरिक मत्स्य पालन करने वाले किसानों को आय का एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराना है। यानी किसान केवल मछली पालन तक सीमित न रहकर उसी तालाब आधारित गतिविधि के साथ मोती पालन को भी अपनाने का विकल्प देख सकते हैं।
समाचार में यह भी बताया गया है कि उत्तर प्रदेश में पहली बार इस तरह की पहल शुरू की जा रही है और मऊ जिले में इसे बढ़ावा देने के लिए विशेष योजना लागू की गई है।
किसानों के लिए योजना से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण बातें ऑनलाइन आवेदन, तकनीकी प्रशिक्षण और परियोजना लागत पर 40 प्रतिशत तक सब्सिडी हैं।
🍄 5. हिमाचल में मशरूम की खेती से किसानों को नई आय का अवसर
हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में सीमित कृषि भूमि और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच किसान पारंपरिक खेती के साथ नए विकल्प तलाश रहे हैं। छोटा भंगाल क्षेत्र में मशरूम की खेती को इसी दिशा में बढ़ावा दिया जा रहा है।
समाचार के अनुसार यहां जापानी तकनीक और स्थानीय परिस्थितियों के मेल से मशरूम उत्पादन को आगे बढ़ाया जा रहा है। मशरूम की बाजार में मांग के साथ इसके स्वाद और पोषक गुणों को भी इसकी खासियत के रूप में बताया गया है। इसे ताजा बेचने के अलावा सुखाकर भी बाजार में उपलब्ध कराया जा सकता है।
किसानों को मशरूम उत्पादन शुरू करने से लेकर इसकी देखभाल और कटाई तक की तकनीकी जानकारी प्रशिक्षण के माध्यम से दी जा रही है। किसानों को उत्पादन इकाइयां उपलब्ध कराने की जानकारी भी दी गई है, ताकि वे अपने स्तर पर मशरूम की खेती शुरू कर सकें।
जापान इंडिया कॉर्पोरेशन एजेंसी के सहयोग से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पिछले तीन वर्षों में 40 प्रशिक्षण शिविर लगाए गए और 472 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया।
रिपोर्ट में किसानों के सामने बाजार से जुड़ी चुनौती का भी उल्लेख है। इसलिए उत्पादन के साथ बाजार तक पहुंच और बिक्री की व्यवस्था इस खेती को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण विषय के रूप में सामने आती है।
🥭 6. दरभंगा में आम उत्कृष्टता केंद्र की दिशा में पहल तेज
बिहार के दरभंगा जिले में आम उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की दिशा में गतिविधियां तेज होने की जानकारी सामने आई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिकों की टीम ने जिले में संभावित स्थल और पुराने आम के बागों का निरीक्षण किया।
वैज्ञानिकों ने शुभंकरपुर सहित जिले के आधा दर्जन से अधिक पुराने आम के बागों का भ्रमण किया। इस दौरान पुराने बागों की स्थिति, उपलब्ध संसाधनों और भविष्य में विकास की संभावनाओं का जायजा लिया गया।
प्रस्तावित आम उत्कृष्टता केंद्र के माध्यम से आम की जैव विविधता के संरक्षण, मिथिला क्षेत्र की स्थानीय और पारंपरिक आम किस्मों के विकास तथा पुराने बागों के जीर्णोद्धार पर काम करने की योजना बताई गई है।
इसके अलावा फलदार बागों में सिंचाई, पोषण और रोग प्रबंधन से संबंधित क्लस्टर आधारित प्रशिक्षण की व्यवस्था करने की बात कही गई है। इससे बागवानी किसानों को खेती से जुड़े इन महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की दिशा में काम हो सकता है।
समाचार के अनुसार प्रस्तावित केंद्र को आम उत्पादन के साथ रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में भी विकसित करने की योजना है। प्रसंस्करण इकाइयों के विकास और उत्पादों को वैश्विक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य करने की बात कही गई है।
🧅 7. नासिक में प्याज के थोक भाव नरम, नई आवक का असर
महाराष्ट्र के नासिक में करीब एक महीने तक ऊंचे रहने के बाद प्याज के थोक भाव में नरमी देखने को मिली है। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से नई फसल की आवक बढ़ने के कारण देश की प्रमुख प्याज मंडियों में से एक लासलगांव में कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार सितंबर की शुरुआत में अच्छी गुणवत्ता वाला प्याज करीब 55 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रहा था। बाद में इसका भाव घटकर लगभग 40 रुपये प्रति किलो रह गया। इसी तरह कम गुणवत्ता वाले प्याज का भाव करीब 45 रुपये से घटकर लगभग 35 रुपये प्रति किलो बताया गया है।
नई फसल की बढ़ती आवक को कीमतों में आई नरमी का प्रमुख कारण बताया गया है। हालांकि नासिक के प्याज की होटल और रेस्टोरेंट उद्योग में मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार होटल और रेस्टोरेंट क्षेत्र में कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के प्याज की तुलना में नासिक के प्याज की मांग अधिक बनी हुई है।
प्याज किसानों के लिए यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बाजार में आवक बढ़ने का असर थोक कीमतों पर दिखाई दे रहा है। किसानों के लिए मंडी में फसल की आवक और विभिन्न गुणवत्ता के प्याज के भाव पर नजर रखना महत्वपूर्ण बाजार अपडेट के रूप में सामने आता है।
🌾 8. प्रतापगढ़ में धान की फसल पकने लगी, जल्द शुरू हो सकती है कटाई
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ क्षेत्र में खरीफ सीजन की धान की फसल अब तेजी से पकने लगी है। डाही क्षेत्र और आसपास के गांवों में खेतों में धान की बालियां निकल आई हैं और कई खेतों में फसल कटाई के लिए तैयार बताई गई है।
समाचार के अनुसार जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है और जिन्होंने समय से पहले धान की रोपाई की थी, उनके खेतों में फसल लगभग तैयार हो चुकी है। यदि मौसम अनुकूल रहा तो करीब एक सप्ताह के भीतर कुछ क्षेत्रों में धान की कटाई शुरू होने की संभावना बताई गई है।
क्षेत्र में जल्दी तैयार होने वाली धान की कई किस्मों की रोपाई की गई है। इनमें आईआर 64100, सांभा और महेंद्र गोल्ड जैसी किस्मों का उल्लेख किया गया है।
धान की फसल पकने के साथ अब किसानों की नजर दो महत्वपूर्ण चीजों पर है—मौसम और मंडी भाव। कटाई के समय मौसम की स्थिति फसल की गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण होगी, जबकि मंडी में मिलने वाला भाव किसानों की बिक्री से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय रहेगा।
प्रतापगढ़ क्षेत्र के किसानों के लिए यह खरीफ फसल के अंतिम चरण से जुड़ी महत्वपूर्ण खबर है। जिन खेतों में धान पूरी तरह तैयार हो रहा है, वहां किसान कटाई की तैयारी के साथ मौसम और बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
🌼 9. बिहार में गेंदा फूल की खेती के लिए क्लस्टर आधारित योजना शुरू
बिहार में पारंपरिक फसलों के साथ फूलों की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने के लिए गेंदा फूल उत्पादन एवं प्रसंस्करण योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत किसानों को गेंदा फूल की क्लस्टर आधारित खेती, प्रसंस्करण, बाजार और परिवहन से जुड़ी गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई है।
इच्छुक किसानों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और उपलब्ध जानकारी के अनुसार आवेदन की अंतिम तारीख 31 दिसंबर 2026 निर्धारित की गई है।
योजना में क्लस्टर आधारित खेती को विशेष महत्व दिया गया है। एक क्लस्टर का कुल क्षेत्रफल 25 हेक्टेयर निर्धारित किया गया है। इसके लिए एक पंचायत या दो समीपवर्ती पंचायतों को मिलाकर क्लस्टर बनाया जा सकता है। किसानों को निर्धारित क्लस्टर के भीतर ही आवेदन करना होगा। क्लस्टर से बाहर प्राप्त होने वाले आवेदन निरस्त किए जाने की संभावना बताई गई है।
योजना का उद्देश्य फूलों की खेती को संगठित रूप देना और इसके परिवहन तथा विपणन को आसान बनाना है। इससे किसानों के लिए फूलों की खेती को अतिरिक्त आय के विकल्प के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
किसानों के लिए आवेदन की समय सीमा, क्लस्टर की शर्त और ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया इस योजना की महत्वपूर्ण बातें हैं।
👩🌾 10. अरुणाचल प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों से महिलाओं को आजीविका का सहारा
अरुणाचल प्रदेश के एक गांव में महिलाओं का पारंपरिक हुनर अब आजीविका का माध्यम बन रहा है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं हस्तशिल्प तथा कृषि और बागवानी से जुड़े उत्पाद तैयार कर उन्हें बाजार तक पहुंचा रही हैं।
स्थानीय उत्पादन और स्थानीय बाजार को जोड़ने वाला यह मॉडल महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का अवसर तैयार कर रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि स्वयं सहायता समूहों का अपना आउटलेट भी है, जहां समूह द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की बिक्री की जाती है।
महिलाएं अलग-अलग स्थानों से सामग्री जुटाकर अपने उत्पाद तैयार करती हैं और फिर उन्हें बिक्री के लिए बाजार तक पहुंचाती हैं। इस व्यवस्था में स्थानीय स्तर पर उत्पादन और समूह के माध्यम से बाजार तक पहुंच बनाने पर जोर दिखाई देता है।
रिपोर्ट में महिलाओं के जीवन में स्थानीय आजीविका के अवसरों और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिले आवास के प्रभाव का भी उल्लेख किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार महिलाओं के लिए स्थानीय हुनर, संगठन और बाजार का साथ आजीविका का आधार बन रहा है।
यह खबर कृषि और बागवानी से जुड़े ग्रामीण उत्पादों को स्थानीय स्तर पर तैयार कर समूह आधारित व्यवस्था के माध्यम से बाजार तक पहुंचाने के उदाहरण के रूप में महत्वपूर्ण है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय उत्पादन और बाजार के बीच संबंध को समझा जा सकता है।
🔥 11. हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में करीब 50 प्रतिशत कमी
हरियाणा में धान की कटाई का सीजन तेज होने के बावजूद पराली जलाने की घटनाओं में कमी दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 3 अक्टूबर तक राज्य में खेतों में पराली जलाने के केवल चार मामले सामने आए। पिछले वर्ष इसी अवधि में सात घटनाएं दर्ज की गई थीं।
15 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच छह राज्यों में कुल 218 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें पंजाब में 79, मध्यप्रदेश में 70 और उत्तर प्रदेश में 59 मामले बताए गए। हरियाणा और राजस्थान में चार-चार तथा दिल्ली और उत्तराखंड में एक-एक घटना दर्ज की गई।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार हरियाणा में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में पराली जलाने की घटनाओं में करीब 50 प्रतिशत कमी आई है। रिपोर्ट में इस कमी के पीछे केवल सरकारी सख्ती को ही कारण नहीं बताया गया, बल्कि पराली के बढ़ते बाजार को भी एक महत्वपूर्ण वजह माना गया है।
अधिकारियों और किसानों के अनुसार पराली बेचकर कमाई का अवसर मिलने से कुछ किसान इसे जलाने के बजाय खेत से हटाने में रुचि दिखा रहे हैं।
पराली प्रबंधन किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। इस रिपोर्ट में पराली के उपयोग और उससे मिलने वाले बाजार अवसर को पराली जलाने में कमी से जोड़कर देखा गया है।
☀️ 12. कर्नाटक की 217 से अधिक तहसीलें सूखा प्रभावित, 2.7 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित
कर्नाटक में सूखे की स्थिति किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। राज्य सरकार ने 217 से ज्यादा तहसीलों को सूखा प्रभावित माना है। इन क्षेत्रों में फसलों के साथ पशुओं के चारे पर भी गंभीर असर पड़ने की जानकारी सामने आई है।
सूखे की स्थिति के कारण कुछ क्षेत्रों में चारे की कमी इतनी गंभीर बताई गई है कि किसानों ने अपने पशुओं को कम कीमत पर बेचने की बात सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सूखे से करीब 2.7 लाख हेक्टेयर फसलें प्रभावित हुई हैं।
प्रभावित फसलों में मक्का, बाजरा, मूंगफली, सूरजमुखी और प्याज शामिल हैं। सूखे से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्रीय सूखा अध्ययन टीम प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रही है।
टीम के दौरे की शुरुआत विजयनगर जिले से होने की जानकारी दी गई है। जिन क्षेत्रों में बारिश की कमी के कारण फसलों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है, वहां स्थिति का निरीक्षण किया जाएगा।
केंद्र और राज्य स्तर से संबंधित जिला प्रशासन, कृषि विभाग और जिला राजस्व विभाग को प्रभावित क्षेत्रों के दौरे और स्थिति के आकलन से संबंधित निर्देश जारी किए गए हैं।
कर्नाटक के प्रभावित किसानों के लिए यह खबर फसल नुकसान और पशु चारे की स्थिति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने लाती है।
💧 13. मेघालय, मणिपुर और मिजोरम के किसानों के लिए खेती सलाह
पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों के लिए मौसमी खेती से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सलाह सामने आई हैं। मेघालय में धान के खेतों में 2 से 3 सेंटीमीटर तक हल्की पानी की परत बनाए रखने की सलाह दी गई है। वहीं पकी मक्का, धान, अदरक और सब्जियों के खेतों में जलभराव से बचने के लिए उचित जल निकासी व्यवस्था रखने को कहा गया है।
मणिपुर में सोयाबीन, मूंगफली और उड़द की पकी फलियों की कटाई जारी रखने की सलाह दी गई है। इसके अलावा प्याज और कोल फसलों की पौध तैयार करने के लिए नर्सरी बेड बनाने तथा बुवाई करने की जानकारी दी गई है। मटर की बुवाई के लिए खेत तैयार करने को भी कहा गया है।
मिजोरम के ऊपरी क्षेत्रों में पकी धान की फसल की कटाई करने और उपज को सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह दी गई है। अगेती पत्ता गोभी, फूलगोभी और ब्रोकली की पौध तैयार करने के लिए नर्सरी बनाने की जानकारी भी दी गई है।
इन सलाहों में अलग-अलग राज्यों की फसल अवस्था और मौसम के अनुसार खेत में पानी, कटाई, नर्सरी और जल निकासी पर विशेष ध्यान देने की बात सामने आती है।
🌱 14. नागालैंड और त्रिपुरा के किसानों के लिए धान व सब्जी फसलों की सलाह
नागालैंड और त्रिपुरा के किसानों के लिए भी मौसमी खेती से संबंधित महत्वपूर्ण सलाह दी गई है। नागालैंड में टोरी की बुवाई करने तथा पकी मक्का की बालियों और सोयाबीन की पकी फलियों की कटाई जारी रखने की जानकारी दी गई है।
इसके अलावा राजमा की बुवाई करने और फूलगोभी की पौध तैयार करने के लिए नर्सरी बेड बनाने की सलाह दी गई है। निचले क्षेत्रों के धान के खेतों में बालियां निकलने से लेकर दाने में दूध भरने की अवस्था तक 2 से 5 सेंटीमीटर पानी बनाए रखने की जानकारी दी गई है।
त्रिपुरा में अगेती सर्दियों की फूलगोभी, पत्ता गोभी और ब्रोकली की पौध तैयार करने के लिए नर्सरी बेड बनाने की सलाह दी गई है। धान की फसल में बालियां निकलने की अवस्था के दौरान करीब 5 सेंटीमीटर पानी बनाए रखने की जानकारी दी गई है।
इन सलाहों में किसानों को मौजूदा फसल की अवस्था के अनुसार कटाई, सिंचाई और अगली फसल की तैयारी पर ध्यान देने को कहा गया है। विशेष रूप से सब्जियों की पौध तैयार करने और धान में आवश्यक पानी बनाए रखने से जुड़ी जानकारी किसानों के लिए मौसमी कृषि कार्यों की योजना बनाने में उपयोगी हो सकती है।
🍅 15. टमाटर की खेती: बुवाई, पौध रोपाई और खेत की तैयारी की जानकारी
टमाटर की खेती करने वाले किसानों के लिए मिट्टी, बीज मात्रा और पौध रोपाई से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। टमाटर के लिए जीवांशयुक्त बलुई दोमट और दोमट मिट्टी को उपयुक्त बताया गया है।
एक हेक्टेयर क्षेत्र में सामान्य किस्म के लिए 400 से 500 ग्राम बीज की आवश्यकता बताई गई है, जबकि संकर किस्म के लिए 150 से 200 ग्राम बीज पर्याप्त बताया गया है। जिन किसानों की पौध तैयार हो चुकी है, वे खेत तैयार करके इसकी रोपाई कर सकते हैं।
रोपाई से पहले खेत की अच्छी जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बनाने और क्यारियां तैयार करने की सलाह दी गई है। क्यारी की चौड़ाई 0.75 मीटर और लंबाई जरूरत के अनुसार 5 से 10 मीटर तक रखी जा सकती है।
सीमित बढ़वार वाली फसल में कतार से कतार 60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे 45 सेंटीमीटर दूरी रखने की जानकारी दी गई है। वहीं असीमित बढ़वार वाली फसल में कतारों के बीच 75 सेंटीमीटर और पौधों के बीच 50 सेंटीमीटर दूरी रखने को कहा गया है।
रोपाई दोपहर बाद करना बेहतर बताया गया है। रोपाई के तुरंत बाद आवश्यकता होने पर हल्की सिंचाई करने तथा बाद में जरूरत के अनुसार पानी देने की सलाह दी गई है।
🐛 16. टमाटर में रोग और कीट से बचाव के लिए रखें सावधानी
टमाटर की फसल में कई प्रकार के रोग और कीट नुकसान पहुंचा सकते हैं। उपलब्ध कृषि सलाह में किसानों को फसल की नियमित देखभाल और रोग-कीट की स्थिति पर नजर रखने की जानकारी दी गई है।
टमाटर में झुलसा रोग की स्थिति में पुरानी पत्तियां पीली पड़ने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा मोजाइक रोग को भी फसल के लिए नुकसानदायक बताया गया है। यह विषाणु से फैलने वाला रोग है और इसके प्रभाव में पत्तियां सिकुड़ सकती हैं तथा पौधे की बढ़वार रुक सकती है।
मोजाइक से प्रभावित सिकुड़ी हुई पत्तियों को हटाने और उन्हें जला देने की सलाह दी गई है। इससे प्रभावित पौधों को खेत में बनाए रखने के बजाय उन्हें हटाने पर जोर दिया गया है।
टमाटर की फसल में पत्ती, तना और फल भेदक कीट भी लग सकते हैं। इन कीटों के प्रकोप से प्रभावित पत्तियां गिरने की जानकारी दी गई है। ऐसे मामलों में विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उचित दवाओं का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
टमाटर किसानों के लिए फसल की नियमित निगरानी महत्वपूर्ण है। समय पर रोग के लक्षण पहचानना, प्रभावित हिस्सों को हटाना और कीट प्रबंधन के लिए विशेषज्ञ की सलाह लेना इस कृषि सलाह का मुख्य हिस्सा है।
📚 संदर्भ
- स्रोत: DD Kisan
